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7 बड़े मंत्रालय, 24 कॉन्फ्रेंस हॉल और 600 कारों की पार्किंग... PM मोदी ने किया 'कर्तव्य भवन-3' का उद्घाटन, जानें इस इमारत की खासियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया. यह भवन गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, डीओपीटी, पेट्रोलियम मंत्रालय और पीएसए जैसे प्रमुख मंत्रालयों व विभागों को एक ही स्थान पर लाकर कार्य दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देगा. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत ऐसे कुल 10 भवन बनाए जा रहे हैं.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 का भव्य उद्घाटन किया. यह भवन सिर्फ एक नई इमारत नहीं है, बल्कि देश की नौकरशाही को अधिक संगठित, आधुनिक और पर्यावरण के प्रति सजग बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. यह भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसके तहत कुल 10 आधुनिक कार्यालय भवन बनाए जा रहे हैं.
दरअसल, कर्तव्य भवन-3 के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम छह बजे कर्तव्य पथ पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी ने इस परियोजना को “आत्मनिर्भर प्रशासन का प्रतीक” बताया और कहा कि यह भवन ‘कर्तव्य’ की भावना को मजबूती देता है.
क्या है कर्तव्य भवन की खासियत
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लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैले इस भवन का डिज़ाइन न केवल कार्यकुशलता को ध्यान में रखकर बनाया गया है, बल्कि यह पूरी तरह हरित भवन (Green Building) की अवधारणा पर आधारित है. दो बेसमेंट और सात मंजिलों वाले इस भवन में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, पेट्रोलियम मंत्रालय, डीओपीटी और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय होगा. यहां आईटी-सक्षम कार्यस्थल, स्मार्ट एंट्री सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सोलर पैनल, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं. यह भवन 30% कम ऊर्जा की खपत करता है. एलईडी लाइट्स, स्मार्ट लिफ्ट्स, ऊर्जा बचत करने वाले सेंसर और सौर ऊर्जा आधारित तकनीक इसे खास बनाते हैं.
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पुराने भवन, नई चुनौती
फिलहाल मंत्रालय जिन भवनों से काम कर रहे हैं, वे शास्त्री भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन और निर्माण भवन जैसे हैं, जो 1950 से 1970 के दशक में बने थे. इनकी मरम्मत और रखरखाव में सरकार को हर साल भारी खर्च उठाना पड़ता है. इसके अलावा इन भवनों की संरचना आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई है. कर्तव्य भवन जैसे नए कार्यालय न केवल इस खर्च को कम करेंगे, बल्कि मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित करेंगे. इससे हर साल करीब 1500 करोड़ रुपये का किराया बचाया जा सकेगा.
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अन्य भवनों का निर्माण भी अंतिम चरण में
शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जानकारी दी कि अगले महीने तक कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का निर्माण भी पूरा हो जाएगा. बाकी सात भवनों को अप्रैल 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इन सभी भवनों में तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण के अनुकूलता को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जा रही है. एक कमांड सेंटर से पूरे परिसर की निगरानी की व्यवस्था भी की गई है.
कर्तव्य भवन से कैसे बदलेगा प्रशासनिक नक्शा
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इन भवनों का निर्माण सिर्फ नई दीवारें खड़ी करना नहीं है, यह भारत के प्रशासनिक भविष्य को मजबूत नींव देने जैसा है. जब सभी मंत्रालय एक ही स्थान पर होंगे, तो आपसी समन्वय बढ़ेगा. फाइलों की गति तेज होगी, निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी. साथ ही इन भवनों को इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से जोड़ने की योजना भी तैयार की जा रही है, जिससे कर्मचारियों को आने-जाने में सुविधा हो सके.
नार्थ और साउथ ब्लॉक का भविष्य
जैसे ही ये नए भवन तैयार होंगे, नार्थ और साउथ ब्लॉक को पूरी तरह खाली कर दिया जाएगा. यहां भारत संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमें महाभारत काल से लेकर आज तक के भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा. इसका उद्देश्य हमारी विरासत को अगली पीढ़ी के सामने जीवंत रूप में लाना है. सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक और बड़ा हिस्सा है प्रधानमंत्री कार्यालय, नया प्रधानमंत्री आवास, इंडिया हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय का निर्माण. यह सभी कार्य दिसंबर 2031 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है.
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अब तक इस योजना के तहत नया संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और कर्तव्य पथ का पुनर्विकास पहले ही हो चुका है.
- कर्तव्य भवन-3: एक नजर में
कुल क्षेत्रफल: 1.5 लाख वर्ग मीटर - तल: दो बेसमेंट सहित कुल 10 मंजिलें
- पार्किंग क्षमता: 600 कारें
- कार्यक्षेत्र: 67 वर्क हॉल, 24 बड़े और 26 छोटे कांफ्रेंस हॉल
- अन्य सुविधाएं: योग कक्ष, मेडिकल रूम, क्रेच, कैफे, मल्टीपरपज हॉल
- लिफ्ट: 27, ऑटोमैटिक सीढ़ियां: 2, सेंट्रल एयर कंडीशन
पुरानी इमारतें होंगी इतिहास
कर्तव्य भवनों के शुरू होते ही शास्त्री भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन और निर्माण भवन को तोड़ा जाएगा. कुछ मंत्रालयों को फिलहाल अस्थायी रूप से किराए के भवनों में शिफ्ट किया जा रहा है. जैसे-जैसे नए भवन तैयार होंगे, सभी विभाग एक के बाद एक इनमें स्थानांतरित हो जाएंगे.
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बताते चलें कि कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन केवल एक नई इमारत की शुरुआत नहीं है, यह भारत के प्रशासनिक तंत्र में एक नई सोच, आधुनिकता और समर्पण की नींव है. यह न केवल कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण तैयार करेगा, बल्कि राष्ट्र निर्माण के कार्य में गति और पारदर्शिता भी लाएगा. सेंट्रल विस्टा परियोजना आने वाले समय में देश की राजधानी का चेहरा पूरी तरह बदल देगी और वह भी पर्यावरण के अनुकूल, तकनीक-संपन्न और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर.