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उत्तराखंड में कृषि सम्मेलन में जुटेंगे 50 देश, 4000 प्रतिनिधी शामिल होंगे !
उत्तराखंड में कृषि महाकुंभ 20 फरवरी से 22 फरवरी 2025 को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में प्रस्तावित है, जो कि राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी एवं गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है.
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9 नवंबर साल 2000 को उत्तरप्रदेश से अलग होकर एक राज्य बनाया गया। नाम पड़ा उत्तराखड़। पहले विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई, एनडी तिवारी को पहला मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन देवों की भूमि में वो विकास नहीं हो पाया जिसकी परिकल्पना लोगों ने यहां की थी। आलम ये हुआ कि काम की तलाश में लोगों ने यहां से पलायन शुरु कर दिया। लगातार आबादी बढ़ती गई। खेती की जमीन घटती गई और महज 24 साल के अंतराल के बाद हालात ये हो गई की खेती की जमीन 2.02 लाख हेक्टेयर तक घट गई। इसका सबसे बड़ा कारण रहा देवभूमि में सख्त भू-कानून ना होना। जिसका नुकसान ये हुआ की यहां कोई भी आकर बस गया, डेमोग्राफी बदल गई।
विशेष समुदाय के शांतिदूतों ने यहां अशांति का माहौल बना दिया। तो अब जिम्मेदारी है उत्तराखंड की मौजूदा धामी सरकार की। कि वो इन समस्याओं के समाधान पर काम करें। जिसके लिए वो प्रतिबध भी नजर आ रही है।प्रदेश में यूसीसी लागू करने से लेकर, सख्त भू-कानून बनाना। और लगातार हो रहे पलायन को रोकने के लिए सरकार कदम उठा रही है। और कदम भी इस तरीके के उठाए जा रहे है। जिससे देवभूमि का डंका देश में ही नहीं बल्कि प्रदेश में भी बज रहा है..दरअसल उत्तराखंड में 17 कृषि सम्मेलन का आयोजन 20 फरवरी से 22 फरवरी तक होना है। जिसका ब्रोशर और पोस्टर जारी कर दिया गया। ये कृषि महाकुंभ गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में प्रस्तावित किया गया है, जो कि राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी और गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर गोविंद बल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति प्रो. एमएस चौहान ने बताया कि 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के 4 हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन में पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि में नवाचार, कृषि क्षेत्र में युवा पेशेवरों को बढ़ावा देने, डिजिटल एग्रीकल्चर, जलवायु परिवर्तन, स्मार्ट लाइवस्टॉक फार्मिंग जैसे विषय पर पैनल चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन से विज्ञान में नई खोज के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा, मधुमक्खी पालन की संभावनाएं, गरीबी और कुपोषण से मुक्ति के लिए नए उपाय जैसे विषयों पर सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा. इस अवसर पर एक कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें देश विदेश के 200 से अधिक संस्थान भाग लेंगे।
इस सम्मेलन में हर उस पहलू पर, हर उस नीती पर काम किया जाएगा, जिससे उत्तराखंड में किसानों को उच्च कोटि की खेती करने की तकनीक दी जा सके। कैसे किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकता है, कैसे फसलों को बदल सकता है, कैसे अपनी आय को बढ़ा सकता है। क्योकि उत्तराखंड से इतर अगर मै बात करुं तो इस देश में एक किसान की औसत आय महज 27 रुपए प्रतिदिन ही है। हालांकि इन हालातों में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार किसानों को लिए तीन कानून लेकर आई थी। लेकिन किसानों के भीतर किसी बात को लेकर डर बना, वो सरकार के खिलाफ गए और सरकार को वो कानून वापस लेने पड़े। लेकिन उत्तराखंड़ लगातार अपने लोगों के लिए कुछ अलग कर रहा है। वो अलल चलने की मिशाल भी पेश कर रहा है। तो जिस तरीके से उत्तराखंड की घामी सरकार अपने लोगों के लिए काम कर रही है ।
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