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ट्यूनीशिया में 3 महीने से भुखमरी झेल रहे झारखंड के 48 मजदूरों को मिला बकाया वेतन, 5 नवंबर को लौटेंगे स्वदेश

तीन महीने से ट्यूनीशिया में भूखमरी झेल रहे झारखंड के 48 मजदूरों को आखिरकार राहत मिली है. कंपनी ने उनका बकाया वेतन चुका दिया है. अब सभी मजदूर 5 नवंबर को मुंबई पहुंचेंगे और फिर अपने घर लौट जाएंगे. भारतीय दूतावास और राज्य सरकार के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा.

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अफ्रीका के ट्यूनीशिया में पिछले तीन महीनों से भूखमरी और आर्थिक संकट का सामना कर रहे झारखंड के 48 प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है. झारखंड सरकार और लार्सन एंड टूब्रो  कंपनी के संयुक्त प्रयासों से सभी मजदूरों को उनका बकाया वेतन मिल चुका है, जबकि वापसी के लिए हवाई टिकट भी बुक हो चुके हैं. मजदूर 4 नवंबर को ट्यूनिस से रवाना होकर 5 नवंबर को मुंबई पहुंचेंगे, जहां से वे अपने-अपने जिलों के लिए निकलेंगे.

यह राहत की खबर झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जिलों के इन मजदूरों के लिए वरदान साबित हुई है, जो कंपनी प्रेम कंस्ट्रक्शन के माध्यम से विदेश गए थे. मजदूरों ने वीडियो संदेश जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से गुहार लगाई थी, जिसके बाद कार्रवाई तेज हो गई. 

संकट की शुरुआत

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ट्यूनीशिया पहुंचे इन मजदूरों को जुलाई से ही अपना बकाया वेतन नहीं मिला था. कंपनी ने भुगतान रोक दिया, जिससे उनके पास न खाने-पीने का पैसा बचा और न ही आवास का इंतजाम. हजारीबाग के 19, गिरिडीह के 14 और बोकारो के 15 मजदूरों ने बताया कि वे फ्री में काम करने को मजबूर थे और जीवन-मरण के संकट से जूझ रहे थे. एक मजदूर की पत्नी ने बताया, "पति ने 20 दिन पहले रोते हुए फोन किया कि खाना नहीं है, अब फोन भी बंद हो गया. "सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने इस मुद्दे को उठाया और सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की. उन्होंने कहा कि झारखंड से विदेश पलायन रोकने के लिए स्थानीय रोजगार पर जोर देना जरूरी है. यह कोई पहला मामला नहीं है; पिछले साल कैमरून में 47 मजदूर इसी तरह फंसे थे.  

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सरकार और कंपनी की त्वरित कार्रवाई

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में मामला आने के बाद श्रम नियोजन और कौशल विकास विभाग ने एल एंड टी से संपर्क साधा. कंपनी ने तत्काल बकाया वेतन का भुगतान किया और ट्यूनिस से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक फ्लाइट टिकट बुक कर दिए. झारखंड सरकार के प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ की टीम ने मजदूरों के दस्तावेजों की जांच की और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की. श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. मजदूरों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता है. " एल एंड टी ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि सभी 48 मजदूरों को पूर्ण सहायता प्रदान की जा रही है.  

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5 नवंबर को मुंबई एयरपोर्ट पर उतरेंगे मजदूर

4 नवंबर को ट्यूनिस से उड़ान भरने वाले ये मजदूर अगले दिन मुंबई पहुंचेंगे. वहां से वे ट्रेन या अन्य साधनों से झारखंड लौटेंगे. मजदूरों ने सरकार और कंपनी का आभार जताते हुए कहा, "वेतन मिलने और टिकट तैयार होने से अब सुकून की सांस ले पा रहे हैं. हम जल्द परिवार के पास पहुंचेंगे.

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रिपोर्टों के अनुसार, ट्यूनीशिया इन दिनों तेजी से बढ़ती महंगाई और आपूर्ति संकट से जूझ रहा है. इस वजह से मजदूरों को भोजन तक नहीं मिल पा रहा. कई मजदूरों ने हफ्तों से भरपेट खाना नहीं खाया है. समूह में 19 मजदूर हजारीबाग से, 14 गिरिडीह से और 15 बोकारो से हैं.

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