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2008 जयपुर सीरियल बम बलास्ट के 4 आतंकवादियों को उम्रकैद! 71 की मौत 185 घायल हुए थे!

इंडियन मुजाहिदीन के कुल 12 आतंकी दिल्ली से बम लेकर आए थे। उसके बाद उन्होंने किशनपुर में कुल 9 साइकिल खरीदी। साइकिल की पीछे की सीट पर बम सेट करके 9 अलग-अलग स्थानों पर खड़ी कर दी। सभी आतंकवादी जयपुर रेलवे स्टेशन पर मिले। उसके बाद शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली पहुंच गए। 9 जगहों पर खड़ी सभी साइकिलों में एक के बाद एक 9 जगहों पर ब्लास्ट हुए। नौवें बम को डिफ्यूज कर दिया गया। इस बम धमाके में कुल 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 लोग घायल हुए थे।

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2008 में जयपुर शहर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में मंगलवार को स्पेशल कोर्ट ने 4 आतंकवादियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन आतंकवादियों के नाम सैफुर्रहमान, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद है। कोर्ट ने   600 पेज का फैसला सुनाया है। बता दें कि 13 मई 2008 को जयपुर शहर में कुल 8 स्थानों पर सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। वहीं नौवें स्थान पर बम मिला था। बम मिलने की सूचना के बाद इसे 15 मिनट के अंदर डिफ्यूज कर दिया गया था। 

कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद हंसते नजर आए आतंकी 

स्पेशल कोर्ट ने चारों आतंकियों को जब उम्रकैद की सजा सुनाई। उसके बाद भी आतंकियों के चेहरे पर कोई शिकन देखने को नहीं मिला। कोर्ट रूम से बाहर निकलते हुए सभी के चेहरे पर हंसी नजर आ रही थी। 

आतंकियों के वकील ने शायरी की तो जज ने भी शायरी से दिया जवाब 

जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट को लेकर हो रहे बहस के दौरान आतंकियों के वकील ने शायरी कही। वकील के शायरी का जवाब भी जज ने शायरी देकर किया। आतंकियों के वकील मुजाहिद अहमद ने शायरी में कहा कि "तुम्हारा शहर, तुम ही कातिल, तुम ही मुद्दई, तुम ही मुंशिफ हमें यकीन है, गलती हमारी ही होगी।" इस शायरी पर जज रमेश कुमार जोशी ने भी करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा "कुदरत के फैसले पर कभी शक मत करना, अगर सजा मिल रही है, तो गुनाह भी हुआ होगा, सबसे बड़ा न्यायालय हमारा मन होता है, क्या सही है क्या गलत उसे सब पता होता है, राह गलत नहीं होती है, गलत तो चुनाव होता है।"

एक नाबालिग के साथ मिलकर आतंकियों ने रेकी की थी 

बता दें कि इस सीरियल बम ब्लास्ट में सरवर हाजमी, सैफुर्रहमान और मोहम्मद कैफ ने एक नाबालिग के साथ मिलकर पहले रेकी की थी। उसके बाद बम प्लांट किए थे। आतंकियों ने घटना को अंजाम देने के बाद नजदीकी साइबर कैफे में जाकर ईमेल के जरिए इंडियन मुजाहिदीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। 

112 गवाहों के बयान के आधार पर हुई सजा
सभी आतंकवादियों को एटीएस ने 25 दिसंबर 2019 को जेल से गिरफ्तार किया था। इस मामले में एटीएस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें तीन नए गवाह शामिल किए गए थे। इसमें एक पत्रकार और एक पूर्व  डीजीपी और साइकिल कसने वाले को मिलाकर 112 गवाहों के बयान के आधार पर यह सजा सुनाई गई। इन चारों आतंकियों को अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन की 2, और 20 विस्फोटक पदार्थ की 3 धाराओं में सजा सुनाई गई है। इन धाराओं में आरोपियों को अधिकतम उम्रकैद की सजा होती है। 4 अप्रैल को चारों आतंकियों को स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इनमें शाहबाज को छोड़कर सभी को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया था। 

दिल्ली से लाए गए थे बम फिर साइकिलों पर रखकर किया था विस्फोट 
इंडियन मुजाहिदीन के कुल 12 आतंकी दिल्ली से बम लेकर आए थे। उसके बाद उन्होंने किशनपुर में कुल 9 साइकिल खरीदी। साइकिल की पीछे की सीट पर बम सेट करके 9 अलग-अलग स्थानों पर खड़ी कर दी। सभी आतंकवादी जयपुर रेलवे स्टेशन पर मिले। उसके बाद शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली पहुंच गए। 9 जगहों पर खड़ी सभी साइकिलों में एक के बाद एक 9 जगहों पर ब्लास्ट हुए। नौवें बम को डिफ्यूज कर दिया गया। इस बम धमाके में कुल 71 लोगों की मौत हुई थी और  185 लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने बम ब्लास्ट की खबर न्यूज़ चैनल पर देखी थी। 14 मई को इंडियन मुजाहिदीन के नाम से ईमेल जारी हुआ था। जिसने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। जांच पड़ताल में पता चला था कि जो ई-मेल भेजा गया था। वह साहिबाबाद के एक कंप्यूटर जॉब वर्क के दुकान से की गई थी।
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