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354 डिब्बे, 7 इंजन और 4.5 KM लंबाई, भारतीय रेलवे का नया रिकॉर्ड, देश की सबसे लंबी ट्रेन 'रुद्रास्त्र' चलाकर गाड़े झंडे

भारतीय रेलवे ने ग्रैंड कॉर्ड रेल मार्ग पर माल परिवहन के क्षेत्र में झंडे गाड़ते हुए देश की सबसे लंबी मालगाड़ी 'रुद्रास्त्र' का सफल संचालन किया है. इस ट्रेन की लंबाई लगभग 4.5 किलोमीटर थी, जिसमें कुल 354 वैगन और 7 इंजन शामिल थे. यह विशेष मालगाड़ी पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू मंडल द्वारा गंजख्वाजा स्टेशन से गढ़वा रोड स्टेशन तक चलाई गई. रेलवे ने इसे लॉजिस्टिक्स में एक अहम उपलब्धि बताया है.

तस्वीर: रुद्रास्त्र / स्क्रीनग्रैब
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भारतीय रेलवे नित-प्रतिदिन नए कीर्तिमान रच रहा है. अमृत भारत परियोजना के तहत रेल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, रेल कोच, स्टेशन, फ्रेट कॉरिडोर, मालगाड़ी, पैसेंजर ट्रेन या मालवाहक बोगियां...रेलवे ने बीते सालों मे कई रिकॉर्ड बनाए हैं और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. इसी का नतीजा है कि East Central Railway ने दुनिया की दूसरी और भारत की सबसे बड़ी मालगाड़ी का संचालन कर इतिहास रच दिया. 

 354 वैगन और 7 इंजन और 4.5 किलोमीटर लंबाई...'रुद्रास्त्र' ने गाड़े झंडे
आपको बताएं कि भारतीय रेलवे ने ग्रैंड कॉर्ड रेल मार्ग पर माल परिवहन के क्षेत्र में झंडे गाड़ते हुए देश की सबसे लंबी मालगाड़ी 'रुद्रास्त्र' का सफल संचालन किया है. इस ट्रेन की लंबाई लगभग 4.5 किलोमीटर थी, जिसमें कुल 354 वैगन और 7 इंजन शामिल थे. यह विशेष मालगाड़ी पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू मंडल द्वारा गंजख्वाजा स्टेशन से गढ़वा रोड स्टेशन तक चलाई गई. रेलवे ने इसे लॉजिस्टिक्स में एक अहम उपलब्धि बताया है. ‘रुद्रास्त्र’ को छह खाली बॉक्सन रेक को जोड़कर तैयार किया गया था. संचालन के दौरान अत्यंत सावधानी, तकनीकी समन्वय और कुशल नियंत्रण की ज़रूरत पड़ी, जिसे डीडीयू मंडल की टीम ने प्रभावशाली रूप से संभाला.

200KM का सफर, पांच घंटे का समय...'रुद्रास्त्र' का उत्कृष्ट प्रदर्शन
करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह मालगाड़ी लगभग पांच घंटे में गंतव्य तक पहुंची. इसकी औसत गति करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा रही. यह प्रदर्शन, गाड़ी की लंबाई और भार को ध्यान में रखते हुए, उत्कृष्ट और प्रेरणादायक माना जा रहा है.

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लागत और मानव संसाधन की रिकॉर्ड बचत
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि इन छह रेक्स को अलग-अलग चलाया जाता, तो चालक दल, ट्रैक स्लॉट, और संचालन संबंधी प्रक्रियाएं छह बार दोहरानी पड़तीं. लेकिन इन्हें एकसाथ संचालित करने से समय, मानव संसाधन और परिचालन लागत में भारी कमी आई है. इस प्रयोग से मालगाड़ियों की गति और दक्षता में सुधार आने की संभावना है, जो भविष्य में परिवहन प्रणाली को और अधिक तेज़, सुरक्षित और आर्थिक बनाएगा.

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डीडीयू मंडल की कामयाबी, हो रही है चर्चा
डीडीयू मंडल की यह उपलब्धि उसकी तकनीकी क्षमताओं और टीम वर्क का प्रमाण है. यहां माल डिब्बों की मरम्मत, निरीक्षण और जोड़ने का काम बहुत ही प्रभावी ढंग से किया गया. यह संचालन भारतीय रेलवे की नवाचार-प्रधान सोच और लॉजिस्टिक क्षेत्र में परिवर्तनशील दृष्टिकोण का संकेत है.

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सबसे लंबी मालगाड़ी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम
जहां तक दुनिया की सबसे लंबी मालगाड़ी की बात है, तो यह रिकॉर्ड अभी भी ऑस्ट्रेलिया की BHP कंपनी के पास है, जिसने 682 वैगनों के साथ 7.3 किलोमीटर लंबी ट्रेन का संचालन किया था. हालांकि, 'रुद्रास्त्र' के जरिए भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता और संचालन कुशलता का परिचय दिया है, जो वैश्विक मानकों की ओर मजबूत क़दम है.

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