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सुनहरी मस्जिद में 3 घंटे की पार्किंग और 4 मिनट में तबाही... दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा, हर एंगल से हो रही जांच

दिल्ली के लाल किले के पास कार ब्लास्ट से दहशत फैल गई. i20 कार में हुआ धमाका इतना तेज था कि आसपास की गाड़ियां और मेट्रो स्टेशन तक क्षतिग्रस्त हो गए. CCTV में पता चला, कार घटना से पहले सुनहरी मस्जिद के पास तीन घंटे खड़ी थी. जांच में कार का लिंक गुरुग्राम और पुलवामा तक जुड़ रहा है. पुलिस ने मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में लिया है और आतंकी कनेक्शन की जांच जारी है.

Source: Social Media
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देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार की शाम लाल किले के पास कार में हुए ब्लास्ट (Delhi Blast) के बाद दहशत का माहौल है. इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. यह धमाका शुक्रवार शाम उस वक्त हुआ जब सड़क पर आम ट्रैफिक चल रहा था. चंद सेकंड में सब कुछ आग और धुएं में बदल गया. घटना में अभी तक 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल होने की पुष्टि हुई है. विस्फोट की तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए और लाल किला मेट्रो स्टेशन के कांच भी चटक गए. इस हमले के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तुरंत जांच शुरू की और अब इस केस से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में जो दिखा, उसने जांच को एक नई दिशा दे दी है.

CCTV फुटेज में दिखी ब्लास्ट से पहले की कहानी

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि जिस हुंडई i20 कार में ब्लास्ट हुआ, वह हरियाणा के गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ में पंजीकृत थी. इसका नंबर HR 26 7624 है, जो मोहम्मद सलमान नाम के व्यक्ति के नाम पर दर्ज है. शुरुआती जांच में सामने आया कि यह कार ब्लास्ट से पहले सुनहरी मस्जिद के पास करीब तीन घंटे तक पार्किंग में खड़ी थी. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, कार 10 नवंबर की दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में दाखिल हुई और शाम 6:48 बजे बाहर निकली. इसके महज चार मिनट बाद ही 6:52 बजे सुभाष मार्ग ट्रैफिक सिग्नल पर कार में जोरदार धमाका हो गया. चंद पलों में आसमान में आग की लपटें उठीं और लोगों में भगदड़ मच गई. CCTV फुटेज में ब्लास्ट से कुछ मिनट पहले यह कार सड़क पर गुजरती दिखी. लाल किले के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस मार्ग पर जब ट्रैफिक सिग्नल पर यह कार धीमी हुई, तभी इसके पिछले हिस्से यानी डिक्की में भयानक विस्फोट हुआ.

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गुरुग्राम से पुलवामा तक जुड़ रहे हैं आतंकी धागे

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पुलिस ने कार मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि सलमान ने यह कार जम्मू-कश्मीर के तारिक नामक व्यक्ति को बेच दी थी. अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस कार का इस्तेमाल किसी आतंकी मॉड्यूल ने तो नहीं किया. जांच में एक और रोचक तथ्य सामने आया है. यह i20 कार कई बार खरीदी और बेची गई थी. सूत्रों के मुताबिक, हर बार इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. इतना ही नहीं, इसी कार का 15 सितंबर की रात फरीदाबाद में चालान भी कटा था. पुलिस को अब शक है कि यह पूरी साजिश लंबे समय से रची जा रही थी.

फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ रहा है ब्लास्ट का कनेक्शन

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इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच एजेंसियों को पता चला कि 9 नवंबर की रात यानी ब्लास्ट से ठीक एक दिन पहले फरीदाबाद पुलिस ने खतरनाक केमिकल पकड़ा था. यह वही केमिकल है जिसका इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में किया जाता है. दरअसल, यह बरामदगी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसर गजवात-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के दौरान हुई थी. पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 7 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं. डॉ. मुअजमिल अहमद गनई (फरीदाबाद) और डॉ. आदिल (कुलगाम निवासी).

डॉक्टर के घर से मिला बारूद का पहाड़

जब सुरक्षा एजेंसियों ने डॉ. मुअजमिल के फरीदाबाद स्थित घर पर छापा मारा, तो वहां से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, एके-56 राइफल, AK Krinkov, बरेटा पिस्टल, चीनी स्टार पिस्टल और सैकड़ों कारतूस बरामद किए गए. इस खुलासे ने एजेंसियों की नींद उड़ा दी. इन डॉक्टरों के अलावा आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, मौलवी इरफान अहमद, और जमीर अहमद अहांगर जैसे नाम भी इस मॉड्यूल से जुड़े मिले हैं. पुलिस का कहना है कि ये लोग व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का हिस्सा थे. यानी पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स जो आतंकवाद को तकनीकी और आर्थिक मदद दे रहे थे.

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बताते चलें कि दिल्ली ब्लास्ट में अब तक के तथ्यों से यह साफ हो गया है कि यह कोई साधारण विस्फोट नहीं था. यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी. दिल्ली पुलिस, एनआईए और इंटेलिजेंस एजेंसियां मिलकर इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. हर एक CCTV फ्रेम, हर मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और हर फर्जी दस्तावेज की जांच की जा रही है. लाल किले के पास हुआ यह धमाका देश की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल छोड़ गया है. राजधानी के बीचोंबीच इस तरह का विस्फोट दिखाता है कि दुश्मन ताकतें अभी भी सक्रिय हैं. अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां इस गुत्थी को कितनी जल्दी सुलझा पाती हैं और क्या असली गुनहगारों को सजा मिल पाती है या नहीं.

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