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मोदी के नाम पर 16 करोड़ की लूट ! गुजरात में डॉक्टर का बड़ा फर्जीवाड़ा!

गुजरात में आयुष्मान कार्ड के नाम पर फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला अहमदाबाद के ख्याति अस्पताल से सामने आया है. ख्याति अस्पताल में उन लोगों के लिए भी आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे थे जो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए Elligible ही नहीं थे।उसके बाद खेला गया करोड़ों के फर्जीवाड़े का खेल.

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एक वक़्त था जब डॉक्टर्स को धरती पर भगवान का ही रूप कहा जाता था…नया जीवन देने वाला, मौत के मुंह से बाहर निकालने वाला और ना जाने कौन कौन सी संज्ञा से डॉक्टरों को नवाज़ा जाता था, लेकिन कुछ डॉक्टरों ने चंद पैसों के चक्कर में अपना ईमान इस कदर बेच दिया कि अब ऐसा लगता है कि कोई भी डॉक्टर भगवान का रूप तो नहीं है. भगवान का रूप छोड़िये अब आम जनता डॉक्टर जैसे प्रोफ़ेशन को भी सिर्फ़ दुकानदारी समझने लगी है जहां पर पेशेंट कोई और नहीं बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ कस्टमर हैं.

और ऐसी ही ना जाने कितनी Headlines से आपका मीडिया सोशल मीडिया पटा पड़ा है, लेकिन किसे फर्क पड़ता है ? बताइये आपको पड़ता है ? जब तक ख़ुद पर ना बीते सच मानिये किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता. अब मैं आपको गुजरात से सामने आए एक ऐसे क़िस्से के बारे में बताने जा रही हूं जिसमें सिर्फ़ सरकार से पैसा लेने के लिए मरीज़ों के ऑपरेशन कर दिये गए, उनकी एंजियोप्लास्टी कर दी गई, दिल की बीमारी बताकर उनका शरीर ऑपरेट कर दिया गया, जबकि उन्हें कोई बीमारी थी ही नहीं….

गुजरात में आयुष्मान कार्ड के नाम पर फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला अहमदाबाद के ख्याति अस्पताल से सामने आया है. ख्याति अस्पताल में उन लोगों के लिए भी आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे थे जो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए Elligible ही नहीं थे. पुलिस जांच में पता चला कि मात्र 1500 रुपये लेकर 15 मिनट में कार्ड बनाए जा रहे थे. कुल 3000 फर्जी कार्ड बनाए गए, जिनमें से कुछ बिहार के राशिद नाम के व्यक्ति की मदद से तैयार किए गए. मतलब सोचिए कि सरकारी योजनाओं में भी कैसे फर्जीवाडा हो रहा है. ये अस्पताल पहले कैंप लगाता था, फ़्री कैंप सोचकर लोग चेकअप के लिए आते थे…फिर चेकअप के नाम पर उन्हें कोई भी गंभीर बीमारी बता दी जाती थी, फिर उनको इलाज के लिए बोला जाता था…अब जिसके पास आयुष्मान कार्ड वो टार्गेट पर लेना आसान था, लेकिन जिनके नहीं थे उनका कार्ड 15 मिनट में तैयार करवा दिया जाता था, फिर उन पेशेंट की बिना किसी बीमारी के ही पूरा का पूरा इलाज कर दिया जाता था. ख़बर है कि ऑपरेशन का ड्रामा कर लगभग 16 करोड़ की रक़म सरकार से वसूली जा चुकी है.

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जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड बने हुए थे उनके ज़बरदस्ती बिना किसी बीमारी के ही एंजियोप्लास्टी तक कर दी गई, ये ऐसे मामलों में होती है जिनमें पेशेंट को दिल में कुछ समस्या होती है, और जानते हैं जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं थे, उनके 15-15 मिनट में बना दिये गये ताकि उसका इस्तेमाल कर सरकार से फ़ायदा लिया जा सके. अस्पताल ने फ़र्ज़ी कार्ड होल्डर की बिना मतलब ही सर्जियां कर डाली ताकि सरकार से आयुष्मान योजना के तहत पैसे लिये जा सकें. इस पूरे घोटाले में 2 मरीज़ों की जान भी चली गई….इस मामले में मुख्य आरोपी चिराग राजपूत को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने हिरासत में लिया है, जबकि कार्तिक पटेल, निखिल पारेख और राशिद सहित अन्य आरोपी फरार हैं. कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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अब पुलिस को आशंका है कि ये फर्जीवाड़ा गुजरात तक सीमित नहीं है और अन्य राज्यों में भी इसका नेटवर्क हो सकता है. जांच में ये भी सामने आया कि जो लोग इसके लिए Elligible नहीं थे उनके भी दस्तावेज बना दिये गए.  मतलब सरकार की अच्छी खासी योजना में कैसे पलीता लगाया जा रहा है वो भी गुजरात में….ये बेहद चिंताजनक है. खैर, अब ये काम है पुलिस का, सरकार का कि ऐसे गिरोह का पर्दाफ़ाश हो….लेकिन आप भी सोच समझकर और दो चार डॉक्टरों से ओपिनियन लेने के बाद ही किसी सर्जरी की तरफ़ बढ़ें.

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