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'MINTA DEVI' के नाम पर विपक्षी सांसदों का हंगामा, जानिए कौन हैं ये 124 साल की 'फर्स्ट टाइम वोटर'

वपक्षी सांसदों के टी-शर्ट पर बड़े अक्षरों में लिखा ‘MINTA DEVI’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जल्दबाजी और लापरवाही के चलते 124 साल की एक महिला का नाम पहली बार मतदाता सूची में जोड़ा गया है.

सदन में विपक्षी सांसदों का हंगामा
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‘MINTA DEVI’, सड़क से लेकर सदन और सोशल मीडिया पर ये नाम छाया रहा. वपक्षी सांसदों के टी-शर्ट पर बड़े अक्षरों में लिखा ‘MINTA DEVI’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जल्दबाजी और लापरवाही के चलते 124 साल की एक महिला का नाम पहली बार मतदाता सूची में जोड़ा गया है. इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है. ऐसे में चलिए जानते है कि कौन है ये ‘MINTA DEVI’ 

जानिए ‘MINTA DEVI’ की कहानी

पूरा मामला दरौंदा विधानसभा क्षेत्र के सिसवन प्रखंड के सिसवा कला पंचायत के अरजानीपुर गांव का है. यहां मतदाता सूची में मिंता देवी नाम की महिला की उम्र 124 वर्ष दर्ज की गई और पहली बार उनका नाम सूची में जोड़ा गया.

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सच्चाई कुछ और ही निकली

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हालांकि, एनडीटीवी की पड़ताल में सच्चाई कुछ और निकली. रिपोर्ट के अनुसार, अरजानीपुर गांव निवासी धनंजय कुमार सिंह की पत्नी मिंता देवी की वास्तविक उम्र मात्र 35 वर्ष है. यह गड़बड़ी ऑनलाइन फॉर्म भरते समय हुई, जहां गलत प्रविष्टि के कारण उनकी उम्र 124 वर्ष दर्ज हो गई.
गांव के कन्या उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बूथ संख्या 94 के बूथ-लेवल अधिकारी उपेंद्र शाह ने भी स्वीकार किया कि यह डेटा एंट्री की गलती है. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आयु गलत दर्ज हो गई थी और यह त्रुटि शीघ्र ही सुधार दी जाएगी ताकि मतदाता सूची में सही जानकारी दर्ज रहे.

‘फिर भी विपक्षी सांसदों ने उठाया मुद्दा…’

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फिर भी, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन में बवाल काटा. उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक उदाहरण है, असली समस्या मतदाता सूची की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता की कमी है. बिहार में जारी SIR को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है, जहां बड़ी संख्या में नाम हटाने और गलत प्रविष्टियों की शिकायतें सामने आ रही हैं.

संसद में गूंजा 124 साल की उम्र वाली वोटर का मुद्दा

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विपक्षी सांसदों का तर्क देते हुए कहा है कि अगर ऐसी बुनियादी गलतियां हो सकती हैं, तो यह चुनाव की निष्पक्षता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैं. इस आरोप पर चुनाव आयोग का कहना है कि तकनीकी त्रुटियां सामान्य हैं और उन्हें सुधारने के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है.
124 साल की उम्र वाली “पहली बार वोटर” की कहानी ने आज संसद से लेकर गांव तक बहस छेड़ दी है. विपक्ष इसे पूरे सिस्टम की नाकामी का प्रतीक बता रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन इसे मानवीय त्रुटि मानते हुए मामला शांत करने की कोशिश कर रहा है.

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