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संघ के 100 साल... 1000 से ज्यादा गोष्ठियों की तैयारी, देश-समाज, रक्षा और विदेश नीति जैसे विषयों पर होगा मंथन, जुटेंगे हर क्षेत्र के बुद्धिजीवी

RSS के शताब्दी वर्ष पर देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला में समाज के सभी वर्गों की प्रमुख हस्तियों से संवाद का कार्यक्रम भी होने वाला है. इसके तहत देश के चार प्रमुख महानगरों नई दिल्ली, बेंगलुरू, कोलकाता और मुंबई में होने वाले संवाद के कार्यक्रमों में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति रहेगी.

तस्वीर: सुनील आंबेकर, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख (RSS)
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष यानी कि 100 साल के उपलक्ष्य में 26, 27 एवं 28 अगस्त 2025 को विज्ञान भवन में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है. इस व्याख्यानमाला को पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी संबोधित करेंगे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजनों की श्रृंखला के तहत आगामी 26, 27 और 28 अगस्त को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाएगा. इस आयोजन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं उपस्थित रहेंगे और समाज के विभिन्न वर्गों की प्रमुख हस्तियों से संवाद करेंगे.

यह आयोजन संघ की सौ वर्षों की यात्रा-‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज की ओर’ — पर केंद्रित होगा. अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने दिल्ली के केशव कुंज में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की.

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समाज के सभी क्षेत्रों से आने वाले बुद्धिजीवियों का होगा प्रतिनिधित्व
सुनील आंबेकर ने बताया कि इस व्याख्यानमाला में सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, खेल, शिक्षा, भाषा, ज्ञान परंपरा, इंटरप्रेन्योर और भारत में स्थित विभिन्न देशों के राजनयिकों सहित 17 मुख्य वर्गों और 138 सह-श्रेणियों में समाज जीवन से जुड़ी प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन में केवल विचार-विनिमय ही नहीं, बल्कि आगामी वर्षों में संघ और समाज के बीच सहयोग के नए मार्गों पर चर्चा होगी.

व्याख्यानमाला में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी, उनमें शामिल हैं:

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  •  संघ की 100 वर्षों की यात्रा और समाज में उसकी भूमिका.
  •  पंच परिवर्तन की दिशा में संघ की सोच और समाज की सहभागिता.
  • विकास के औपनिवेशिक मापदंडों की समीक्षा और भारतीय दृष्टिकोण की पुनर्स्थापना.
  • आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा और उसमें स्वयंसेवकों की भूमिका.
  • बदलते भारत की आशाओं और आकांक्षाओं में संघ का योगदान.
  •  भारत की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उसकी स्थिति.
  • आयोजन के तीसरे दिन प्रतिभागियों द्वारा दिए गए लिखित प्रश्नों और जिज्ञासाओं का उत्तर भी सरसंघचालक द्वारा दिया जाएगा

संघ के 100 साल पर 1000 से अधिक गोष्ठियों की तैयारी

सुनील आंबेकर ने बताया कि वर्ष 1925 में आरंभ हुई संघ की राष्ट्रसेवा की यात्रा के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पूरे वर्षभर देशभर में 1000 से अधिक गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा. इनमें संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भाग लेंगे और कुछ प्रमुख कार्यक्रमों में सरकार्यवाह की भी उपस्थिति रहेगी.

उन्होंने कहा कि संघ ने सदैव समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने का प्रयास किया है और यह स्पष्ट किया है कि संघ का विचार न तो अलगाववादी है और न ही किसी पर थोपा गया है, बल्कि यह भारत की मूल परंपरा और संस्कृति में गहराई से निहित है.

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शताब्दी वर्ष का यह आयोजन केवल संघ के इतिहास को रेखांकित करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है, जहां भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैश्विक भविष्य की दिशा तय करने को लेकर सार्थक संवाद होगा.

'खुद की पहचान और पराक्रम से ही संभव है देश का विकास'

आंबेकर ने कहा कि अगर भारत को नए क्षितिज की ओर आगे बढ़ना है, तो उसे अपने स्व तत्व और पराक्रम के बल पर ही आगे बढ़ना होगा. अब समय आ गया है कि विकास के लिए अपनाए गए उपनिवेशकालीन मापदंडों की समीक्षा की जाए और भारतीय समाज की असीमित क्षमताओं को आगे लाया जाए.

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इस व्याख्यानमाला के माध्यम से संघ न केवल संवाद की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर रहा है कि राष्ट्र निर्माण में सबका साथ, सबका विचार और सबका प्रयास अनिवार्य है.

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