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समंदर के रास्ते चीन से आया 1 लाख किलो 'बारूद', वक्त रहते DRI ने टाल दी तबाही… 3 पोर्ट उड़ाने साजिश नाकाम

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने "ऑपरेशन फायर ट्रेल" के तहत चीन से अवैध रूप से लाए गए करीब 35 करोड़ रुपये के 100 मीट्रिक टन पटाखे जब्त किए हैं. ये पटाखे सात कंटेनरों में छिपाकर न्हावा शेवा, मुंद्रा पोर्ट और कांडला SEZ में लाए गए थे. तस्करों ने इन्हें मिनी डेकोरेटिव प्लांट्स, कृत्रिम फूल और प्लास्टिक मैट्स के रूप में घोषित किया था.

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देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है, जिसे अगर वक्त रहते पकड़ा न जाता, तो न्हावा शेवा, मुंद्रा और कांडला जैसे भारत के तीन प्रमुख बंदरगाहों पर भारी तबाही मच सकती थी. राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की मुंबई ज़ोनल इकाई ने एक सघन ऑपरेशन के तहत सात कंटेनर्स को जब्त किया है, जिनमें चीन से अवैध रूप से मंगवाए गए करीब 1 लाख किलोग्राम विस्फोटक भरे हुए थे. इस ऑपरेशन को ‘फायर ट्रेल’ नाम दिया गया है, और यह अब तक की सबसे संवेदनशील कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है.

फर्जी कागज के सहारे हो रहा खेल 
इन कंटेनर्स में मिनी सजावटी पौधे, कृत्रिम फूल और प्लास्टिक मैट्स थे. लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा खतरनाक थी. डीआरआई अधिकारियों ने बताया कि ये बारूद असली कागजात के बजाय फर्जी दस्तावेजों के जरिए इम्पोर्ट किए जा रहे थे. यानि इन विस्फोटकों को ‘डेकोरेशन आइटम’ के रूप में क्लियर कर दिया गया था. इस पूरे मामले में आयात-निर्यात कोड (IEC) धारकों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जिनके जरिए ये कंटेनर्स बंदरगाहों पर पहुंचे थे. जो कंटेनर्स पकड़े गए हैं, उनमें भरे गए विस्फोटक किसी आम पटाखे जितने नहीं थे. विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें मौजूद विस्फोटक सामग्री इतनी ज़्यादा थी कि अगर जरा-सी चिंगारी भी लग जाती, तो तीनों बंदरगाहों पर विनाशकारी धमाका हो सकता था. इस विस्फोटक की अनुमानित कीमत करीब 35 करोड़ रुपये आंकी गई है. 

क्या है ऑपरेशन ‘फायर ट्रेल’? 
डीआरआई लंबे समय से चीनी पटाखों और आतिशबाज़ी की अवैध तस्करी के खिलाफ 'ऑपरेशन फायर ट्रेल' चला रहा है. इसी के तहत खुफिया जानकारी के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई. अधिकारियों ने बताया कि इन कंटेनर्स की डिटेल और कस्टम क्लीयरेंस ट्रेल को खंगाला जा रहा है. साथ ही, देश में किन-किन बाजारों तक यह खेप पहुंचाई जानी थी, इसकी भी जांच की जा रही है. यह मामला केवल अवैध आयात का नहीं लग रहा. अधिकारियों की माने तो इतनी बड़ी मात्रा में बारूद की तस्करी किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है. इसमें आतंकी एंगल से भी इनकार नहीं किया जा सकता. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है. डीआरआई इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि कौन लोग इसके पीछे हैं, बारूद की फंडिंग कहां से हुई, और इसे कहां इस्तेमाल किया जाना था.

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मंत्रालय भी सतर्क, सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी तेज
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस ऑपरेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बड़ी कामयाबी बताया है. मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई केवल एक जब्ती नहीं, बल्कि एक संभावित बड़े हमले को टालने का महत्वपूर्ण प्रयास है. गृह मंत्रालय और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी इस जांच से जुड़ चुकी हैं. अब निगरानी न केवल बंदरगाहों पर, बल्कि देश के भीतर भी तेज कर दी गई है.

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क्या अब नए नियम बनेंगे?
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है. बंदरगाहों, एयरपोर्ट्स और SEZ जोन में हर कंटेनर की गहन जांच बेहद जरूरी है. जानकार मांग कर रहे हैं कि अब इम्पोर्ट की जांच प्रक्रिया को और अधिक तकनीकी और स्मार्ट बनाया जाए. साथ ही नकली कागज़ों के ज़रिए कस्टम क्लीयरेंस कराने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए कानूनों में बदलाव भी ज़रूरी हो सकता है.

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बता दें कि राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है. यह एजेंसी न केवल ड्रग्स, सोना, हीरे और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की तस्करी पर नजर रखती है, बल्कि विदेशी मुद्रा और नकली भारतीय मुद्रा जैसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई करती है. डीआरआई, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अंतर्गत वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत कार्यरत है. ऐसे में जब इस स्तर की एजेंसी किसी साजिश का खुलासा करती है, तो यह केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा को मजबूती देने वाला ठोस कदम होता है.

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