Advertisement

Loading Ad...

हर महिला को क्यों खानी चाहिए शतावरी? आयुर्वेद इसे मानता है 'महिलाओं की रानी' जड़ी-बूटी, जानें इसके फायदे

शतावरी को 'महिलाओं की रानी' जड़ी-बूटी भी कहा जाता है, और यह अपनी एडाप्टोजेनिक गुणों के लिए जानी जाती है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव के अनुकूल बनाने में मदद करती है. आइए, जानते हैं कि कैसे शतावरी हर स्त्री की सेहत का पूरा ख़याल रखती है और इसे क्यों हर महिला के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लीमेंट माना जाता है.

Loading Ad...

प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं, जिन्हें उनके औषधीय गुणों के लिए 'चमत्कार' माना जाता है. इन्हीं में से एक है शतावरी, जिसे विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए 'आयुर्वेद का वरदान' कहा जाता है. इसके नाम का शाब्दिक अर्थ है 'एक सौ पतियों वाली', जो इसके असंख्य लाभों की ओर इशारा करता है, खासकर प्रजनन और स्त्री स्वास्थ्य से संबंधित.

आज के दौर में जहां PCOS, अनियमित माहवारी, हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याएं सामान्य होती जा रही हैं, ऐसे में शतावरी महिलाओं के लिए किसी प्राकृतिक औषधीय वरदान से कम नहीं. 

शतावरी को 'महिलाओं की रानी' जड़ी-बूटी भी कहा जाता है, और यह अपनी एडाप्टोजेनिक गुणों के लिए जानी जाती है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव के अनुकूल बनाने में मदद करती है. आइए, जानते हैं कि कैसे शतावरी हर स्त्री की सेहत का पूरा ख़याल रखती है और इसे क्यों हर महिला के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लीमेंट माना जाता है.

Loading Ad...

शतावरी के अद्भुत फायदे

Loading Ad...

इसके चमत्कारी गुण न केवल हार्मोन संतुलन को बढ़ाते हैं बल्कि शरीर को समग्र रूप से पोषण भी देते हैं. यह देखने में झाड़ीदार पौधा होता है और मुख्य रूप से इसकी जड़ का उपयोग किया जाता है. सुश्रुत संहिता के अनुसार, यह एक रसायन औषधि मानी जाती है और इसका उपयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है. ज्यादातर इसका उपयोग स्तनपान को बढ़ावा देने, गर्भाशय को स्वस्थ रखने और रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है. 

चरक संहिता में, शतावरी के कुछ हिस्सों को सब्जी की तरह खाने के बारे में बताया गया है. एनआईएच की रिपोर्ट के अनुसार, शतावरी रेसमोसस लिलिएसी परिवार से संबंधित है और आम तौर पर सतावर, सतमुली, सतावरी के नाम से जाना जाता है जो पूरे भारत में कम ऊंचाई पर पाया जाता है. पौधे की सूखी जड़ों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है. 

Loading Ad...

शतावरी को पाचन में सुधार, अल्सर के इलाज, और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए भी उपयोगी माना जाता है. आधुनिक शोध शतावरी को महिला प्रजनन स्वास्थ्य, हार्मोन संतुलन और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने में काम करता है. आयुर्वेद के अनुसार, शतावरी में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं, जो शरीर के तनाव को अनुकूल बनाने में मदद करते हैं और इसका सेवन करने से मोनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल असंतुलन को संतुलित करने में मदद मिलती है. 

तनाव दूर करता है शतावरी का काढ़ा

शतावरी के बने काढ़े के इस्तेमाल से तनाव दूर होता है और अनिद्रा की समस्या भी खत्म होती है. आयुर्वेद में शतावरी एनीमिया को भी ठीक करने में लाभकारी होता है. शतावरी का आयुर्वेद में वर्णन मिलता है. शतावरी में फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन के, विटामिन ई और विटामिन-सी, आयरन, कैल्शियम, मैंगनीज और सेलेनियम, जिंक, एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. 

Loading Ad...

शतावरी का सेवन सर्दी-जुकाम, बवासीर, बुखार के इलाज में वरदान है. शतावरी की जड़ से बने काढ़े के सेवन से लाभ मिलता है. महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याओं में भी इसके सेवन से लाभ मिलता है. पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, पेट के तनाव और ऐंठन में भी इससे राहत मिलती है. शतावरी पाचन तंत्र को मजबूत करता है, जिससे कब्ज, वात, जलन जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. फिर भी सेवन से पहले चिकित्सीय परामर्श की सलाह दी जाती है. 

शतावरी वास्तव में हर स्त्री के लिए आयुर्वेद का एक अनमोल उपहार है. प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर भावनात्मक और शारीरिक संतुलन तक, यह महिलाओं को जीवन के हर चरण में सहारा प्रदान करती है. अपनी दिनचर्या में शतावरी को शामिल करके, महिलाएं एक स्वस्थ, संतुलित और ऊर्जावान जीवन जी सकती हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...