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झुक जाएगा शरीर, जकड़ लेगी सर्वाइकल की समस्या, रील की लत बनी इन गंभीर बीमारियों की वजह, डॉक्टर्स ने चेताया

बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, सभी रील्स देखते-देखते घंटों बिता देते हैं. देखने में यह आदत बेहद सामान्य लगती है, लेकिन अब डॉक्टर्स ने स्क्रॉलिंग से होने वाली गंभीर बीमारियों के बारे में चेतावनी दी है.

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यूथ तो यूं ही बदनाम है सोशल मीडिया रील और स्क्रॉलिंग ने बड़े-बुजुर्गों को भी आदी बना दिया. सुबह की शुरुआत रील के साथ, रात खत्म भी हो रही है रील के साथ. मनोरंजन के बड़े साधन मोबाइल और रील की आदत बीमार बना रही है. रील तो जैसे दिनचर्या का हिस्सा ही बन गई है. 

बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, सभी रील्स देखते-देखते घंटों समय बिता लेते हैं. देखने में यह आदत बेहद सामान्य लगती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यही आदत धीरे-धीरे गर्दन की सेहत को खराब कर रही है. आजकल कम उम्र में ही लोगों को गर्दन दर्द, अकड़न और सर्वाइकल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी एक बड़ी वजह लगातार रील्स देखना है. 

स्पाइन की गंभीर बीमारी की वजह बनी रील 

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मेडिकल साइंस के अनुसार, जब कोई शख्स मोबाइल पर रील्स देखता है, तो उसका सिर अक्सर आगे की ओर झुका रहता है.  सामान्य स्थिति में हमारी गर्दन पर सिर का वजन लगभग पांच किलो होता है, लेकिन जैसे ही सिर आगे की ओर झुकता है, यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है. लंबे समय तक इसी स्थिति में रहने से गर्दन की मांसपेशियों और नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही दबाव धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पाइन को नुकसान पहुंचाने लगता है. शुरुआत में हल्का दर्द महसूस होता है, जिसे लोग थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. 

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डॉक्टर बताते हैं कि रील्स देखते समय व्यक्ति एक ही पोजीशन में लंबे समय तक बैठा या लेटा रहता है. गर्दन हिलती-डुलती नहीं है और मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं. इससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में जकड़न आने लगती है. यही जकड़न आगे चलकर गंभीर दर्द का रूप ले लेती है. कई मामलों में यह दर्द गर्दन से कंधों और बाजुओं तक फैल जाता है, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है. 

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बिगड़ सकती है रीढ़ की नैचुरल पोजिशन 

सिर्फ गर्दन ही नहीं, रील्स देखने की आदत का असर रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है. रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर को सीधा रखने में मदद करती है. जब गलत पोस्चर लंबे समय तक बना रहता है, तो रीढ़ की प्राकृतिक बनावट बिगड़ने लगती है. इसका सीधा असर गर्दन के ऊपरी हिस्से पर पड़ता है. मेडिकल की भाषा में इसे सर्वाइकल स्पाइन डिसऑर्डर कहा जाता है. समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या स्थायी भी हो सकती है. 

दिमाग और आंखों पर भी गंभीर असर 

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रील्स की लत का असर दिमाग और आंखों पर भी पड़ता है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, भारीपन और धुंधलापन महसूस होने लगता है. वहीं दिमाग हर समय वीडियो देखने की वजह से रिलैक्स नहीं हो पाता. दिमाग और शरीर के बीच संतुलन बिगड़ जाता है. तनाव बढ़ने से मांसपेशियों का दर्द और ज्यादा महसूस होता है, जिससे गर्दन की परेशानी और गंभीर हो जाती है. 

इसके अलावा लंबे समय तक रील्स देखने से सिरदर्द, चक्कर आना और कभी-कभी हाथों में झनझनाहट जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. डॉक्टरों के अनुसार, यह नसों पर पड़ने वाले दबाव का संकेत हो सकता है. अगर समय रहते इन संकेतों को समझा न जाए, तो आगे चलकर दवाइयों और फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है. 

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