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ये कोई आम मसाला नहीं, कंट्रोल में रहेगी डायबिटीज, बस जान लें कैसे करें सेवन
दालचीनी को 'अग्निदीपक' यानी पाचन अग्नि बढ़ाने वाला मसाला कहा गया है. अगर आपको अक्सर भारी पेट, गैस, अपच या भूख न लगना जैसी परेशानियां होती हैं, तो दालचीनी इन सभी में मदद करती है. चरक संहिता में इसे पाचन बढ़ाने वाले द्रव्यों में शामिल किया गया है.
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दालचीनी, जिसे हम रोज अपने खाने में मसाले के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं है. आयुर्वेद में इसे एक प्राकृतिक औषधि माना गया है. सही मात्रा में लेने से दालचीनी हमारी सेहत के लिए वरदान साबित होती है. चाहे पाचन संबंधी परेशानी हो, खांसी या सर्दी का झोंका, शुगर कंट्रोल, रक्त संचार या महिलाओं के मासिक चक्र से जुड़ी दिक्कतें दालचीनी हर जगह मदद करती है.
पाचन को रखे दुरुस्त
सबसे पहले बात करते हैं पाचन तंत्र की. आयुर्वेद में दालचीनी को 'अग्निदीपक' यानी पाचन अग्नि बढ़ाने वाला मसाला कहा गया है. अगर आपको अक्सर भारी पेट, गैस, अपच या भूख न लगना जैसी परेशानियां होती हैं, तो दालचीनी इन सभी में मदद करती है. चरक संहिता में इसे पाचन बढ़ाने वाले द्रव्यों में शामिल किया गया है.
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सर्दी और खांसी में असरदार
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सर्दी और खांसी में भी दालचीनी कारगर है. इसमें कफ नाशक गुण होते हैं, जो बलगम, गले में खराश और जकड़न को कम करने में मदद करते हैं. भावप्रकाश निघंटु में इसे विशेष रूप से कफ नाशक के रूप में बताया गया है. ठंडे मौसम में सुबह या रात को दालचीनी वाली चाय पीना जुकाम और बलगम को कम करने में फायदेमंद हो सकता है.
शुगर कंट्रोल करने में मददगार
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शुगर कंट्रोल की बात करें तो आयुर्वेद में इसे मधुमेह (प्रमेह) में उपयोगी माना गया है. दालचीनी शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को सपोर्ट करती है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है.
रक्त संचार को बनाए बेहतर
रक्त संचार को बेहतर बनाना भी दालचीनी की खासियत है. यह शरीर में हल्की गर्मी पैदा करती है, जिससे हाथ-पैर ठंडे रहना, सुस्ती और ब्लड फ्लो की कमी जैसी समस्याओं में आराम मिलता है.
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त्वचा के छोटे-मोटे इन्फेक्शन में भी फायदेमंद
दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं. इसका इस्तेमाल हल्के संक्रमण, मुंह की बदबू या त्वचा के छोटे-मोटे इन्फेक्शन में भी फायदेमंद माना जाता है.
महिलाओं के लिए भी लाभकारी
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महिलाओं के लिए यह और भी लाभकारी है. पीरियड्स के दर्द, मासिक चक्र की अनियमितता और ऐंठन में दालचीनी सहायक है क्योंकि यह रक्त संचार को बढ़ाती है. आयुर्वेदिक ग्रंथ भावप्रकाश निघंटु में इसका स्त्री रोगों में उपयोग बताया गया है.
ऐसे करें दालचीनी का सेवन
दालचीनी को आप पाउडर या स्टिक के रूप में चाय, दूध, पानी, शहद, या भोजन में मिलाकर खा सकते हैं. सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू के साथ लेना, या रात को सोने से पहले दूध में डालकर पीना इसके लोकप्रिय तरीके हैं
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.