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सर्वांगपुष्टि आसन: पूरे शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने का सरल योग अभ्यास

सर्वांगपुष्टि आसन सरल दिखता है, लेकिन इसे सही तरीके से और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए. गर्दन, पीठ या कंधे में कोई चोट, हाई ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो इस आसन से बचें.

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आज के समय की जीवनशैली ऐसी अनियमित बन चुकी है कि तन के साथ मन भी रोगों की जद में आसानी से आ जाता है. ऐसे में एक्सपर्ट रोजाना कम से कम 10 से 15 मिनट योगासन अभ्यास की सलाह देते हैं, जो कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को छूमंतर करने में कारगर है. 

क्या है सर्वांगपुष्टि आसन?

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ऐसे ही एक आसान और कमाल के आसन सर्वांगपुष्टि आसन से परिचित कराता है. यह एक प्रभावी व्यायाम है, जो पूरे शरीर को पुष्ट और मजबूत बनाने में सहायक होता है. यह आसन शरीर के सभी अंगों को सक्रिय कर रक्त संचार, मांसपेशियों की ताकत और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है.

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सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे

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आज की भागदौड़ भरे जिंदगी में जहां बैठे रहने, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण शारीरिक कमजोरी, कमर दर्द, मोटापा और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं आम हो गई हैं, सर्वांगपुष्टि आसन बेहद कारगर है. यह आसन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक ऊर्जा को भी बढ़ाता है, जिससे आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटना आसान हो जाता है.

सर्वांगपुष्टि आसन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है, जिससे कमर और पीठ दर्द से राहत मिलती है. यह पूरे शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर कमर, पेट और पैरों की चर्बी को तेजी से कम करने में मदद करता है. रक्त संचार बेहतर होने से ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे त्वचा में चमक आती है और इम्युनिटी मजबूत होती है.

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इसके नियमित अभ्यास से मोटापा, कब्ज और शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याओं में भी सुधार होता है. बच्चों में हाइट बढ़ाने और युवाओं में शारीरिक विकास के लिए भी यह उपयोगी है. इसके अलावा, यह जोड़ों की जकड़न दूर करता है, लचीलापन बढ़ाता है और थकान, तनाव को कम कर ऊर्जा का स्तर बनाए रखता है.

किन लोगों को नहीं करना चाहिए?

सर्वांगपुष्टि आसन सरल दिखता है, लेकिन इसे सही तरीके से और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए. गर्दन, पीठ या कंधे में कोई चोट, हाई ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो इस आसन से बचें. गर्भवती महिलाओं और पीरियड्स के दौरान भी इसे न करें. शुरुआत में ज्यादा देर तक न रखें और सांस पर ध्यान दें. यदि चक्कर आए या असुविधा हो तो तुरंत रुक जाएं. हमेशा खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद अभ्यास करें.

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