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Maharashtra में रहस्यमयी बीमारी का कहर, एक की मौत, लगातार बढ़ रहे मरीज

महाराष्ट्र में रहस्यमयी गुलियन बैरे सिंड्रोम से लोग खौफ में है इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 100 के पार हो गई. जबकि एक मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पीड़ितों के लिए बड़ी घोषणा की है.

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महाराष्ट्र में एक रहस्यमयी बीमारी से लोग खौफ में हैं एक ऐसा सिंड्रोम जो नसों पर हमला करके शरीर को सुन्न कर देता है।महाराष्ट्र में इस बीमारी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित एक शख्स की मौत भी हो गई जिसके बाद आम लोगों के साथ साथ स्वास्थ्य प्रशासन भी टेंशन में आ गया। 

महाराष्ट्र में फैली रहस्यमयी बीमारी। पुणे से निकला गुलियन बैरे सिंड्रोम।नसों पर हमला कर रहा ये सिंड्रोम। GB सिंड्रोम के शिकार मरीज की मौत।

गुलियन बैरे सिंड्रोम के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस सिंड्रोम का पहला केस पुणे से सामने आया था। इसके बाद अब तक कुल मरीजों की संख्या 110 हो गई। इनमें से करीब 17 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। जबकि एक 41 साल के चार्टेड अकाउंटेंट की मौत हो गई। पीड़ित शख्स महाराष्ट्र के शोलापुर का रहने वाला था। स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से मौत की पुष्टि की है। आखिर कहां से निकला है ये सिंड्रोम, क्या है इसके लक्षण और कैसे ये इतनी तेजी से फैला। इस बीमारी के बारे में चलिए जानते हैं सब कुछ जो जानना बेहद जरूरी है ।

क्या है GB सिंड्रोम ? 


गुलियन बैरे सिंड्रोम। जो कि एक तरह का रेयर सिंड्रोम है। इससे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो जाता है।शरीर का अच्छा इम्यून सिस्टम जो हमें बीमारियों से बचाता है वो शरीर की अपनी ही नर्व्स या कोशिकाओं पर अटैक कर देता है या नुकसान पहुंचा देता है। जिससे कोशिकाओं में सूजन होने लगती है और पूरे शरीर पर इसका असर दिखता है। खासकर नसों के लिए ये घातक साबित हो सकता है। इसका कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन भी माना गया है।

 GB सिंड्रोम के लक्षण 

मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलने जैसी समस्या होने लगती है।  शरीर के निचले अंगों में कमजोरी और दस्त की समस्या।  शरीर सुन्न हो सकता है, कंपकपी बढ़ जाती है मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।  शरीर को संकेत देने वाली नसों पर अटैक करता है ये सिंड्रोम ।
GB सिंड्रोम दिमाग में ब्लड फ्लो को कम कर देता है ।GB सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को बोलने और निगलने में भी तकलीफ होने लगती है ।

GB सिंड्रोम उन लोगों को शिकार बनाता है जिनकी इम्यूनिटी कम होती है।इसके ज्यादातर मरीज पुरुष होते हैं।

 GB सिंड्रोम को कैसे रोकें ? 


ये सिंड्रोम भी एक तरह का वायरल इंफेक्शन है इसलिए इस बीमारी के मरीजों से दूर रहें या एहतियात बरतें। जैसे हाथ बार बार धोएं। शुद्ध और स्वच्छ खाना खाएं।अपने आस-पास भी सफाई रखें। डेली इस्तेमाल में होने वाली चीजों को साफ रखें।

GB सिंड्रोम का क्या है इलाज ? 


GB सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन दिया जाता है ।एक इंजेक्शन की कीमत करीब 20 हजार रुपए होती है। GB सिंड्रोम के गंभीर मरीज को करीब 13 इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। इसके इलाज का एक तरीका प्लाज्माफेरेसिस भी है जो एक तरीके की प्लाज्मा थेरेपी है। 

हालांकि मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच महाराष्ट्र सरकार ने GB सिंड्रोम के पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की है जैसा की हमने बताया इलाज काफी महंगा है ऐसे में सरकार की ये घोषणा राहत की बात है। इसके साथ ही पुणे में GB सिंड्रोम के मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड भी बनाए गए हैं।

केंद्र सरकार की टीम जांच में जुटी ।

महाराष्ट्र में GB सिंड्रोम के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की टीम महाराष्ट्र भेजी है।इस टीम में 7 सदस्य हैं।

 महाराष्ट्र में घर-घर जांच अभियान तेज।

 
महाराष्ट्र के पुणे और सोलापुर से GB सिंड्रोम के ज्यादातर केस हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम इन इलाकों में सर्वे कर रही है। घर घर जाकर जांच की जा रही है। हल्के से लक्षण नजर आने पर जांच सैंपल लिए जा रहे हैं। नॉर्मल बैक्टीरियल इंफेक्शन के केस से भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क है क्योंकि ये ही बैक्टीरियल इंफेक्शन GB सिंड्रोम का कारण बन सकता है। जो ठीक होने के बाद भी कई महीनों तक शरीर पर प्रभाव छोड़ देता है। 
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