×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

Paracetamol सहित कई दवाओं ने किया लोगों के दिमाग में दर्द, क्वालिटी टेस्ट में हुईं फेल

CDSCO ने अगस्त 2024 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक नियमित रूप से उपयोग की जाने वालीं कई महत्वपूर्ण दवाएं गुणवत्ता परीक्षण (क्वालिटी टेस्ट) में फेल पाई गईं। इन सभी दवाओं को NSQ (No Standard Quality) घोषित किया गया है।

Author
26 Sep 2024
( Updated: 02 Dec 2025
03:22 PM )
Paracetamol सहित कई दवाओं ने किया लोगों के दिमाग में दर्द, क्वालिटी टेस्ट में हुईं फेल
Pexels
Advertisement

तिरुपति लड्डू प्रसाद के साथ छेड़छाड़ का मामला अभी थमा भी नहीं था कि करीब 53 दवओं के क्वालिटी टेस्ट में फेल होने की ख़बर से हड़कंप मच गया है। ये दवाएं सर दर्द, बुखार, विटामिन, शुगर और ब्लड प्रेशर सहित एंटीबॉयोटिक्स की हैं।

किसने दवाओं का परीक्षण किया?

ड्रग रेगुलेटरी बॉडी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने ये लिस्ट जारी की है। CDSCO ने अगस्त 2024 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक नियमित रूप से उपयोग की जाने वालीं कई महत्वपूर्ण दवाएं गुणवत्ता परीक्षण (क्वालिटी टेस्ट) में फेल पाई गईं। इन सभी दवाओं को NSQ (No Standard Quality) घोषित किया गया है।

कौन सी प्रमुख दवाएं को NSQ घोषित किया गया है?

Advertisement

Paracetamol 500 mg: सर दर्द और बुखार से राहत दिलाने के लिए ये दवा मशहूर है और कोरोना के समय भी इसका भरपूर इस्तेमाल हुआ।

Telma H (Telmisartan 40 mg): ग्लेनमार्क कंपनी द्वारा निर्मित ये दवा भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई है। बीपी के इलाज में Telma का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। 

Glimepiride: यह एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसका उपयोग शुगर यानी मधुमेह के इलाज में किया जाता है। 

Clavam 625: यह एक एंटीबायोटिक दवा है जो बिलो स्टैंडर्ड साबित हुई हैं।

Advertisement

Cepodem XP 50 Dry Suspension: गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में बच्चों को दी जाने वाली दवा है। 

इसके अलावा Pulmosil और Pantocid जैसी कुछ नामी प्रमुख दवाएं हैं जो quality sample टेस्ट में फेल हुई हैं।

क्वालिटी टेस्ट में फेल होने को लेकर क्या बोलीं कंपनियां? 

CDSCO ने सैंपल टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं की लिस्ट के साथ-साथ इसे बनाने वाली कंपनियों का जवाब भी अपने पोर्टल पर जारी किया है। संबंधित फार्मा कंपनियों ने कहा कि जिन दवाओं के नाम या बैच नंबर जारी हुए हैं उन्होंने उनका निर्माण नहीं किया है, ये दवाएं नकली हो सकती हैं। वो विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही हैं। 

CDSCO ने इस मामले पर क्या कहा और क्या कार्रवाई की? 

Advertisement

ड्रग नियामक एजेंसी CDSCO यह देख रही है कि क्या वास्तव में इन दवाओं को नकली रूप में बाजार में उतारा गया है जैसा कि फार्मा कंपनियां दावा कर रही हैं या फिर इन दवाओं को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल या मानकों के उल्लंघन के तहत निर्मित किया गया है। पूरी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल इन दवाओं की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई हैं। एजेंसी ने सैंपल टेस्ट में फेल कंपनियों से जरूरी कदम उठाने को कहा है।

CDSCO क्या है और इसका मुख्य काम क्या है?

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) भारत का प्रमुख ड्रग रेगुलेटरी बॉडी है। भारत के ड्रग कंट्रोलर जर्नल डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी हैं। CDSCO का मुख्य काम है भारत में दवाओं के लाइसेंस जारी करना, गुणवत्ता को परखना, नकली दवाओं की रोकथाम के साथ-साथ दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और Beauty Product के नियमन और मानकों के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है। यह संगठन भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है। 

अब आगे क्या?

भारत में जिस तरह से pharma lobby काम करती हैं और बिना नियम, prescription और जांच परख के दवाओं की बिक्री होती है, उस पर और सख़्त कानून और रेगुलेशन की जरूरत है। सबसे पहले सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वो लोगों को बीमारियों से बचाए, अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराए। अगर वो ऐसा नहीं कर सकती है तो कम से कम अच्छी दवा लोगों को मिले ये तो सुनिश्चित करे। 

Advertisement

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें