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एशिया में कंडोम का भारत दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता, 2035 तक 405 मिलियन डॉलर मार्केट पहुंचने के आसार

एशिया का कंडोम मार्केट आने वाले दशक में बड़ी छलांग लगाने को तैयार है. इंडेक्स बॉक्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2035 तक इस मार्केट का आकार 19 अरब यूनिट्स और 405 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

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मेडिकल स्टोर में आपने अक्सर देखा होगा कि कंडोम का पैकेट दुकान की ऐसी जगह पर रखा होता है, जहां वह आसानी से दिख जाए. वजह साफ है-'कंडोम'. ये शब्द बोलने में लोग आज भी हिचकिचाते हैं. समाज में अक्सर यह शब्द खुलकर नहीं लिया जाता. दुकानदार भी इस मनोविज्ञान को समझते हैं और इसलिए पैकेट को सामने रखते हैं ताकि लोगों को खरीदने में कम परेशानी हो.

दुनिया भर में अरबों का कारोबार, एशिया में लगातार बढ़ रहा मार्केट  

कंडोम जिसका नाम लेने में लोग झिझकते हैं, बावजूद इसके जिसका कारोबार आज दुनिया भर में अरबों का है. एशिया में इसका मार्केट लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन 5.8 अरब यूनिट्स के साथ एशिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो कुल खपत का लगभग 42% है. भारत 2.4 अरब यूनिट्स के साथ दूसरे और तुर्की 701 मिलियन यूनिट्स के साथ तीसरे स्थान पर है.

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कुल खपत में चीन भले ही सबसे बड़ा हो, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत के मामले में UAE सबसे आगे है. यहां हर शख्स औसतन 31 यूनिट्स सालाना इस्तेमाल करता है. इसके बाद तुर्की, वियतनाम और थाईलैंड का नंबर आता है.

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2035 तक 19 अरब यूनिट्स (405 मिलियन डॉलर) पहुंचने की उम्मीद 

इंडेक्स बॉक्स एक मार्केट रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स कंपनी है.यह प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्रीज पर बाजार विश्लेषण, ट्रेंड्स, खपत, उत्पादन, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट डेटा और भविष्य के अनुमान जारी करती है. हाल ही में इंडेक्स बॉक्स ने एशिया के कंडोम मार्केट पर रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें खपत, उत्पादन, कीमतों और 2035 तक के एनालिसिस किया है. 

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इंडेक्स बॉक्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि एशिया का कंडोम मार्केट 2035 तक 19 अरब यूनिट्स और 405 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. साल 2024 इस उद्योग के लिए थोड़ा कमजोर रहा. खपत घटकर 14 अरब यूनिट्स और मार्केट वैल्यू घटकर 292 मिलियन डॉलर रह गई. यह लगातार दूसरा साल था जब गिरावट दर्ज की गई. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुस्ती अस्थायी है और आने वाले सालों में बाजार फिर से रफ्तार पकड़ेगा.

निर्यात के मामले में थाईलैंड, मलेशिया और चीन सबसे आगे

औसतन इम्पोर्ट कीमत 31 डॉलर प्रति हजार यूनिट्स रही, लेकिन वियतनाम में यह 48 डॉलर और मलेशिया में सिर्फ 9.6 डॉलर रही.उत्पादन की बात करें तो 2022 में 32 अरब यूनिट्स बनने के बाद, 2024 में यह घटकर 26 अरब यूनिट्स रह गया. वैल्यू के लिहाज से भी उत्पादन घटकर 522 मिलियन डॉलर रह गया. निर्यात के मामले में थाईलैंड, मलेशिया और चीन सबसे आगे हैं और मिलकर एशिया के 95% एक्सपोर्ट को नियंत्रित करते हैं. 

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रिपोर्ट का अनुमान है कि 2024 से 2035 के बीच एशियाई कंडोम मार्केट औसतन 3% सालाना ग्रोथ रेट दर्ज करेगा. यानी आने वाले दशक में यह बाजार न सिर्फ पहले जैसी रफ्तार पकड़ेगा, बल्कि और बड़ी छलांग लगाएगा.

कंडोम का इतिहास, प्राचीन दौर में भी होता था इस्तेमाल 

कंडोम का जिक्र हजारों साल पुराना है. माना जाता है कि करीब 5000 साल पहले यहूदी पौराणिक कथाओं में राजा मिनोस की कहानी में बकरी के मूत्राशय का इस्तेमाल सुरक्षा के तौर पर किया गया था. प्राचीन मिस्र में भी लोग प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करते थे, जबकि प्राचीन रोम में बकरियों और भेड़ों के मूत्राशय और आंतों से बने कंडोम काफी प्रचलित थे.

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हालांकि असली बदलाव 1920 में लेटेक्स की खोज के साथ आया. इसके बाद कंडोम आसानी से बनने लगे, ज़्यादा टिकाऊ और सुरक्षित हो गए. यही वजह है कि आज कंडोम दुनिया का सबसे सुलभ और भरोसेमंद गर्भनिरोधक साधन माना जाता है. यह न सिर्फ यौन संचारित रोगों से बचाता है, बल्कि जनसंख्या नियंत्रण में मदद करता है और महिलाओं को आजादी देता है.

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