×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

चैत्र के महीने में नीम, शुद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक

चैत्र माह में पड़ने वाले उगादी, गुड़ी पड़वा और नवरात्र के पर्व में नीम का इस्तेमाल किसी न किसी तरीके से होता आया है. चैत्र माह में नीम का इस्तेमाल सिर्फ पूजा में नहीं, बल्कि खाने में किया जाता है, और इस परंपरा का निर्वाहन काफी समय से किया जा रहा है.

चैत्र के महीने में नीम, शुद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक
Advertisement

कड़वा लेकिन नीम के मीठे गुण उसे बाकी सभी पेड़-पौधों से अलग बनाते हैं, लेकिन चैत्र के महीने में नीम का विशेष महत्व है, जो इसे आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से खास बनाता है. 

आध्यात्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, चैत्र से नया वर्ष और नई ऊर्जा की शुरुआत मानी जाती है, और नीम के पेड़ पर नई और कोमल पत्तियां आना भी शुरू हो जाती हैं, जो स्वाद में हल्की मीठी लगती हैं. यही कारण है कि नीम को चैत्र माह में नई शुरुआत और शुद्धि के रूप में देखा जाता है.

Advertisement

चैत्र पर्वों में नीम का उपयोग

चैत्र माह में नीम का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. भारतीय परंपरा में नीम को पवित्र, शुद्धिकारी और देवी-ऊर्जा से जुड़ा पेड़ माना गया है. इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक कारण बताए जाते हैं. चैत्र माह में मच्छरों से छुटकारा पाने और घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए घरों में नीम की टहनियां लगाने की परंपरा काफी पुरानी है. इसके साथ ही कुछ लोग नीम के पेड़ में देवी का वास मानते हैं. यही कारण है कि चैत्र नवरात्रि में कुछ राज्यों में पूजा के दौरान नीम की पत्तियां शामिल करने का भी चलन है कलश स्थापना के समय आम और नीम की पत्तियों को पूजा में शामिल किया जाता है और तोरण बनाकर घर के मुख्य दरवाजे पर लगाया जाता है.

आयुर्वेदिक और स्वास्थ्य लाभ

Advertisement

चैत्र माह में पड़ने वाले उगादी, गुड़ी पड़वा और नवरात्र के पर्व में नीम का इस्तेमाल किसी न किसी तरीके से होता आया है. चैत्र माह में नीम का इस्तेमाल सिर्फ पूजा में नहीं, बल्कि खाने में किया जाता है, और इस परंपरा का निर्वाहन काफी समय से किया जा रहा है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र से नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही नई ऊर्जा के प्रवाह और शुद्धिकरण के लिए नीम की पत्तियों को चबाया जाता है. दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में नीम के साथ गुड़ खाने की परंपरा को सदियों से फॉलो किया जाता है. माना जाता है कि यह माह मन और तन दोनों के शुद्धिकरण और नई शुरुआत का प्रतीक है.

महाराष्ट्र में मनाए जाने वाले त्योहार गुड़ी पड़वा में भी नीम का विशेष महत्व है. इस दिन सुबह की शुरुआत ही नीम से होती है. इस दिन नीम के पानी से नहाने की परंपरा निभाई जाती है और नीम की कोमल पत्तियां, मिश्री, गुड़ और अन्य सामग्री मिलाकर व्यंजन भी तैयार किया जाता है. यह जीवन के सुख-दुख के पलों को अनुभव देता है और आने वाली परिस्थितियों के लिए भी मन और तन दोनों को तैयार करने में मदद करता है. दक्षिण भारत में उगादी पर नीम और गुड़ की चटनी बनाई जाती है, जिसे शुद्धिकरण का प्रतीक माना गया है. माना जाता है कि उसका सेवन जीवन में आने वाली नकारात्मकता को कम करता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें