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उठना-बैठना सब भारी... अचानक बढ़ता ब्रेस्ट साइज बना गंभीर बीमारी का संकेत, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

प्यूबर्टी वह समय है जब 8 से 13 साल की उम्र में शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं और ब्रेस्ट ग्रोथ, पीरियड्स व शारीरिक परिवर्तन दिखाई देते हैं. ऐसी समय में कभी-कभी ऐसे समस्या भी होती है जब ब्रेस्ट का साइज़ तेज़ी से बढ़ने लगा है.

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प्यूबर्टी किसी भी लड़की के जीवन का एक अहम पड़ाव होता है. यही वह समय है जब शरीर में हार्मोनल और फिजिकल बदलाव तेजी से होने लगते हैं. आमतौर पर 8 से 13 साल की उम्र के बीच प्यूबर्टी शुरू होती है. इस दौरान एस्ट्रोजन जैसे सेक्स हार्मोन बढ़ते हैं, ब्रेस्ट की ग्रोथ होती है, शरीर का शेप बदलता है और पीरियड्स की शुरुआत होती है. लेकिन अमेरिका की रहने वाली Summer Robert के साथ जो हुआ, वह सामान्य नहीं था.

7 साल की उम्र से ही दिखने लगे बदलाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समर रॉबर्ट को सिर्फ 7 साल की उम्र में ही ब्रेस्ट ग्रोथ शुरू हो गई थी. स्कूल में वह अपने साथ की लड़कियों से बिल्कुल अलग दिखती थीं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका ब्रेस्ट साइज लगातार बढ़ता रहा और आज 25 साल की उम्र में भी यह रुकने का नाम नहीं ले रहा. 4 फीट 9 इंच की लंबाई के साथ उनके ब्रेस्ट का कुल वजन 25 किलो से ज्यादा बताया जाता है. यह स्थिति उनके लिए सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक चुनौती भी बन गई.

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डॉक्टरों ने बताया बीमारी का नाम

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डॉक्टरों के मुताबिक, समर को मैक्रोमैस्टिया की एडवांस स्टेज यानी Gigantomastia है. मेडिकल भाषा में मैक्रोमैस्टिया और जाइगेंटोमैस्टिया ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें ब्रेस्ट टिश्यू असामान्य रूप से बढ़ने लगते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि जाइगेंटोमैस्टिया ज्यादा गंभीर रूप है, जिसमें ग्रोथ बहुत तेजी से और ज्यादा मात्रा में होती है. Cleveland Clinic के मुताबिक, जब ब्रेस्ट टिश्यू का वजन 2 से 2.5 किलो से ज्यादा हो जाए या शरीर के कुल वजन का 3 प्रतिशत पार कर जाए, तो उसे जाइगेंटोमैस्टिया की श्रेणी में रखा जाता है. इस स्थिति में रोजमर्रा की जिंदगी, पोश्चर, पीठ दर्द और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है.

बचपन से झेली तकलीफें और सामाजिक दबाव

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समर ने बताया कि 15 साल की उम्र में कुछ महीनों में उनका ब्रेस्ट साइज डबल हो गया. डॉक्टरों ने पहले इसे सामान्य प्यूबर्टी का हिस्सा बताया. बाद में उन्हें वजन कम करने की सलाह दी गई, जबकि उनकी लोअर बॉडी में अतिरिक्त फैट नहीं था. 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया क्योंकि लगातार घूरना, फब्तियां और हरासमेंट उनके लिए असहनीय हो गया था. हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करते समय भी उन्हें ओवर-सेक्सुअलाइज्ड नजरों का सामना करना पड़ा. सर्जरी की सलाह भी दी गई, लेकिन कम बीएमआई के कारण ऑपरेशन टाल दिया गया. भारी वजन के कारण उन्हें पीठ और कमर में तेज दर्द रहता है. सामान्य काम जैसे बर्तन धोना या झुककर सफाई करना भी मुश्किल हो जाता है. दौड़ना, जिम जाना या खेलकूद करना लगभग असंभव है.

क्यों बढ़ते हैं ब्रेस्ट टिश्यू?

PubMed में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, कई मामलों में स्पष्ट कारण सामने नहीं आता. माना जाता है कि ब्रेस्ट टिश्यू एस्ट्रोजन, प्रोलैक्टिन और ग्रोथ फैक्टर्स जैसे हार्मोन्स के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं. कुछ मामलों में हाइपरप्रोलैक्टिनीमिया, ऑटोइम्यून बीमारियां या थायरॉइड असंतुलन भी रिस्क फैक्टर हो सकते हैं. प्यूबर्टी और प्रेग्नेंसी के दौरान अचानक हार्मोनल बदलाव इस स्थिति को ट्रिगर कर सकते हैं.

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लाइफस्टाइल पर असर

जानकारों के अनुसार, इस समस्या से जूझ रही महिलाओं को सही फिटिंग के कपड़े नहीं मिलते, खेलकूद और एक्सरसाइज में दिक्कत होती है. बॉडी इमेज इश्यू, शर्म, सोशल एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण भी देखे गए हैं. यह सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक संघर्ष भी है. हालांकि समर ने अपनी कमजोरी को ताकत में बदलने की कोशिश की है और नए प्रोफेशन के जरिए अच्छी कमाई कर रही हैं. उनकी कहानी यह बताती है कि प्यूबर्टी में होने वाले बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन यदि ग्रोथ असामान्य रूप से ज्यादा हो, दर्द हो या मानसिक तनाव बढ़े, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. जागरूकता और सही इलाज ही ऐसी दुर्लभ बीमारियों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है.

बताते चलें कि समर रॉबर्ट की कहानी हमें यह समझाती है कि शरीर में होने वाले बदलावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर प्यूबर्टी के दौरान असामान्य ग्रोथ, लगातार दर्द या मानसिक परेशानी महसूस हो, तो समय पर मेडिकल सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही जानकारी और जागरूकता ही ऐसी दुर्लभ स्थितियों से निपटने का सबसे मजबूत सहारा है.

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