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थकान और कमजोरी से छुटकारा, एनीमिया रोकने के आसान उपाय
चाय-कॉफी भोजन के तुरंत बाद न पिएं, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को रोकती हैं. हर 3-6 महीने में हीमोग्लोबिन जांच करवाएं. गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट लेने चाहिए.
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शरीर में खून की कमी (एनीमिया) से सुस्ती, थकान, चक्कर आना, कमजोरी और सांस फूलने जैसी परेशानियां होती हैं. इसे रोकने के लिए रोजाना आयरन युक्त चीजें खाना फायदेमंद होता है. पालक, चुकंदर, अनार, खजूर, गुड़, काले चने, राजमा और दालें समेत अन्य पौष्टिक चीजों के नियमित सेवन से एनर्जी बनी रहेगी और खून की कमी नहीं होगी.
एनीमिया से बचाव के लिए सही आहार
नेशनल हेल्थ मिशन ने एनीमिया (खून की कमी) को खत्म करने के लिए देशव्यापी जागरुकता अभियान तेज किया है. इस अभियान का मुख्य संदेश है, "एनीमिया को हराएं, स्वस्थ जीवन अपनाएं." एनीमिया एक ऐसी समस्या है जो खासकर महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में आम है. यह थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और बच्चों में विकास रुकने जैसी परेशानियां पैदा करती है, लेकिन सही आहार, नियमित जांच और जागरूकता से एनीमिया-मुक्त हुआ जा सकता है.
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शरीर में नहीं होगी खून की कमी
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एनीमिया से बचने के लिए सबसे जरूरी है रोजाना आयरन, विटामिन सी और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार लेना. आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है, जो खून में ऑक्सीजन पहुंचाता है. विटामिन सी आयरन को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन शरीर की मरम्मत और विकास के लिए आवश्यक होता है.
आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ, चौलाई, चना, राजमा, सोयाबीन, काले चने, ज्वार, बाजरा, गुड़, चुकंदर, अनार, सेब, खजूर) के साथ ही विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां (आंवला, नींबू, संतरा, मौसमी, अमरूद, कीवी, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च) के साथ ही प्रोटीन युक्त आहार जैसे मूंग, अरहर, मसूर, उड़द, दूध, दही, छाछ, पनीर, सोया चंक्स, राजमा, चना और बीज (बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, तिल, चिया सीड्स, अलसी, कद्दू के बीज आदि) का सेवन फायदेमंद होता है.
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एक्सपर्ट के अनुसार, आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन सी वाला फल या नींबू जरूर लें, ताकि आयरन अच्छे से सोखा जाए.
आदतें जो एनीमिया को बढ़ा सकती हैं
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चाय-कॉफी भोजन के तुरंत बाद न पिएं, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को रोकती हैं. हर 3-6 महीने में हीमोग्लोबिन जांच करवाएं. गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट लेने चाहिए.