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सिंगल पेरेंटहुड से सेम-सेक्स कपल्स तक: क्यों तेज़ी से बढ़ रहा है स्पर्म डोनेशन का ट्रेंड?
स्पर्म डोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें एक पुरुष अपने स्पर्म किसी बैंक या क्लिनिक को दान करता है. इन स्पर्म का उपयोग उन महिलाओं या कपल्स के लिए किया जाता है जो गर्भधारण करने में असमर्थ हैं.
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हाल के वर्षों में भारत में स्पर्म डोनेशन का चलन तेज़ी से बढ़ा है, और यह अब केवल स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों तक सीमित नहीं रहा है. एक ओर जहाँ बांझपन से जूझ रहे कपल्स के लिए यह एक उम्मीद की किरण है, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ इसे अमीरों की बदलती जीवनशैली और नए पारिवारिक कॉन्सेप्ट से भी जोड़कर देख रहे हैं. यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या यह ट्रेंड समाज की बदलती तस्वीर का हिस्सा है, या केवल एक वर्ग विशेष की नई सोच का नतीजा?
स्पर्म डोनेशन क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों?
स्पर्म डोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें एक पुरुष अपने स्पर्म किसी बैंक या क्लिनिक को दान करता है. इन स्पर्म का उपयोग उन महिलाओं या कपल्स के लिए किया जाता है जो गर्भधारण करने में असमर्थ हैं.
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क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
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स्पर्म डोनेशन के बढ़ते चलन के पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारक काम कर रहे हैं. कुछ लोग इसे अपनी विरासत छोड़ने का तरीका मानते हैं. कुछ लोगों का मकसद सिर्फ दूसरों की मदद करना है. वहीं कुछ लोग ऐसा फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए करते हैं.
क्यों होती है स्पर्म डोनेशन की ज़रूरत?
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पुरुष बांझपन
सिंगल मदर बनने के लिए
सेम-सेक्स कपल्स
जेनेटिक बीमारियों से बचाव
क्या कहता है कानून?
भारत में Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत स्पर्म डोनर की पहचान confidential रखी जाती है. यानी, रिसीवर कपल खुद डोनर को नहीं चुन सकते. वे केवल स्पर्म बैंक से अनजान डोनर के जरिए ही संतान हासिल कर सकते हैं.
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स्पर्म डोनेशन का बढ़ता ट्रेंड केवल एक व्यक्तिगत पसंद या आर्थिक स्थिति का मामला नहीं है, बल्कि यह एक उभरती हुई सामाजिक वास्तविकता है. यह विज्ञान की प्रगति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती इच्छा और परिवार की अवधारणा में आए बदलावों का परिणाम है.