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नई स्टडी का दावा, डार्क चॉकलेट और बेरीज दिमाग की याददाश्त बढ़ाने और तनाव कम करने में करते हैं मदद!

वर्ल्ड वेगन डे 2025 के मौके पर जानिए उन 4 सुपरफूड्स के बारे में जो वीगन डाइट में आयरन की कमी को पूरी तरह दूर कर सकते हैं. ये फूड्स न केवल खून की कमी और एनीमिया से बचाते हैं, बल्कि शरीर को एनर्जी और इम्यूनिटी भी देते हैं.

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क्या आपको लगता है कि चॉकलेट खाना सिर्फ वजन बढ़ाने का काम करता है? या बेरीज महंगी लगती हैं? नई रिसर्च कहती है – एक छोटा टुकड़ा डार्क चॉकलेट या मुट्ठी भर बेरीज आपकी याददाश्त को तेज कर सकती हैं और स्ट्रेस को कम! जापान की शिबौरा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की लेटेस्ट एनिमल स्टडी में फ्लेवानॉल्स नामक कंपाउंड्स को जिम्मेदार ठहराया गया है, जो कोको (डार्क चॉकलेट में) और बेरीज में भरपूर होते हैं. यह स्टडी ब्रेन न्यूरोट्रांसमीटर्स को एक्टिवेट करके मोटिवेशन, अटेंशन और स्ट्रेस रिस्पॉन्स को बैलेंस करती है. 

आइए, जानते हैं इस स्टडी की डिटेल्स और कैसे इसे अपनी डाइट में शामिल करें. 

फ्लेवानॉल्स कैसे काम करते हैं दिमाग पर?

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शिबौरा इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने चूहों पर टेस्ट किया, जहां फ्लेवानॉल्स दिए गए. रिजल्ट्स शॉकिंग थे, फ्लेवानॉल्स सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट करते हैं, जो अटेंशन, अराउजल और मेमोरी को बढ़ाते हैं. साथ ही, न्यूरॉनल डैमेज से बचाते हैं. डॉ. यासुयुकी फुजी ने कहा, “यह स्ट्रेस रिस्पॉन्स एक्सरसाइज जैसा ही है. मॉडरेट फ्लेवानॉल्स इनटेक से हेल्थ और क्वालिटी ऑफ लाइफ सुधरती है. ” स्टडी में पाया गया कि फ्लेवानॉल्स डोपामाइन, लेवोडोपा, नॉरएपिनेफ्रिन और नॉर्मेटानेफ्रिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर्स को बढ़ाते हैं, जो मोटिवेशन और स्ट्रेस को कंट्रोल करते हैं.

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याददाश्त पर असर :

बिहेवियरल टेस्ट्स में फ्लेवानॉल्स वाले चूहों ने ज्यादा मोटर एक्टिविटी, एक्सप्लोरेटरी बिहेवियर दिखाया और लर्निंग-मेमोरी में सुधार हुआ. कंट्रोल ग्रुप से तुलना में ये चूहे ज्यादा स्मार्ट साबित हुए. स्टडी कहती है कि फ्लेवानॉल्स ब्रेन के कई रीजन में न्यूरोट्रांसमीटर एक्टिविटी बढ़ाते हैं. टायरोसिन हाइड्रॉक्सिलेज और डोपामाइन-बीटा-हाइड्रॉक्सिलेज जैसे एंजाइम्स अपरेजुलेट होते हैं, जो नॉरएड्रेनर्जिक सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाते हैं. यह याददाश्त को लॉन्ग-टर्म में बूस्ट कर सकता है.

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तनाव कम करने का राज :

स्टडी में बायोकेमिकल एनालिसिस से पता चला कि फ्लेवानॉल्स से यूरिनरी कैटेकोलामाइन्स लेवल बढ़ा, लेकिन यह पॉजिटिव स्ट्रेस रिस्पॉन्स था. हाइपोथैलेमिक पैरवेंट्रिकुलर न्यूक्लियस (PVN), स रेगुलेशन का सेंट्रल ब्रेन एरिया – ज्यादा एक्टिव हो गया. डॉ. फुजी के मुताबिक, यह एक्सरसाइज जैसा इफेक्ट देता है, जो क्रॉनिक स्ट्रेस को कम करता है.  
रिजल्ट: कम स्ट्रेस, बेहतर मूड और फोकस.

कौन सा बेहतर, और कितना खाएं?

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डार्क चॉकलेट में फ्लेवानॉल्स सबसे ज्यादा, लेकिन बेरीज भी रिच सोर्स हैं. स्टडी सजेस्ट करती है – रोज 20-30 ग्राम डार्क चॉकलेट या एक कप बेरीज. बायोएवेलेबिलिटी कम होने के बावजूद, मॉडरेट इनटेक से फायदा. पुरानी स्टडीज  भी डार्क चॉकलेट को ब्रेन वेव्स चेंज करने और गामा वेव्स बढ़ाने का क्रेडिट देती हैं, जो मेमोरी और स्ट्रेस रिडक्शन में मदद करती हैं.  

डाइट में कैसे शामिल करें?

ज्यादा चॉकलेट से कैलोरी बढ़ सकती है, इसलिए 70% कोको वाली चुनें. बेरीज फ्रेश या फ्रोजन यूज करें. विटामिन C रिच फूड्स (जैसे नींबू) के साथ खाएं – एब्जॉर्प्शन बढ़ेगा. प्रेग्नेंट या डायबिटीज वाले डॉक्टर से पूछें.  
टिप: ब्रेकफास्ट में बेरी स्मूदी या इवनिंग स्नैक में डार्क चॉकलेट – रोजाना ट्राई करें.

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ब्रेन हेल्थ के लिए नेचुरल बूस्टर अपनाएं

यह नई स्टडी बताती है कि डार्क चॉकलेट और बेरीज न सिर्फ टेस्टी हैं, बल्कि ब्रेन के लिए सुपरफूड. एक्सरसाइज की तरह स्ट्रेस मैनेजमेंट और मेमोरी बूस्ट – सब इनमें! अगर आप स्ट्रेस्ड फील करते हैं या मेमोरी वीक लगती है, तो आज से शुरू करें. आपका फेवरेट कौन सा, चॉकलेट या बेरीज? कमेंट में बताएं.

 

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