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क्या पीरियड्स के दौरान आपको भी इन कामों में लगाई जाती है रोक - टोक, जानिए कितनी है सच्चाई ?

इस सदी में भी भारत के कई राज्यों में पीरियड्स को लेकर कई अन्धविश्वास फैला हुआ है, इस दौरान महिलाओं को कई चीजों को करने से रोका जाता है, महिलाओं को अपवित्र समझा जाता है जबकि इसकी हकीकत कुछ और है।

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भारत में आज भी लड़कियों को महिलाओं को समझाया जाता है सिखाया जाता है कि पीरियड्स के दौरान किन चीजों को नहीं करना है और पीरियड्स को लेकर कई राज्यों में समाज में इस दशक में भी कई मिथक और धारणाएँ हैं। खासकर के ग्रामीण क्षेत्रों और पारंपरिक परिवारों में ज्यादातर ये देखा जाता है कि, महिलाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाया जाता रहा है कि पीरियड्स के दौरान किन चीजों से दूर रहना है। चलिए जानते हैं पीरियड्स को लेकर जो मिथक समाज की परंपरा बन गई हैं उसमें कितनी सच्चाई है। 

1. क्या पीरियड्स में आचार छूने से आचार खराब हो जाता है -

पीरियड्स के दौरान के सबसे बड़ा मिथक है कि पीरियड्स के समय आचार छूने और खाने से वो ख़राब हो जाता है, और ये बात ना सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में बल्कि शहरों में भी लड़कियों को बताई जाती है, लोगों का मानना है कि पीरियड्स के दौरान महिला अपवित्र होती है और अगर वह किसी खाने की चीज़ को, विशेषकर आचार को, छुएगी तो वह सड़ जाएगा। लेकिन असल बात ये है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं होता,इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।बल्कि आचार खराब होने का असली कारण ये है कि आचार में नमी हो अगर जाती है, उसे सही तरीके से बंद नहीं किया जाए, या वह पूरी तरह तेल में न डूबा हो, तो आचार खराब हो सकता है। और पीरियड्स के दौरान किसी महिला का आचार छूने से उस पर कोई भी फर्क नहीं पड़ता, यह केवल एक अंधविश्वास है।

2. क्या पीरियड्स के दौरान बाल नहीं धोना चाहिए -

पीरियड्स के दौरान अक्सर ये कहा जाता है कि बाल नहीं धोने चाहिए, इससे आपके ब्लड सर्कुलेशन में प्रभाव पड़ता है, जबकि ये एक बड़ा मिथक है। जबकि बाल धोने से ब्लड सर्कुलेशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि पीरियड्स के दौरान जब महिला अस्वस्थ महसूस करती है, तब नहाना या बाल धोना उसे तरोताजा महसूस करवाता है।और हाइजीन मेंटेन करता है, महिलाएं बिना किसी चिंता के अपने बाल धो सकती हैं इसका कोई भी ब्लड सर्कुलेशन से लेना - देना नहीं है  ।

3. क्या पीरियड्स में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए -

अक्सर पीरियड्स के दौरान महिलाओं को एक्सरसाइज करने से, दौड़ने से और अन्य फिजिकल एक्टिविटी करने से मना किया जाता है, कई बार यह भी कहा जाता है कि पीरियड्स के दौरान शरीर कमजोर होता है और इसलिए महिला को सिर्फ आराम करना चाहिए, खासकर एक्सरसाइज से बचना चाहिए, लेकिन यह भी एक मिथक है।जबकि पीरियड्स के दौरान महिलाएं फिजिकल एक्टिविटी कर सकती है, महिलाएं हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, स्ट्रेचिंग, या योगा पीरियड्स के दौरान पीरियड्स क्रैम्प्स को कम कर सकती है।कहा जाता है एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडॉरफिन्स हार्मोन यानि कि खुशी देने वाले हार्मोन का स्राव होता है, जो पैरोड्स के दौरान दर्द को कम करने में मदद करता है और ये बिलकुल सुरक्षित और फायदेमंद है।

4.  क्या पीरियड्स के दौरान रसोई में नहीं जाना चाहिए -

पीरियड्स के समय आज भी समाज में लड़कियों को किचन में जाने से रोका जाता है, उन्हें किसी निर्धारतीक जगह पर जाने की ही अनुमति होती है, यह धारणा अब तक  समाज में फैली हुई है।माना जाता है कि पीरियड्स में महिला अशुद्ध होती है, और इसलिएउन्हें रसोई में नहीं जाना चाहिए। जबकि पीरियड्स का खाना पकाने या किचन में जाने से कोई संबंध नहीं है, अगर आप साफ़ - सफाई का ध्यान रखते हैं तो पीरियड्स में रसोई में जाना या खाना पकाना पूरी तरह से सुरक्षित है। रसोई का कोई हिस्सा महिलाओं के पीरियड्स के कारण अपवित्र नहीं होता है ।

5. क्या पीरियड्स में सामाजिक दूरी बनाए रखना चाहिए -

कई जगहों पर आज भी यह कहा जाता है कि पीरियड्स के दौरान महिला को अलग कमरे में सोना चाहिए, या किसी सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। लेकिन ये गलत है जबकि यह मान्यताएँ समाज द्वारा ही बनाई गई हैं। पीरियड्स एक नेचुरल प्रक्रिया है, जो हर महिला के जीवन का हिस्सा है। इसका किसी की पवित्रता या अशुद्धता से कोई लेना-देना नहीं है। पुराने समय में महिलाओं को रेस्ट देने के लिए ये चीजें बनाई गई थी लेकिन अब इसको एक अलग रूप और मान्यता दे दी गई है। 

6. पीरियड्स के दौरान मंदिर नहीं जाना चाहिए -

पीरियड्स के दौरान  महिलाओं को मंदिर जाने, पूजा - पथ करने से सख्त मना किया जाता है, उन्हें इन सब से दूर रखा जाता है, जबकि यह एक और पुरानी मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिला को मंदिर नहीं जाना चाहिए, पूजा नहीं करनी चाहिए, या धार्मिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। जबकि पीरियड्स का धार्मिक कार्यों या पूजा से कोई संबंध नहीं है, यह केवल समाज में पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं का हिस्सा है।
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