Advertisement

Loading Ad...

दिल की सेहत के लिए जरूरी है एंजियोग्राफी, जानिए क्या है यह टेस्ट और इसकी सावधानियां

दिल की बीमारियों का समय पर पता लगाना बेहद जरूरी है. आजकल डॉक्टर अक्सर एंजियोग्राफी की सलाह देते हैं, लेकिन कई लोग इस टेस्ट के बारे में नहीं जानते कि यह क्या है, कैसे होती है, और इसके बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.

Loading Ad...

हमारा दिल लगातार काम करता रहता है. यह हमारे पूरे शरीर में खून पंप करता है और हमें जिंदा रखता है. जब दिल ठीक से काम करता है, तो हम स्वस्थ महसूस करते हैं, लेकिन अगर इसमें कोई परेशानी आ जाए, तो यह सीधे हमारे पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए दिल की बीमारियों का समय पर पता लगाना बेहद जरूरी है. आजकल डॉक्टर अक्सर एंजियोग्राफी की सलाह देते हैं, लेकिन कई लोग इस टेस्ट के बारे में नहीं जानते कि यह क्या है, कैसे होती है, और इसके बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए. 

क्या है एंजियोग्राफी टेस्ट?

एंजियोग्राफी एक टेस्ट है जो हमें बताता है कि हमारे शरीर की नसें और धमनियां कितनी ठीक हैं. अगर दिल, दिमाग या हाथ-पैर की नसों में कोई ब्लॉकेज हो रही हो, तो यह टेस्ट उसे पकड़ने में मदद करता है. जब किसी को सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या बेचैनी महसूस होती है, डॉक्टर अक्सर यही टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. एंजियोग्राफी यह देखने का सरल तरीका है कि खून शरीर में सही तरीके से बह रहा है या नहीं. 

Loading Ad...

एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या फर्क है 

Loading Ad...

एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी अक्सर एक साथ सुने जाते हैं, लेकिन दोनों अलग चीजें हैं. एंजियोग्राफी सिर्फ एक जांच है, जो यह बताती है कि नसों या आर्टरी में कोई रुकावट है या नहीं, जबकि एंजियोप्लास्टी उस रुकावट को दूर करने का तरीका है, यानी पहले पता लगाया जाता है कि समस्या कहां है, और फिर जरूरत पड़ने पर उसका इलाज किया जाता है. 

कैसे होता है ये टेस्ट?

Loading Ad...

इस टेस्ट में सबसे पहले डॉक्टर जिस हिस्से की नसों की जांच करना चाहते हैं, वहां एक छोटी ट्यूब, जिसे कैथेटर कहते हैं, घुसाई जाती है. यह ट्यूब पैर या हाथ में डाली जाती है. इसके जरिए एक खास तरह का रंगीन द्रव्य (डाई) नसों में भेजा जाता है. जब यह द्रव्य नसों में चलता है, एक्स-रे मशीन उसके रास्ते को कैप्चर कर लेती है. इससे डॉक्टर साफ देख सकते हैं कि खून सही तरह से बह रहा है या कहीं कोई ब्लॉकेज है. यह प्रक्रिया लगभग एक घंटे की होती है, और इसके बाद मरीज को आराम करना पड़ता है. टेस्ट खत्म होने के बाद कैथेटर हटा दिया जाता है और जिस जगह से डाला गया था, उसे बंद कर दिया जाता है. 

टेस्ट के बाद बरतें ये सावधानियां

अगर एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज पाया जाता है, तो अक्सर एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाना पड़ता है. इसके बाद मरीज को कुछ खास सावधानियां बरतनी होती हैं, जैसे कि भारी वजन उठाने से बचना, शराब और धूम्रपान से दूर रहना, दवाइयां नियमित लेना, और अपने खान-पान में सुधार करना. हल्की एक्सरसाइज करना, फल-सब्जियों और हेल्दी तेल का सेवन करना, और नमक और चीनी कम करना भी जरूरी है. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...