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‘क्या आधी रात को लिखते हैं ऐसी याचिकाएं...' आखिर वकील ने ऐसी कौन सी पिटीशन डाली कि भड़क गए CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 5 फिजूल सी याचिकाओं को खारिज कर दिया. इस दौरान उन्होंने वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए पू

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कोर्ट के सामने कभी-कभी ऐसे केस आते हैं कि जज साहब भी माथा पकड़ लेते हैं. कई याचिकाएं तो ऐसी होती हैं जो चीफ जस्टिस का पारा भी हाई कर देती हैं. सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा ही हुआ, जब CJI ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान वकीलों को जमकर फटकार लगा दी. 

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 5 फिजूल सी याचिकाओं को खारिज करते हुए वकीलों से पूछा, ‘क्या ये याचिकाएं आधी रात को लिखी थीं.’ दरअसल ये पांचों याचिकाएं एक ही वकील ने फाइल की थी. इनमें से एक प्याज-लहसुन से जुड़ी थी. 

क्या थी याचिका, जिस पर भड़क गए CJI? 

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दरअसल, वकील सचिन गुप्ता ने प्याज-लहसुन की स्टडी को लेकर एक याचिका दायर की थी. जिसमें 'तामसिक' (नकारात्मक) ऊर्जा की मौजूदगी पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की गई थी. वकील की इस मांग पर CJI सूर्यकांत भड़क गए. 

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उन्होंने सचिन गुप्ता को फटकार लगाते हुए जनहित याचिकाओं को अस्पष्ट, फालतू और निराधार बताया. उन्होंने इतनी सारी याचिकाएं एक साथ लगाने पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि क्या आप आधी रात को ये सब याचिकाएं लिखते हो?

दरअसल, याचिका में 'तामसिक' या नकारात्मक तत्वों की पहचान करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. इसके लिए जैन समुदाय की खान-पान की प्रथाओं का हवाला दिया गया था. जो पारंपरिक रूप से प्याज, लहसुन से परहेज करते हैं और तामसिक मानते हैं. 

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इस पर CJI ने वकील सचिन गुप्ता से पूछा, ‘आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचाना चाहते हैं.’ इस पर याचिकाकर्ता ने जवाब देते हुए एक तलाक केस का हवाला दिया. सचिन गुप्ता ने कहा, यह एक आम मुद्दा है और दावा किया कि गुजरात में खाने में प्याज के इस्तेमाल को लेकर कथित तौर पर तलाक हो गया था. वकील के जवाब से CJI सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, अगली बार जब आप इस तरह की फालतू याचिका लेकर आएंगे तो आप देखेंगे कि हम क्या करेंगे. 

अन्य चार याचिकाओं को भी किया खारिज

चीफ जस्टिस वाली बेंच ने सचिन गुप्ता की ओर से फाइल अन्य चार जनहित याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. जो शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से हानिकारक तत्वों को रेगुलेट करने के निर्देश, संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को सुनिश्चित करने के निर्देश, शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा पर दिशानिर्देश से जुड़ीं थीं. 

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यह भी पढ़ें- ‘आपको लाइसेंस किसने दिया’ PM मोदी और गृह मंत्री पर वकील ने की FIR की मांग, CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार

बेंच ने कहा कि याचिकाओं में की गई मांग स्पष्ट नहीं है. न ही उनका कोई उचित कानूनी आधार है. कोर्ट ने इन्हें बिना सोचे-समझे की गई कार्रवाई का उदाहरण माना है. कोर्ट ने याचिकाओं के कंटेट पर भी सवाल उठाए. बेंच ने कहा, याचिकाओं में खराब लेखन शैली झलकती है. याचिकाकर्ता वकील न होता तो वह उस पर भारी जुर्माना लगाते.

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