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पति नहीं उसके स्पर्म से बच्चा चाहती है महिला, मुस्लिम पर्सनल लॉ बना अड़चन! हाई कोर्ट में आया अजीबोगरीब मामला

मुंबई की एक महिला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची. महिला ने कोर्ट में बताया कि वह अपने पति के साथ बनाए गए 16 फ्रीज्ड भ्रूण के इस्तेमाल से मां बनना चाहती है. जिसमें पति की असहमति और पर्सनल लॉ बाधा बन रहा है.

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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. मुंबई के एक कपल के बीच अनबन और फिर महिला की अजीब मांग ने जज को भी हैरान कर दिया. कोर्ट में एक 46 साल की महिला ने अपने पति से बच्चे की मांग की, लेकिन महिला वह बच्चा नेचुरल तरीके से नहीं बल्कि फ्रीज्ड भ्रूण (Embryo Freezing) से चाहती है. 

दरअसल, मुंबई की एक महिला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची. महिला ने कोर्ट में बताया कि वह अपने पति के साथ बनाए गए 16 फ्रीज्ड भ्रूण के इस्तेमाल से मां बनना चाहती है. ये उसका हक है, लेकिन पति इसकी इजाजत नहीं देता. दोनों के बीच कई साल से अनबन है. जिसके बाद महिला ने कोर्ट का रुख किया है. 

क्या है ये पूरा मामला? 

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जानकारी के मुताबिक, मुंबई के एक दंपत्ति की शादी साल 2021 में हुई थी. दोनों ने IVF के जरिए साल 2022 में एग्स फ्रीज करवाते हुए 16 भ्रूण तैयार करवाए थे. इसके बाद साल 2023 में दोनों के बीच रिश्ते में खटास आने लगी. दोनों अलग रहने लगे, हालांकि महिला मां बनना चाहती थी और इसके लिए उसने फ्रीज करवाए गए भ्रूण का इस्तेमाल करने की इच्छा जताई. 

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यह मामला दक्षिण मुंबई के एक दंपती से जुड़ा है, जिन्होंने 2021 में शादी की थी. इसके बाद 2022 में दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया के तहत पति के स्पर्म और पत्नी के अंडाणु से 16 भ्रूण तैयार कर उन्हें एक फर्टिलिटी क्लिनिक में फ्रीज करवा दिया था. हालांकि 2023 में दोनों के रिश्ते खराब हो गए और वे अलग रहने लगे. इसके बाद इन भ्रूणों के इस्तेमाल को लेकर विवाद शुरू हो गया.

सरोगेसी बोर्ड ने खारिज की मांग 

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46 साल की उम्र में महिला मां बनना चाहती है, लेकिन भ्रूण के इस्तेमाल पर पति की नामंजुरी और कानूनी अड़चने मातृत्व के आड़े आ रही थीं. महिला ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि बाद में इसे वापस लेकर राष्ट्रीय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी बोर्ड के पास पहुंची, लेकिन बोर्ड ने इसी साल फरवरी में महिला की याचिका को खारिज कर दिया. इसके बाद महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी बना अड़चन 

कोर्ट में महिला ने बताया कि उसके सामने बड़ी समस्या धार्मिक कानून की भी है. पति ने फ्रीज्ड भ्रूण के इस्तेमाल से इंकार कर दिया तो दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत IVF जैसी प्रक्रिया सिर्फ वैध शादी में ही मान्य होती है. ऐसे में वह तलाक लेती है तो मां बनने में उसे और दिक्कत आ सकती है. 

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महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि उसे फ्रीज्ड भ्रूण का इस्तेमाल कर मां बनने की इजाजत पति की रजामंदी के बिना दी जाए. महिला ने कहा, उसे पति की सहमति के बिना एम्ब्रियो को दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर करने और उन्हें अपने गर्भ में प्रत्यारोपित कराने की मंजूरी मिले. 

महिला ने कोर्ट में यह भी मांग कि है कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट की कुछ धाराओं की व्याख्या बदली जाए या फिर राष्ट्रीय एआरटी बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसे मामलों के लिए कानून में संशोधन की सिफारिश करे. क्योंकि वह अपने फ्रीज्ड भ्रूण को एक क्लिनिक से दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर कराकर गर्भधारण करना चाहती है, लेकिन ART एक्ट, 2021 के तहत भ्रूण के इस्तेमाल या ट्रांसफर के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी होती है. 

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महिला का आरोप है कि उसका पति जानबूझकर सहमति नहीं दे रहा और इस तरह वह उसके मातृत्व के अधिकार को रोक रहा है. वह 46 साल की हो गई हैं मां बनने के लिए उनके पास बेहद कम समय बचा है. महिला की मांग पर दिल्ली हाईकोर्च इस मामले में जल्द सुनवाई कर सकता है. 

पति पर क्या आरोप लगाए? 

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महिला का कहना है कि पति ने उसके साथ बदसलूकी की और उसे छोड़ दिया. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति पर पहले से आपराधिक और विवाह से जुड़े मामलों के तहत केस दर्ज हैं. महिला ने यह भी बताया कि उसका पति पिछली शादी से हुए एक बच्चे का पिता भी है, लेकिन उसे भ्रूण के इस्तेमाल कर मां बनने से रोक रहा है. महिला ने अपनी गुहार में कहा कि उनका मां बनने का सपना उनके अकेलेपन और खालीपन को दूर करने से भी जुड़ा है. अब देखना होगा कोर्ट इस मामले में क्या रुख अख्तियार करता है. 

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