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भारत के ख़िलाफ़ साज़िश करने वाले यूनुस का मुंह बंद, बांग्लादेश को तोड़ना का भी है प्लान !
भारत के लिए यही खतरा है, जिसके कारण पूर्वोत्तर के नेता बांग्लादेश को तोड़ने और चटगांव को भारत में मिलाने की बात कर रहे हैं। त्रिपुरा की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत माणिक्य ने तो इसकी सीधी अपील कर डाली
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चीन जाकर ख़ैरात पाने की उम्मीद में बांग्लादेश के कट्टरपंथियों के इशारों पर काम करने वाले मोहम्मद यूनुस को सबक़ मिलने की अब पूरी उम्मीद है। बांग्लादेश में रहकर और चीन जाकर वहां से भारत के खिलाफ जगह उगलने वाले यूनुस ने जब थाइलैंड में मोदी से मुलाक़ात की तो तो वो भाव भी नहीं मिला। शेख़ हसीना का मुद्दा उठाकर हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के बारे में सुन लिया वो अलग अब पीएम मोदी के सामने आंख भी ना मिला पाने वाले यूनुस ने चीन में जाकर जो हिमाक़त की थी। वो अब उनपर ही भारी पड़ने वाले है क्योंकि भारत बांग्लादेश को ऐसा सबक़ सिखाएगा कि वो हमेशा याद रखे। अब यूनुस ने जैसे चीन जाकर भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को अलग करने के लिए चीन को न्योता दिया। और कहा भारत के ये हिस्सा लैंड लॉक्ड हैं और वो समुद्र का राजा है। यानी भारत के ये राज्य समंदर तक नहीं पहुंच सकते इसलिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर से इस तोड़ा जा सकता है।अब यूनुस के ये मंसूबे भारत के लिए कितने ख़तरनाक है ये पता चलता है। और ये भी की अगर जल्द ही यूनुस को सबक़ नहीं सिखाया गया तो वो भारत के खिलाफ और क्या साज़िश रच सकते हैं। भारत को अब इस गंभीरता ये विचार करते हुए तगड़ा ऐक्शन लेना होगा।और इसके लिए एक मांग के साथ सुझाव दे दिया गया है। जिसके लिए पूर्वोत्तर के एक बड़े नेता ने बांग्लादेश को तोड़ने और चटगांव को भारत में मिलाने की बात कह दी है। त्रिपुरा की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत माणिक्य जो पूर्व शाही परिवार से भी आते है उन्होंने तो कुछ ही देर में बांग्लादेश को तोड़ने का प्लान बताया दिया।प्रद्योत माणिक्य ने कहा
"इंजीनियरिंग के नए और चुनौतीपूर्ण विचारों पर अरबों डॉलर खर्च करने के बजाय हम बांग्लादेश को तोड़कर समुद्र तक अपनी पहुंच बना सकते हैं। चटगांव के पहाड़ी इलाकों में हमेशा से ही स्थानीय जनजातियां निवास करती रही हैं, जो 1947 से ही भारत का हिस्सा बनना चाहती थीं। बांग्लादेश में लाखों की संख्या में त्रिपुरी, गारो, खासी और चकमा लोग अपनी पारंपरिक भूमि पर भयानक परिस्थितियों में रहते हैं। इसका उपयोग हमारे राष्ट्रीय हित और उनकी भलाई के लिए किया जाना चाहिए"
उनका मतलब था कि चटगांव के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग हमेशा से ही त्रिपुरा में शामिल होना चाहते हैं। ये लोग बांग्लादेश से नफ़रत और भारत से प्यार करते हैं ऐसे बांग्लादेश की इस कमज़ेरी का फ़ायदा उठाकर चिटगांव के पूरे इलाक़े को भारत में शामिल करा लेना चाहिए तभी बांग्लादेश की अक्ल ठिकाने लगाई जा सकती है। इससे पहले भी असम के फायर ब्रांड सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भारत के इस चिकन नेक कॉरिडोर के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया था। सीएम हिमंत ने मोहम्मद यूनुस की इस टिप्पणी को सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अतिनिंदनीय और आक्रामक करार दिया था। और कहा था।
"बांग्लादेश की तथाकथित अंतरिम सरकार के मोहम्मद यूनुस का बयान, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के सेवन सिस्टर स्टेट को घिरा हुआ बताया गया है और बांग्लादेश को उनके संरक्षक के रूप में पेश किया गया है, आक्रामक और बेहद निंदनीय है। पूर्वोत्तर को महत्वपूर्ण मार्ग से काटने का खतरनाक सुझाव दिया है। इसलिए, चिकन नेक कॉरिडोर के नीचे और आसपास अधिक मजबूत रेलवे और सड़क नेटवर्क विकसित करना जरूरी है। चिकन नेक को प्रभावी ढंग से दरकिनार करते हुए पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि भारत से जोड़ने वाले वैकल्पिक सड़क मार्गों की खोज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब मोदी से मुलाकात कर यूनुस को जो लताड़ लगी है और इस बीच इस सुझाव ने बांग्लादेश को हिला कर रख दिया है। यूनुस को ये नहीं भूलना चाहिए की वो जिस भारत से पंगा ले रहा है वो दुनिया में नई महाशक्ति बनकर उभर रहा है।
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