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सेना और सरकार ने किया ऐसा काम, चीन ने भी पकड़ लिया माथा !

सरकार ने सीमाई इलाकों में कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए लद्दाख के कई रिमोट इलाकों को 4G नेटवर्क से जोड़ दिया है. इनमें गलवान और डेमचोक जैसे इलाके भी शामिल हैं, जो चीन के साथ लगती LAC की सीमा के पास है.

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भारत के साथ चीन के सीमा विवाद के बीच भारत लगातार अपनी डिप्लोमेसी से चीन पर भारी पड़ता नज़र आ रहा है। 2020 में गलवान घाटी में जो हुआ वो कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन उसके बाद भारत ने किस तरीक़े से अपनी बातचीत के बल पर पूरे मुद्दे को सुलझाया और चीन को अपने क़ाबू में कर समझौते को मानने पर मजबूर किया वो काबीले तारीफ है। चीन जिस तरीक़े से अपने इलाक़े में इन्फ़्रास्ट्रक्चर बना रहा है। उसी कड़ी में अब भारत भी अपनी मज़बूती LAC के पास दिखाने लगा है।सरकार ने सीमाई इलाकों में कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए लद्दाख के कई रिमोट इलाकों को 4G नेटवर्क से जोड़ दिया है। इनमें गलवान और डेमचोक जैसे इलाके भी शामिल हैं, जो चीन के साथ लगती LAC की सीमा के पास है। DIGITAL क्रांति से पूरे भारत को एक साथ जोड़ने वाली भारत सरकार ने इन इलाक़ों में भी दूर दराज़ के गाँवों को भी बड़ी सुविधा दी है। ये इलाक़े जो लंबे वक़्त से पीछे थे उन्हें अब भारतीय सेना ने एयरटेल के साथ मिलकर नई पहचान दी है।

ऐसे रिमोट इलाकों में 4G कनेक्टिविटी पहुंचने से वहां रहने वाले लोगों और सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को कई फायदे होंगे। सरकारी सेवाओं का लाभ जल्द और और बेहतर तरीक़े से लोगों को मिल पाएगा। वहीं यहाँ रहने वाले लोगों के लिए पूरे देश से जुड़ना और आसान होगा।और ऑनलाइन एजुकेशन में नए मौके बनेंगे। पिछले 4 सालों में सरकार और सेना ने सीधे तौर पर इन इलाक़ों में तमाम सुविधाओं को लोगों से जोड़ने के लिए खूब खर्च किया है। इन इलाक़ों के कारगिल, सियाचिन, दौलत बेग ओल्डी, गलवान और डेमचोक की जगहों पर 42 4G टॉवर लगाए हैं। अब इससे ये साफ़ होता है कि भारतीय सरकार ने जिस मज़बूती से अपनी बात चीन से हुए टकराव पर रखी उसी तरह इन इलाक़े में 2020 से इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देते हुए विकास किया है। वहीं इस पहल के बाद पर्यटन की संभावनाओं को भी बल मिलेगा जिससे सीधे तौर पर चीन पर ही दबाव बनेगा।

अब चीन जो बड़ी चालबाज़ी से ये सोच रहा था कि वो कुछ भी करेगा और भारत चुप बैठा रहेगा। उसकी मनमानी चलेगी और भारत कुछ कर नहीं पाएगा। भारतीय सेना जवाब नहीं देगी। लेकिन चीन की इस ग़लतफ़हमी को पहले 2020 में भारतीय सेना के जवानों ने दूर किया और उसके बाद से गोली की जगह बोली और शानदार कूटनीति से भारत सरकार दूर कर रही है। ड्रैगन को उसकी औक़ात में रखना भारत के तीनों चाणक्य कहे जाने वाले पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, और NSA अजीत डोभाल को आता है। और उन्होंने मिलकर ये करके भी दिखाया। मोदी सरकार के विजन 2047 के साथ पूरे देश को जोड़ने के लिए हो रहे कामों में एक काम ये भी है।
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