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Putin भारत और मोदी के हुए मुरीद, टेंशन में अमेरिका !

पुतिन ने एक बार फिर भारत और मोदी की जमकर तारीफ़ की है..साथ ही भारत के मेक इन इंडिया की भी भरपूर सरहाना की…जिसे सुनने के बाद अमेरिका को तगड़ा झटका लगने वाला है..

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रूस और भारत की दोस्ती के कई क़िस्से हैं। मोदी से जब भी पुतिन मिलते हैं, बड़े ही गर्मजोशी से दोनों के बीच मुलाक़ात होती है। दोनों के बीच भले ही भाषा का अंतर हो, लेकिन दोनों में से किसी को भी एक दूसरे की बातों को समझने के लिए ट्रांसलेटर की ज़रूरत नहीं पड़ती। इस बात को ख़ुद राष्ट्रपति पुतिन ने माना भी था, जब पीएम मोदी BRICS सम्मेलन के लिए दो दिन के दौरे पर रूस के कजान शहर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई थी। तब पीएम मोदी हिंदी और पुतिन रूसी भाषा में बोल रहे थे। दोनों नेताओं की बातों को रूसी और हिंदी में ट्रांसलेट करने के लिए ट्रांसलेटर मौजूद थे, लेकिन पुतिन ने कहा कि 'भारत और रूस के संबंध इतने प्रगाढ़ हैं कि मुझे लगता है आप मेरी बातें बिना ट्रांसलेटर की मदद के भी समझ सकते हैं।' पुतिन की इस टिप्पणी पर पीएम मोदी खिलखिला उठे थे। और भी कई मौक़ों पर पुतिन और मोदी की ख़ास दोस्ती देखने को मिलती रही है। लेकिन अब एक बार फिर राष्ट्रपति पुतिन भारत और मोदी के कितने मुरीद हो चुके हैं, यह देखने को मिल रहा है। पुतिन ने एक बार फिर भारत और मोदी की जमकर तारीफ़ की है, साथ ही भारत के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की भी भरपूर सराहना की, जिसे सुनने के बाद अमेरिका को तगड़ा झटका लगने वाला है।

मॉस्को में एक इन्वेस्टमेंट फोरम में बोलते हुए पुतिन ने भारत के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की तुलना रूस के इम्पोर्ट सब्स्टिट्यूट प्रोग्राम से की और कहा:

"प्रधानमंत्री मोदी के पास मेक इन इंडिया नाम का ऐसा ही कार्यक्रम है। हम भी भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तैयार हैं। भारत के प्रधानमंत्री और सरकार स्थिर स्थितियां बना रहे हैं, और ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय लीडरशिप 'इंडिया फर्स्ट' की नीति पर चल रही है। हमारा मानना ​​है कि भारत में निवेश करना फायदेमंद है।"

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इस कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने रूस और भारत के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के बीच समानताएं बताईं और भारत में निवेश को भी लाभकारी बताया। अब पुतिन ये जानते हैं कि कैसे रूस और यूक्रेन की जंग के दौरान भारत भले ही खुलकर रूस के समर्थन में न हो, लेकिन भारत ने कभी अपनी दोस्ती ख़राब नहीं होने दी। पश्चिमी देशों के इतने दबाव के बावजूद भी भारत ने रूस से तेल ख़रीदना जारी रखा। पश्चिमी देशों ने भारत पर खूब कोशिश की कि रूस को अकेला छोड़ दिया जाए, ताकि अमेरिका ने जो यूक्रेन का साथ दिया है, वह सफल हो। अब इस कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि रूस के ब्रांड अब तेज़ी से उन पश्चिमी कंपनियों की जगह ले रहे हैं जिन्होंने अपनी मर्ज़ी से बाज़ार छोड़ दिया। पुतिन के इस बयान से साफ़ है कि भारत दुनियाभर में एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभर रहा है। और यही वजह है कि रूस अब भारत को निवेश के लिए चुन रहा है। अब अगर भारत के बाज़ार में रूस, अमेरिका के सामानों को पीछे छोड़ देता है, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा।

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वहीं इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि रूस BRICS के साथियों के साथ किस मजबूती से खड़ा है। BRICS सम्मेलन में भी रूस, भारत और चीन की मज़बूत तस्वीर देखने को मिली थी, जिससे यह साफ़ हो गया था कि जो लोग यह सोचते हैं कि दुनिया पश्चिम से कंट्रोल होती है, उनका यह नजरिया जल्द ही बदलने वाला है।


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