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पाकिस्तान की बढ़ गई टेंशन, मोदी-ट्रंप ने मिलकर बजाया बैंड !

मोदी-ट्रंप के साझा बयान में विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान का नाम साफ तौर पर आतंकवाद से जोड़ कर लिखा गया. बयान में लिखा गया है…जिसमें पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि उसकी सरज़मीं का उपयोग सीमा पार आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए न किया जाए…

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जब दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली दोस्त मिल रहे थे। तो दुनिया का एक मुल्क ऐसा भी था जहां भूचाल आया हुआ था।दोनों दोस्तों के साथ बिताए एक एक पल इस मुल्क की टेंशन बन रहे थे। हाल तो ये था कि इस देश में हुकूमत का रात काटना मुश्किल हो रहा था। समझ तो आप गए ही होंगे। हम बात कर रहे हैं इन दिनों रोटी को भी मोहताज पाकिस्तान की। प्रधानमंत्री मोदी के WHITE HOUSE में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बिताए करीब साढ़े तीन घंटे पाकिस्तान के सीने में तीर की तरह चुभ रहे थे।इतने समय में पाकिस्तान की दुनिया पूरी तरह हिल चुकी थी। जबतक मोदी ट्रंप के साथ रहे।पाकिस्तान में भूचाल था..एक के बाद एक भूकंप के झटके पे झटके ही मिल रहे थे। लेकिन सबसे बड़ा झटका ये था जब पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय की तरफ से दोनों देशों का संयुक्त बयान जारी किया गया। इस बयान में पाकिस्तान का नाम साफ तौर पर आतंकवाद से जोड़ कर लिखा गया। और सीधे और साफ शब्दों में पाकिस्तान को समझा दिया गया।बयान में लिखा गया।दोनों नेताओं (मोदी और ट्रंप) ने पाकिस्तान से 26/11 मुंबई और पठानकोट हमले के अपराधियों को जल्द से जल्द सजा देने के लिए कहापाकिस्तान को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि उसकी सरज़मीं का उपयोग सीमा पार आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए न किया जाए

पाकिस्तान सोच तो रहा था अमेरिका की पिछली सरकार के जैसे ट्रंप सरकार भी उसके लिए ख़ैरात पहुंचाती रहेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मोदी ने उसके सारे सपनों पर पानी फेर दिया। अब पाकिस्तान को झटके लग रहे थे तो पाकिस्तान का बिलबिलाना लाज़मी था। इस्लामाबाद में रो रो कर दहाड़े मारना शुरु हो चुका था।पाकिस्तान पूरी तरह हिल चुका था। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्‍तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा, हम 13 फरवरी को पाकिस्‍तान के संदर्भ में दिए गए भारत-अमेरिका संयुक्त बयान को एकतरफा, भ्रामक और डिप्‍लामेटिक स्‍टैंडर्ड के विपरीत मानते हैं।हमें आश्चर्य है कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी सहयोग के बावजूद साझा बयान में यह संदर्भ जोड़ा गया है



अब सिर्फ़ यही नहीं पाकिस्तान को इसके अलावा और भी बहुत कुछ अखर गया है। पाकिस्तान को इससे भी ज़्यादा चिंता ट्रंप की तरफ़ से की गई उस पेशकश की है जिसमें ट्रंप ने मोदी से अपने सबसे ख़तरनाक और उन्नत FIGHTER JET F-35 की कर दी है। दरअसल, पाकिस्तान के पास अमेरिकी F-16 है जिसके पुर्ज़ों के लिए भी पाकिस्तान को अमेरिका के सामने बार बार हाथ फैलाना पड़ता है। वहीं अमेरिका के सबसे लेटेस्ट F-35 को भारत को बेचने के लिए जब ट्रंप ने खुलेआम कहा तो पाकिस्तान की हुकूमत के पसीने ही छूट गए।कश्मीर के मुद्दे पर बौखलाने वाला पाकिस्तान ने भारत के बढ़ते सैन्य खर्च को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भारत 2008 से अब तक 20 अरब डॉलर से ज़्यादा के अमेरिकी रक्षा उत्पाद खरीद चुका पिछले साल भारत ने 6 सालों की चर्चा के बाद 31 MQ-9B सी गार्जियन और स्काई गार्जियन ड्रोन खरीदने का समझौता किया था। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस के मुताबिक़, भारत अगले दशक में अपने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर सकता है।

अब आतंकवाद पर एक्शन हो या भारत की सेना को शक्तिशाली बनाने की बात ट्रंप अपने दोस्त के साथ मज़बूती से खड़े हैं। और नहीं भी तो भारत आज नया भारत है।दुनिया को भारत की ज़रूरत है। दुनिया के देश भारत के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।और भारत सबको साथ लेकर चलने के लिए भी तैयार है।
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