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कश्मीर पर फिर हुई पाकिस्तान की बेइज़्ज़ती, शहबाज़ शरीफ़ का हुआ बुरा हाल !

बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको किस्तान के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे…इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में उनसे मुलाकात की. इस मीटिंग में उन्होंने कश्मीर मुद्दा उठाया तो लुकाशेंको ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा करने नहीं आए हैं

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कंगाल और बदहाल पाकिस्तान समय-समय पर कश्मीर के मुद्दे को उठाकर दुनिया के मुस्लिम देशों के सामने गिड़गिड़ाने लगता है। वह चाहता है कि मुस्लिम देश उसके साथ आएं और भारत को कश्मीर पर कुछ कहें। लेकिन पाकिस्तान को अब ये कोशिशें छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि अब इस पर उसका कोई फ़ायदा नहीं है। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने वाला तुर्की पहले ही उसका साथ छोड़ चुका है। यूएन के मंच पर तुर्की के राष्ट्रपति इस बार तमाम बातें बोलकर गए, लेकिन उन्होंने कश्मीर पर पहली बार कुछ नहीं बोला। पाकिस्तान की अब एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर फ़ज़ीहत हुई है, और यह उसकी अपनी नाकामी है। इस बार कश्मीर का राग अलापना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को उल्टा पड़ गया।

दरअसल, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको पाकिस्तान के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में उनसे मुलाकात की। इस मीटिंग में शहबाज शरीफ ने कश्मीर मुद्दा उठाया, तो लुकाशेंको ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा करने नहीं आए हैं। बल्कि उन्होंने कहा, "मैं यहां केवल व्यापार और द्विपक्षीय सहयोग पर बात करने आया हूं।" पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको को अपना खास दोस्त बताया और फिर उनके सामने कश्मीर का मुद्दा उठाया। वह चाहते थे कि लुकाशेंको कश्मीर मुद्दे पर भारत विरोधी बयान दें, लेकिन बेलारूस के राष्ट्रपति ने इसके बदले जो किया, उससे शरीफ को बड़ा झटका लगा। लुकाशेंको ने इस पर बोलने से इनकार कर दिया।

बेलारूस के राष्ट्रपति के स्पष्ट रुख ने पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए और पाकिस्तान की दुनिया के सामने फजीहत हो गई। शहबाज़ शरीफ प्रोटोकॉल तोड़कर बेलारूस के राष्ट्रपति का स्वागत इस तरह करने पहुंचे, जैसे पाकिस्तान जो चाहेगा, बेलारूस के राष्ट्रपति वही कहेंगे। पाकिस्तान को वैसे भी कोई सीरियसली नहीं ले रहा है। वहां की सरकार अपने लोगों को महंगाई और कंगाली में जूझता छोड़कर आलतू-फालतू कामों में लगी रहती है। अब इस फ़ज़ीहत के बाद तो पाकिस्तान को समझ आना चाहिए कि कश्मीर का मुद्दा बार-बार हर जगह उठाने से कुछ नहीं होने वाला।

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