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India के Zorawar ने बार्डर पर मचाया तहलका, कांप उठा दुश्मन

रक्षा क्षेत्र में भारत एक के बाद एक बड़ी कामयाबी हासिल कर रहा है। उसी क्रम में देश में निर्मित जोरावर लाइट टैंक का परीक्षण लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में चल रहा है। परीक्षण में टैंक की गोलाबारी सफल रही है। यह परीक्षण इस महीने के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है

India के Zorawar ने बार्डर पर मचाया तहलका, कांप उठा दुश्मन
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भारतीय सेना की बढ़ती ताक़त का एक और नमूना दुनिया के सामने आ गया है। सीमा पर दुश्मन का कलेजा कंपाने वाला चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों का काल नाम है ज़ोरावर। रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ते और एक मज़बूत शक्ति बनकर उभर रहे भारत की नई ताक़त का नाम ज़ोरावर है। पूरी तरह भारत में ही बने ज़ोरावर उन लाइट टैंक में शामिल हैं जो किसी भी परिस्थिति में दुश्मन को ढेर करने के लिए जाने जाते हैं। ज़ोरावर नाम सुनकर उस डोगरा साम्राज्य के महान सेनापति का नाम ज़ेहन में आ जाता है जिसने लद्दाख, तिब्बती और गिलगित बालटिस्तान को जीता था। एक बार फिर ज़ोरावर लौट आया है लद्दाख में इस बार टैंक की शक्ल में।

हाई एल्टीट्यूड एरिया में स्वदेशी टैंक ज़ोरावर अपने आखिरी ट्रायल से गुजर रहा है। डीआरडीओ ने ज़ोरावर के सफल फायरिंग की तस्वीरें और वीडियो जब सोशल मीडिया पर जारी की तो उसे देखकर दुश्मन का कलेजा भी कांप सा गया होगा।

स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक ने लद्दाख में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चल रहे टेस्ट को पूरा कर लिया है। 4,200 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर परीक्षण के दौरान सटीकता के साथ ज़ोरावर ने कई राउंड फ़ायर किए। ज़ोरावर टैंक का निर्माण DRDO और L&T ने LAC यानी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तैनात चीनी ZTQ-15 ब्लैक पैंथर टैंकों के मुकाबले के लिए किया गया है। दरअसल, चीन ने LAC के पास अपनी तरफ 500 हल्के टैंक तैनात कर रखे हैं। उनका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना का ये टैंक काफी है।

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ज़ोरावर टैंक:

  • ढाई साल से कम समय में बनाया गया
  • निर्माता: डीआरडीओ और L&T ने मिलकर इसे विकसित किया
  • कैलिबर: 105 मिमी, जिससे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागी जा सकती हैं
  • पावर-टू-वेट: 30 एचपी/टन, जो बेहतर मोबिलिटी के लिए है
  • वजन: 25 टन, लद्दाख जैसे हाई एल्टिट्यूड इलाकों में तैनाती के लिए उपयुक्त
  • सुरक्षा: इसमें मॉड्यूलर एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे हमलों से सुरक्षित रखता है
  • ड्रोन और बैटल मैनेजमेंट सिस्टम: इस टैंक में ड्रोन और बैटल मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाए गए हैं।
  • कार्यशीलता: यह टैंक माइनस तापमान और रेगिस्तान के अधिकतम तापमान में भी अच्छा काम करेगा।
  • आसान मूवमेंट: इसे रोड, रेल और एयर के ज़रिए आसानी से मूव कराया जा सकता है।
  • चीनी टैंकों से मुकाबला
  • ज़ोरावर का मुकाबला चीनी हल्के पहाड़ी टैंकों, जैसे ZTQ टाइप-15 से है।

सैन्य इतिहास से प्रेरणा

साल 2020 में भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में कम समय में अपने टैंकों को भेजकर चीन को न सिर्फ़ चौंकाया बल्कि उसके सारे प्लान पर पानी भी फेर दिया था। पैंगॉन्ग के दक्षिणी छोर पर जब भारतीय T-72 और T-90 टैंक चीन के टैंकों के सामने खड़े हुए थे, तो चीन को अपने टैंक वापस लेने पड़े थे। अब भारतीय सेना ने उस अनुभव से सीखते हुए एक नई रणनीति बनाई है, जिसका नाम है "प्रोजेक्ट ज़ोरावर"।

प्रोजेक्ट ज़ोरावर की सफलता

इस टैंक का प्रोटोटाइप महज 4 साल के भीतर तैयार हुआ, और अब इसके ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। यह टैंक भारतीय सेना की ताकत को बढ़ाएगा और यह स्पष्ट करता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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