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पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भारत के ‘अटैक’, मचा हड़कंप !

बिना जंग में घसीटे भारत ने पाकिस्तान को ऐसी मार लगाई है कि वो बलूच, तालिबान और TTP के एक्शन से भी ख़तरनाक है…अपनी कूटनीतिक ताक़त के दम पर भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर चारों खाने चित्त कर दिया है….वहीं अपने दोस्त अमेरिका के ज़रिए पिछले कुछ समय से आंख दिखा रहे बांग्लादेश को भी भारत ने तगड़ा सबक़ दिया है….पहले जानते हैं पाकिस्तान को भारत ने अब झटका दिया है

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बार्डर पर TTP और तालिबान से मार खा रहा पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। देश टूटने के ख़तरे को झेल रहे पाकिस्तान में बवाल है। हकूमत और सेना ये भी नहीं सोच पा रही कि आख़िर किया जाए तो क्या किया जाए। इस बीच भारत की तरफ़ से भी ताबड़तोड़ अटैक किया गया है। बिना जंग में घसीटे भारत ने पाकिस्तान को ऐसी मार लगाई है कि वो बलूच, तालिबान और TTP के एक्शन से भी ख़तरनाक है। अपनी कूटनीतिक ताक़त के दम पर भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर चारों खाने चित्त कर दिया है। वहीं अपने दोस्त अमेरिका के ज़रिए पिछले कुछ समय से आंख दिखा रहे बांग्लादेश को भी भारत ने तगड़ा सबक़ दिया है। पहले जानते हैं पाकिस्तान को भारत ने अब झटका दिया है। 

दरअसल, भारत दौरे पर आए नीदरलैंड के रक्षा मंत्री रुबेन बर्केलमैन्स से भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को हथियार नहीं देने की बात कही है, जिसके बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। चारों तरफ़ से घिरे पाकिस्तान पर ये सबसे बड़ा अटैक है। रक्षा मंत्री रुबेन के साथ बैठक में राजनाथ सिंह ने पिछले कई दशकों से पाकिस्तान से भारत में आ रहे आतंकवाद पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बर्केलमैन्स से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नीदरलैंड की कंपनियां पाकिस्तान को हथियार, मंच या प्रौद्योगिकी उपलब्ध न कराएं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को मंच या तकनीक देना क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए हानिकारक है। सूत्रों के मुताबिक़ इसके बाद नीदरलैंड पाकिस्तान को हथियार देना बंद भी कर सकता है।

वहीं रायसीना डॉयलॉग के लिए भारत आईं अमेरिकी की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। गबार्ड के इस बयान से बांग्लादेश को मिर्ची लगी। तुलसी गबार्ड ने कहा था,

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"बांग्लादेश के हालात चिंताजनक हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न चिंता का प्रमुख विषय है। डॉनल्ड ट्रंप सरकार ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ बातचीत शुरू कर दी है, लेकिन यहां इस्लामी चरमपंथ और आतंकवादी तत्वों का उदय बड़ी चिंता की बात है।"

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हालांकि गबार्ड के इस बयान के बाद प्रतिक्रिया बांग्लादेश से भी सामने आई। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तुलसी गबार्ड के बयान को पूरी तरह से बेतुका बताया और कहा,

"हम तुलसी गबार्ड के टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। उनका बयान पूरी तरह से भ्रामक और बांग्लादेश की छवि और उसकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने वाला है। एक ऐसा देश जिसकी पारंपरिक इस्लाम प्रथा समावेशी और शांतिपूर्ण रही है और जिसने उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में प्रगति की है। दुनिया में कई देश आज चरमपंथ का सामना कर रहे हैं। बांग्लादेश भी उन्हीं देशों में से एक है। लेकिन हम अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं और चरमपंथ के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।"

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अब बांग्लादेश में जो भी कुछ हो रहा है वो तो दुनिया के सामने है ही। यूनुस की सरकार चिल्ला चिल्ला कर चाहे जितना भी ये कह ले कि वहां अल्पसंख्यकों को परेशानी नहीं है, लेकिन ये पूरी तरह ग़लत ही है।ये सब जानते हैं। इधर इस सब के बीच चीन ने भारत और ख़ासकर पीएम मोदी की तारीफ़ कर दी है, जिसके बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश की नींद उड़ गई है। दरअसल, चीन ने पीएम मोदी के उस बयान की तारीफ़ की है जिसमें पीएम ने कहा था,

"भारत और चीन 2020 में बॉर्डर पर बने तनाव से पहले की स्थिति को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से, विश्वास, उत्साह और ऊर्जा वापस आएगा। निश्चित रूप से, इसमें कुछ समय लगेगा, क्योंकि पांच साल का वक्‍त रहा है। हम मिलकर काम कर रहे हैं और यह वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी आवश्यक है। चूंकि 21वीं सदी एशिया की सदी है, हम चाहते हैं कि भारत और चीन स्वस्थ और स्वाभाविक तरीके से प्रतिस्पर्धा करें। प्रतिस्पर्धा कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन यह कभी भी संघर्ष में नहीं बदलनी चाहिए।"

पीएम मोदी की यह बात चीन को खूब पसंद आई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने तो यहां तक कहा कि पीएम मोदी का नजरिया भारत-चीन के रिश्तों की नई ऊंचाई है। 'ड्रैगन-हाथी की दोस्ती' अब टूटने वाली नहीं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा,

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"हमने चीन-भारत संबंधों पर प्रधानमंत्री मोदी के हालिया सकारात्मक टिप्पणियां देखी हैं। हम इसकी तारीफ करते हैं। अक्टूबर में रूस के कज़ान में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई सफल बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों के सुधार का नया रास्ता खोला है। दोनों पक्ष हर समझौते पर गंभीरता से अमल कर रहे हैं। हमने सकारात्मक परिणाम भी देखे हैं।"



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