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सीरिया में ज़मीन के अंदर IDF का बड़ा ऑपरेशन, ईरान को ऐसे दिया गया झटका

तख्तापलट से पहले कैसे इज़रायल ने एक बड़े ऑपरेशन को सीरिया में अंजाम दिया इस बात का खुलासा अब हुआ है और उस ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी भी इज़रायल की आर्मी ने ली है…हालांकि इस हमले के लिए पहले से ही IDF को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा था..रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने एक जनवरी को इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी ली

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पिछले दिनों सीरिया में तख्तापलट हुआ जिसके बाद वहां 50 सालों से चला आ रहा बशर अल असद के परिवार का राज ख़त्म हो गया।और राष्ट्रपति बशर अल असद भागकर रूस जा पहुंचे। लेकिन इस तख्तापलट के बाद सीरिया में जो हुआ। या जो हो रहा है वो किस तरह इज़रायल ने वहां हमले किए इसके बारे में अब खुलकर इज़रायल ने माना है। तख्तापलट से पहले कैसे इज़रायल ने एक बड़े ऑपरेशन को सीरिया में अंजाम दिया इस बात का खुलासा अब हुआ है और उस ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी भी इज़रायल की आर्मी ने ली है। हालांकि इस हमले के लिए पहले से ही IDF को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा था..रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने एक जनवरी को इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी ली। 


अब जहां हमला हुआ वो बताया जा रहा है कि वो फैक्ट्री ईरान की थी और असद के तेहरान के साथ गहरे रिश्ते थे।असद ने ईरान को लेबनान में हिजबुल्लाह को हथियार बनाने और वहां से सप्लाई करने की ज़मीन तैयार करके दी। इसे ही इज़रायल ने निशाना बनाया। IDF ने सितंबर में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ऑपरेशन का मकसद हिजबुल्लाह के लिए मिसाइलों को बनाने के लिए बनी अडंरग्राउंड ईरानी साइट को तबाह करना था। इजरायली सैनिकों ने सीरिया के मस्याफ में सीईआरएस पर अटैक किया। रिपोर्ट के मुताबित ये साइट इज़रायल से 200 किलोमीटर दूर है। IDF इसपर 5 साल से नज़र बनाए हुए थी। वैसे तो कई बार इसको निशाने बनाया गया लेकिन फिर ये साफ़ हुआ कि यहां केवल हवाई हमलों से काम नहीं चलेगा। जिसके बाद GROUND OPERATION कर यहां तबाही मचाई गई। इससे जुड़ा ये वीडियो सोशल मीडिया पर iDF की तरफ से जारी किया गया। इजराइली सेना ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन मेनी वेज' और स्ट्राइक की लोकेशन को 'डीप लेयर' नाम दिया था। क्योंकि इजराइली सेना के मुताबिक, ईरान ने पश्चिमी सीरिया के मस्फया इलाके में पहाड़ को खोदकर इसे जमीन के अंदर बनाया था।

जिसे बनाने की शुरूआत 2017  में की गई थी। और 2021 में इसे पूरा कर मिसाइल का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया था। iDf ने इस ऑपरेशन से पहले इंटेलिजेंस यूनिट को एक्टिव किया गया। साथ ही सैनिकों को सुरंग में उतारने की लोकेशन के लिए मॉडल तैयार किया गया ।इसी के साथ खतरों और सीरीया की सेना से निपटने के लिए भी तैयारी को भी ध्यान में रखा गया। सिर्फ़ 2 घंटे में इस बड़े ऑपरेशन को iDF की शालडाग यूनिट के 100 कमांडो और यूनिट 669 के 20 सैनिक ने  सुरंग में बनी मिसाइल फैक्ट्री में 300 किलोग्राम विस्फोटक बिछाकर मिशन को अंजाम दिया। फिर जैसे ही सभी कमांडो वापस हेलिकॉप्टर में लौटे। तभी सुरंग में विस्फोट कर दिया गया। जिसमें ईरान का एक और सपना चकनाचूर हो गया।

iDF के मुताबिक़ अंडरग्राउंड बनी इस मिसाइल फैक्‍ट्री का आकार एक घोड़े की नाल की तरह था, जिसके 3 एंट्री गेट थे। इनमें से एक से कच्‍चा माल लाया जाता था। दूसरा मिसाइलों को बाहर लाने के लिए था और तीसरा रसद और ऑफिस तक पहुंचने के लिए था। इसके 16 कमरे थे, जिनमें रॉकेट ईंधन के लिए मिक्सर, मिसाइल बॉडी निर्माण क्षेत्र और पेंट रूम शामिल थे।
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