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इज़रायल से मार खा रहा हिज़्बुल्लाह पड़ा अकेला, ईरान ने फंसाया तो निकल गई हैकड़ी
ईरान हिज्जबुलाह या हमास को आगे कर इज़रायल पर हमले करवा रहा है..ये सब जानते हैं कि हिज़्बुल्लाह को पालने वाला ईरान ही है…लेकिन, इस बार ईरान ने हिजबुल्लाह को ऐसा फंसाया है कि वह पहली बार बिना शर्त युद्धविराम के लिए चिल्ला रहा है
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इजरायल ने हिजबुल्लाह के भौतिक बुनियादी ढांचे को खत्म करने के लिए दक्षिणी लेबनान में ग्रउंड ऑपरेशन भी शुरू किए जिससे इज़रायल के अस्तित्व पर ख़तरा मंडराने लगा। उधर इज़रायली पीएम ने क़सम खा ली है कि वो हिज़्बुल्लाह को मिटाकर ही दम लेंगे। इसके लिए इज़रायल की तरफ़ से लेबनान के लोगों को संबोधित करते हुए ये भी कह दिया था कि वो हमारे ऑपरेशन के पूरा होने तक किसी सुरक्षित जगह पर चले जाएं। लेकिन ये साफ़ है कि इज़रायल के हमलों में हिज्जबुल्लाह का तबाह होना तय है।
कब बना हिज़्बुल्लाह?
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हिजबुल्लाह का गठन 1982 में शिया धर्मगुरु सईद अब्बास अल मोसावी ने किया था, जो अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरान के ज़ायोनी विरोधी और साम्राज्य विरोधी स्वभाव से प्रभावित थे। पार्टी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से भौतिक और वैचारिक समर्थन मिला। 1992 में हिजबुल्लाह प्रमुख के रूप में नसरल्लाह के उभरने के साथ, इस शिया इस्लामिस्ट पार्टी में आमूलचूल परिवर्तन आया। उसने कट्टरपंथी भाषणों के साथ पारंपरिक शासक अभिजात वर्ग के आधिपत्य को चुनौती दी। पार्टी ने लोकप्रिय धार्मिक राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से लेबनान की सरकार में अपनी वैधता बनाए रखी। हिजबुल्लाह ने रियल एस्टेट निवेश, दवा व्यवसाय के माध्यम से एक समानांतर आर्थिक साम्राज्य चलाया। इसने माल की तस्करी के लिए ड्रग माफिया और संगठित अपराध सिंडिकेट को संरक्षण दिया, जिससे इसके खजाना बढ़ गया। दूसरी ओर, इसने वंचित शियाओं के बीच व्यापक समर्थन प्राप्त किया, क्योंकि दक्षिणी लेबनान, बेका घाटी, दक्षिण बेरूत आदि में इसकी सामाजिक कल्याण इकाइयों का विशाल नेटवर्क गहराई से फैला हुआ था।
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अब ये सब जानते हैं कि ईरान से रॉकेट और मिसाइल मिलने के बाद उसने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाया है। तभी 2006 में कमजोर पड़ चुके हिज़्बुल्लाह ने इस बार जिस तरीक़े से इज़रायल पर हमला किया उससे इज़रायल पर सोच में पड़ गया था कि आखिर ये हुआ कैसे। कैसे हिज़्बुल्लाह ने Plastine Missile से इज़रायल के सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले ऑयरन डोम को भेद दिया। यही नहीं ईरान ने हिज़्बुल्लाह के साथ साथ हूती और हमास जैसे आतंकी संगठनों को मज़बूती दी। हालांकि, हिजबुल्लाह सुप्रीमो हसन नसरल्लाह की हत्या संगठन की क्षमता के साथ-साथ मनोबल के लिए एक बड़ा झटका थी। इजरायल हर उस हिज्बुल्लाह नेता को निशाना बना रहा है, जो संभावित रूप से समूह के उत्तराधिकारी बन सकते हैं।