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गुयाना में मोदी का दम देखकर चीन भी हैरान - परेशान !

अब 56 साल बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तौर पर भारत का कोई प्रधानमंत्री गुयाना पहुंचा है…वो इंदिरा गांधी के बाद गुयाना जाने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं..प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील में G-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अब अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में गुयाना पहुंच गए हैं

गुयाना में मोदी का दम देखकर चीन भी हैरान - परेशान !
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भारत से करीब 13 हजार किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका का छोटा-सा देश गुयाना जहां आबादी तो महज 8 लाख है, लेकिन इनमें से करीब 40 फीसदी भारतीय मूल के हैं। इस देश का भारत से रिश्ता केवल जनसंख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास के गहरे पन्नों में दर्ज है। अब 56 साल बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तौर पर भारत का कोई प्रधानमंत्री गुयाना पहुंचा है। वो इंदिरा गांधी के बाद गुयाना जाने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील में G-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अब अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में गुयाना पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जब गुयाना पहुँचे तो राष्ट्रपति इरफान ने मोदी का हवाई अड्डे पर गले लगकर भव्य स्वागत किया। यहीं नहीं प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए राष्ट्रपति के साथ लगभग पूरी कैबिनेट ही पहुँच गई। अब पीएम मोदी ने वैसे भी इस देश में पहुँचकर कई देशों की नींद उड़ा दी है। सबसे ज़्यादा झटका तो हमारे पड़ोसी देश चीन को ही लगा है ऐसा क्यों चलिेए वो भी जानिए।


दरअसल, चीन तेल और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छोटे से देश गुयाना के साथ न केवल अपना सैन्य, आर्थिक और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आपसी संबंधों को मजबूत कर रहा है बल्कि कैरेबियाई इलाके में वो क्षेत्रीय दबदबा भी बनाना चाह रहा है और इसके लिए बीजिंग वन रोड, बेल्ट इनिशिएटिव के जरिए लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। 2017 के बाद से चीन ने गुयाना में तेज़ी से इंवेस्टमेंट किया है। अमेरिका को पीछे छोड़ने के सपने देखने वाला चीन छोटे से देश गुयाना में अपना दबदबा बढ़ा रहा लेकिन अब पीएम मोदी के वहां पहुंचते ही चीन में खलबली तो ज़रूर मची होगी। वहीं गुयाना में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए भी एक चुनौती ही है। अब इस यात्रा से पीएम मोदी ने ये तो दिखाया कि भारत की ताक़त क्या है और ये भी कि चाहे 56 साल बाद भी को आधिकारिक रूप से गुयाना पहुँचे लेकिन फिर भी गुयाना और भारत के रिश्तों में खटास नहीं आ सकती। वैसे भी दोनों देशों के बीच का अच्छा संबंध सालों पुराना है। इसे ऐतिहासिक तौर पर भी काफी मजबूत है।

गुयाना वैसे भी भारत का ऐहसान मं द रहेगा क्योंकि जिस वक़्त दुनिया कोरोना की चपेट में थी। गुयाना भी कोरोना से जूझ रहा था। तब कोई भी गुयाना का मदद के लिए आगे नहीं आया लेकिन भारत वो इकलौता देश था जिसने गुयाना को बचाया। भारत ने गुयाना को 80 हज़ार कोरोना वैक्सीन भेजी थी। उसी समय भारत और गुयाना के रिश्तों में मज़बूती आई थी। इस महीने की शुरुआत में गुयाना रक्षा बल के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ब्रिगेडियर उमर खान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए पांच दिवसीय दौरे पर भारत आए थे। वहीं इस साल की शुरुआत में, भारत ने गुयाना को दो डोर्नियर विमान दिए थे। अब इसलिए पीएम मोदी गुयाना में है जहां भारतीयों का वैसे ही खूब दबदबा है।

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