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‘युद्ध के लिए तैयार रहो’…मोहम्मद यूनुस की इस हिमाकत के पीछे कौन ?

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों पर चुप रहने वाले मोहम्मद यूनुस अब सेना के दम पर ताव दिखा रहे हैं

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बांग्लादेश में भारतीय लोगों पर हो रहे अत्याचार को लेकर चुप बैठी यूनुस सरकार अब भारत को ही ताव दिखाने लगी है। भारत-बांग्लादेश के बढ़ते विवाद के बीच यूनुस सरकार ने पहले भारत आने वाले 50 जजों का दौरा रद्द कर दिया। ये सभी जज ट्रेनिंग के लिए भारत आने वाले थे। और अब अपनी सेना को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।बांग्लादेश में शेख हसीना राज का तख्तापलट करवाकर अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस अचानक बांग्लादेश के चटगांव मिलिट्री ट्रेनिंग एरिया में पहुंच गए। यहां टैंक, तोप, युद्धयान और सैनिक अपनी ताकत दिखा रहे हैं और इस ताकत के पीछे एक चेहरा हैं मोहम्मद यूनुस, जो अचानक अपनी सेना में दम भरने लगे। इतना ही नहीं, यूनुस ने अपनी सेना से कहा कि आपको हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।

मोहम्मद यूनुस का सेना को मंत्र

  • देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सेना के जवानों को हमेशा तैयार रहना होगा
  • सेना के जवानों को हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए
  • बांग्लादेश की सेना राष्ट्र के लिए गौरव और विश्वास है
  • युद्धाभ्यास वास्तविक युद्ध की तैयारी का अहम हिस्सा है
  • सेना का लक्ष्य हर हाल में देश की रक्षा और जीत सुनिश्चित करना है

मोहम्मद यूनुस ने अपनी सेना के युद्धाभ्यास को बारीकी से देखा, जिससे माना जा रहा है कि यूनुस अब अपनी सेना के दम पर तेवर दिखाने की कोशिश में हैं। बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय ताकतों और दबाव के बीच यूनुस अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं।

 हिंदुओं की सुरक्षा पर बढ़ा अंतर्राष्ट्रीय दबाव

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बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरते ही पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हुए। सड़कों पर आगजनी और बवाल के बीच हिंदू अल्पसंख्यकों, मठ मंदिरों को निशाना बनाया जाने लगा। लोगों पर हमले हुए। भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश को चेतावनी दी थी, लेकिन हालात नहीं बदले। वहीं, यूनुस सरकार एक्शन लेने की बजाय हिंदुओं पर अत्याचार को नकारती रही, लेकिन तस्वीरें चीख-चीख कर अत्याचार की तस्दीक कर रही थीं। ना केवल भारत, बल्कि यूके की संसद में भी चिंता जताई गई थी, जिसके बाद बांग्लादेश पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ गया।

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जब इस्कॉन के पुजारी को किया गिरफ्तार

एक तरफ जहां यूनुस हिंदुओं पर बर्बरता से इंकार करती रही, वहीं दूसरी ओर इस्कॉन के पुजारी महंत चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर लिया गया। चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के बाद हिंदू समाज के लोग सड़कों पर उतर आए, लेकिन बांग्लादेश ये विरोध भला कहां सहने वाला था। चिन्मयानंद की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हिंदू समाज के लोगों पर जमात के लोगों ने हमला कर दिया, जिसमें करीब 50 लोग घायल हो गए थे।

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हिंदुओं पर हमले रोक पाने में नाकाम बांग्लादेश की दूरी भारत से बढ़ती गई, और बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना ने जन्म ले लिया। जब आलोचनाओं से घिर गए, तो अपनी सेना को मजबूती देने में जुट गए। लेकिन सवाल ये है कि 1971 से जंग खा रहे बांग्लादेशी सेना के हथियार और टैंकर में इतना दम बचा है कि वो किसी युद्ध की स्थिति में आने का सोच भी सकें? सवाल ये भी है कि बांग्लादेश की इस हिमाकत के पीछे किसका हाथ है? बांग्लादेश अपने जंग लगे टैंकों में किसके दम पर फिर से तेल भर रहा है?

जिस यूनुस को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, उनके रहते हुए बांग्लादेश का माहौल इतना अशांत क्यों है? क्यों शांति की बात करने वाले यूनुस अब सेना को जंग के लिए तैयार रहने की बात कर रहे हैं? क्या अमेरिका से ये साजिश रची जा रही है? क्योंकि ये दावा पहले भी किया गया था कि अमेरिका बांग्लादेश में अस्थिरता के लिए भी जिम्मेदार है। वहीं, अमेरिका की ही मदद से पहले भी बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को अस्थिर करने की कोशिश हुई थी। मोहम्मद यूनुस को अमेरिका का खास भी माना जाता है, ऐसे में अमेरिका बांग्लादेश की हर गतिविधि पर नजर तो रख ही रहा है, साथ ही उस पर अमेरिका के प्रभाव से भी इंकार नहीं किया जा सकता।


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