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13 साल के शिवांशु की आवाज़ सुन Arjit Singh की याद आ जाएगी ! Documentary

आज आपकी मुलाक़ात एक ऐसे बच्चे से कराने जा रहे हैं जिसे कल का सुपरस्टार कहा जाने लगा है। लिटिल शिवांशु इतना अच्छा गाते हैं कि उनकी आवाज़ को सुनकर हम सीधा उनके घर पहुंच गये। उत्तराखंड के ख़टीमा के इस लड़के की आवाज आपको भी मंत्रमुग्ध कर देगी। शिवांशु और उसकी बहन शगुन की जुगलबंदी देखिये।

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कहते है हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता, तभी तो सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने रातों रात 13 साल के शिवांशु मेहता को सुपरस्टार बना दिया। ‘तीन बाण के धारी तीनों बाण चलाओ’ भजन गाकर शिवांशु ने सबका दिल जीत लिया। वीडियो वायरल हुआ तो फिर NMF News की टीम सीधा शिवांशु के घर पहुंच गई, उनके टैलेंट को देखने और उनके संघर्ष की कहानी को जानने।

13 साल के शिवांशु मेहता। एक मिडिल क्लास फ़ैमिली का वो लड़का जो आज नहीं तो कल अपने शहर के साथ साथ प्रदेश और पूरे देश का नाम रौशन ज़रूर करेगा, यही भरोसा है परिवार का, शायद इसीलिए ड्राइविंग करके घर चला रहे हरीश सिंह मेहता ने बच्चे की पढ़ाई के साथ साथ म्यूज़िक पर भी पूरा ध्यान केंद्रित कर रखा है। पिता कहते हैं कि पढ़ाई ही सब कुछ नहीं होती है, बच्चों के अंदर के हुनर को भी पहचाना जाना चाहिये।


शिवांशु ने NMF News को बताया कि उनका तीन बाण गाते हुए जो वीडियो वायरल हो रहा है वो एक अनाथाश्रम का है जहां पर वो अपना जन्मदिन मनाने के लिए गये थे। वो हर साल इसी तरह से अपने जन्मदिन पर अनाथाश्रम जाते हैं और बच्चों से मिलते हैं।

शिवांशु का परिवार बेहद आध्यात्मिक है, तभी तो घर में भजन खूब गाये जाते हैं। शायद इसीलिए शिवांशु का रूझान भी फ़िल्मी गानों के मुक़ाबले भजनों में ज़्यादा है। शिवांशु की बहन शगुन भी किसी मामले में कम नहीं हैं, ना चंचलता कम है, ना टैलेंट कम, ना Cuteness कम है, भाई को ददा कहकर पुकारने वाली शगुन वैसे कम बोलती हैं लेकिन एक बार कैमरा ऑन हुआ तो फिर ऐसी ऐसी बातें करती हैं कि आप भी हंसते हंसते लोटपोट हो जायेंगे।

मूल रूप से उत्तराखंड के झारखंड के ख़टीमा का रहने वाला ये मेहता परिवार एकदम साधारण सा परिवार है, ना सिर्फ़ दिखने में बल्कि रहन सहन में भी, लेकिन शहर की धक्कामुक्की और शोरगुल से कोसो दूर गाय, बकरी, ख़रगोश, बिल्ली के साथ साथ खेत खलिहान, बिटोड़े, उपलें, चिड़ियाओं की चहचाहट के बीच कुछ तो ख़ास इस जगह पर लगा, कि हम 4-5 घंटे बिता गये और वक़्त का पता ही नहीं चला।

इस दौरान कभी भाई बहन की शैतानी दिखी, तो कभी एक दूसरे के लिये ढेर सारा प्यार, एक पिता की अपने बच्चे को आगे बढ़ाने के लिए दिन रात की मेहनत दिखी तो किचन में चाय बना रही मां का लाड़। शायद यही वो सब चीजें हैं जो शिवांशु को Emtoionless हो रही दुनिया से दूर रखे हुए और वो इतनी सी उम्र में अपने प्रदेश की ख़ूबसूरती को भी बेहतरीन तरीक़े से समझ पा रहे हैं।

कहते हैं ना हर कामयाब आदमी के पीछे एक महिला का हाथ होता है, शिवांशु के मामले में शायद दो महिलाओं का हाथ कहा जा सकता है। एक तो उनकी माता और दूसरी उनकी बहन।

शिवांशु और उनकी बहन के अंदर ये कला आई कहां से ? जबकि पिता ने बताया कि दूर दूर तक घर में कोई प्लेबैक सिंगर है ही नहीं, लेकिन ये क्या ? ज़्यादा बातचीत कि तो पता चला कि बच्चों की माता जी भी बहुत सुरीला गाती हैं। जी हां, शिवांशु की मां मधु मेहता बहुत ही अच्छा गाती हैं, उनसे बात करते पता चला कि वो भजन मंडली में भी गाने जाती हैं।

आप सोचिये जहां आज के दौर में बच्चे फ़िल्मी गानों से प्रभावित हैं वहीं शिवांशु का पूरा परिवार ही भक्ति में लीन रहता है और सनातनी परंपरा को आगे बढ़ाता है। अब सवाल ये भी उठता है कि जब शिवांशु मंडली में जाते हैं, भजन गाते हैं, रियाज़ करते हैं तो फिर पढ़ाई कैसे मैनेज होती है ? इसमें बहुत हद तक मदद करता है स्कूल और स्कूल के अध्यापक। स्कूल के स्टाफ़ ने हमें बताया कि स्कूल की तरफ से जो बन पड़ता है वो मदद करते हैं।वैसे, हुनर को और निखारने के साथ साथ शिवांशु पढ़ाई लिखाई और करंट अफ़ेयर्स में भी काफ़ी एक्टिव दिखे। उन्होंने उत्तराखंड के सीएम धामी से लेकर यूपी के सीएम योगी तक पर हमसे बात की।

खैर, अनाथाश्रम में दान देने गये 13 साल के शिवांशु को तो ऐसा आशीर्वाद मिला है जिसका असर अब धीरे धीरे दिखना शुरू हो गया है। ये बच्चा एक दिन स्टार और फिर सुपरस्टार ज़रूर बने, ऐसी हमारी भी दुआ है।
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