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Yogi की पुलिस ने Javed Akhtar को दिया मुंहतोड़ जवाब, कांवड़ यात्रा पर दिया था बयान

बॉलीवुड के जाने माने लेखक जावेद अख़्तर हमेशा ही अपने बयानों की वजह से चर्चाओं में बने रहते हैं, हालाँकि कई बार वो अपने बयानों की वजह से लोगों के निशाने पर आ जाते हैं, अब जावेद अख़्तर ने योगी की पुलिस से पंगा ले लिया है, दरअसल जावेद अख़्तर ने योगी की पुलिस की तुलना नाजी शासन से कर दी है

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बॉलीवुड के जाने माने लेखक जावेद अख़्तर हमेशा ही अपने बयानों की वजह से चर्चाओं में बने रहते हैं, हालाँकि कई बार वो अपने बयानों की वजह से लोगों के निशाने पर आ जाते हैं। अब जावेद अख़्तर ने योगी की पुलिस से पंगा ले लिया है, दरअसल जावेद अख़्तर ने योगी की पुलिस की तुलना नाजी शासन से कर दी है।जर्मनी में नाजी शासन की शुरुआत 1933 में हिटलर के सत्ता में आने के साथ हुई। हिटलर और नाजी पार्टी ने लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को जल्दी ही खत्म कर दिया।अब जावेद अख़्तर ने योगी की पुलिस की तुलना नाजी शासन से करके अपनी बौखलाहट जाहिर कर दी है।

बता दें कि 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा की तैयारियां ज़ोरों शोरों से चल रही हैं, ऐसे में शासन - प्रशासन की और से लगातार  नए निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं, कांवड़ यात्रा को लेकर मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस द्वारा जारी एक आदेश ने नई बहस छेड़ दी है।दरअसल कांवड़ यात्रा को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस के एसएसपी ने बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकान के मालिकों को अपना नाम लिखना होगा. दुकानदार को अपनी दुकान पर दुकान के मालिक का नाम लिखना होगा. आदेश में कहा गया है कि दुकान पर दुकानदार का नाम स्पष्ट लिखा होने से कोई कंफ्यूजन नहीं होगा. होटल, ढाबों, ठेलों पर भी नाम लिखे होने चाहिए।

अब विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है, सपा प्रमुखअखिलेश यादव से लेकर एआईएमआईएम के अध्‍यक्ष असदुद्दीन ओवैसी इस फ़ैसले पर ऐतराज जता रहे हैं।वहीं जावेद अख़्तर ने भी इस फ़ैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और योगी पुलिस की तुलना जर्मनी के नाजी शासन से कर दी है।जावेद अख़्तर ने अपने X अकाउंट पर लिखा की - "मुजफ्फरनगर यूपी पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि निकट भविष्य में किसी विशेष धार्मिक जुलूस के मार्ग पर सभी दुकानों, रेस्तरां और यहां तक कि वाहनों पर मालिक का नाम प्रमुखता से और स्पष्ट रूप से दिखाया जाना चाहिए, क्यों? नाज़ी जर्मनी में वे केवल विशेष दुकानों और घरों पर निशान बनाते थे."

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अब जावेद अख़्तर अपने इस बयान की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं, एक यूजर ने लिखा की - हलाल प्रमाणीकरण एक विकल्प है लेकिन मालिक का नाम प्रमुखता से और स्पष्ट रूप से दिखाने की तुलना नाज़ी जर्मनी से की जा सकती है।क्या यह पाखंड नहीं है सर??वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा की - सपा सरकार मे उत्तर प्रदेश मे धर्म देखकर योजना का लाभ दिया जाता था धर्म देखकर नौकरी मिलती तब किसी को खुजली नही जैसे ही हिन्दुओ को लेकर कोई आदेश हो तब खुजलीबाजो की खुजली शुरू।इसके अलावा एक और यूज़र ने लिखा - ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कावड़ यात्रियों को शुद्ध खाना मिल सके इसमें कोई बुराई नहीं और वैसे भी नाम लिखने में समस्या क्या है छुपाते क्यों हो नाम को।वहीं एक और यूज़र ने लिखा की - जब भी कुछ अच्छा होता है जावेद को बहुत दर्द होता है।

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तो देखा आपने लोगों ने किस कदर जावेद अख़्तर को लताड़ा है।वैसे जावेद अख़्तर के इस बयान पर  योगी की पुलिस ने भी उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने अपने X अकाउंट इस फ़ैसले का विरोध करने वालों को करारा जवाब देते हुए लिखा की - श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं। श्रावण के पवित्र माह में कई लोग ख़ासकर काँवड़िये अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज़ करते हैं। पूर्व मे ऐसे दृष्टान्त प्रकाश मे आये हैं जहां कांवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए जिससे कांवड़ियो मे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई। इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रद्धालुओं की आस्था के दृष्टिगत कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे एवं खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वे स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें। इस आदेश का आशय किसी प्रकार का धार्मिक विभेद ना होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप प्रत्यारोप एवं कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है। यह व्यवस्था पूर्व मे भी प्रचलित रही है।

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तो देखा आपने मुजफ्फरनगर पुलिस ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट शेयर जावेद अख़्तर समेत उन सभी को मुंह तोड़ जवाब दिया है, जो इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं।बात करे जावेद अख़्तर की तो वो हमेशा ही अपने बयानों की वजह से ट्रोलर्स के निशाने पर आ जाते हैं। ये पहली बार नहीं है, जब लोगों ने उनकी क्लास लगाई हो,इससे पहले भी वो अपनी फ़ज़ीहत करवा चुके हैं।

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