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देश के मुद्दों पर क्यों चुप हैं बड़े सितारे? 'अनुपमा' फेम सुधांशु पांडे का बॉलीवुड से सीधा सवाल
अनुपमा फेम सुधांशु पांडे ने पहलगाम आतंकी हमले पर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं. एक्टर ने कहा कि जब देश को सेलेब्स की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, तब बड़े स्टार्स चुप क्यों रहते हैं?
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टीवी इंडस्ट्री के पॉपुलर चेहरे और अनुपमा में वनराज शाह का किरदार निभाने वाले सुधांशु पांडे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लेकिन इस बार वजह कोई सीरियल नहीं, बल्कि देशभक्ति और बॉलीवुड की चुप्पी है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन बॉलीवुड की ओर से ज्यादातर चेहरों ने इस पर चुप्पी साध रखी है. इसी पर अब सुधांशु पांडे ने सोशल मीडिया और एक इंटरव्यू में खुलकर सवाल उठाए हैं.
जब देश को ज़रूरत है, तो चुप क्यों हैं सितारे?
सुधांशु पांडे ने बिना घुमा-फिराकर साफ तौर पर कहा - “हमारी इंडस्ट्री के पास वो ताकत है जो जनता की सोच को प्रभावित कर सकती है. लेकिन जब देश पर हमला होता है, जवान शहीद होते हैं, तो हमारे बड़े सितारे कहां गायब हो जाते हैं?"
उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ बड़े नाम शायद ओवरसीज मार्केट और पाकिस्तान में अपने फैनबेस को खोने के डर से चुप रहते हैं.शायद उन्हें डर है कि अगर उन्होंने खुलकर भारत के पक्ष में बोला, तो उनका इंटरनेशनल कलेक्शन प्रभावित हो जाएगा. लेकिन ये वक्त बिजनेस या डिप्लोमेसी का नहीं, बल्कि देश के साथ खड़े होने का है.”
'PAK सेलेब्स ने दिखाई अपने वतन से वफादारी'
सुधांशु ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान के कई आर्टिस्ट जिन्होंने भारत में नाम, शोहरत और पैसा कमाया, उन्होंने बिना हिचक अपने देश का साथ दिया.
उन्होंने कहा - “पाक कलाकारों ने साफ-साफ अपने देश के पक्ष में स्टैंड लिया. वहीं हमारे देश के 95% कलाकार इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं. क्या उनमें कभी कोई वजूद था भी?"
उनका ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और एक बार फिर इस बहस को हवा दे रहा है कि क्या सेलेब्रिटीज को सिर्फ स्क्रीन के हीरो होना चाहिए, या समाज और देश के मुद्दों पर भी स्टैंड लेना चाहिए?
अब सवाल ये है...
• क्या वाकई बड़े सितारे सिर्फ मार्केटिंग और ग्लोबल इमेज के चलते चुप रहते हैं?
• क्या देशभक्ति सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह गई है?
• क्या वक्त नहीं आ गया कि बॉलीवुड की चुप्पी को भी एक सवाल की तरह देखा जाए?
सुधांशु पांडे की बातों ने जो सवाल उठाए हैं, वो सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के लिए नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक के लिए हैं. जब देश के जवान खून बहा रहे हैं, तो कम से कम एक आवाज तो उन तक पहुंचे और ये आवाज सबसे ऊंची होनी चाहिए उस इंडस्ट्री से, जिसे करोड़ों लोग फॉलो करते हैं.
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