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कौन है जितेंद्र पांडे? जिसकी मदद से सैफ अली खान पर हमले के आरोपी को मुंबई पुलिस ने पकड़ा
मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हुए हमले के बाद मुंबई पुलिस ने आरोपी को पकड़ने में अहम सफलता प्राप्त की। इस सफलता में श्रमिक ठेकेदार जितेंद्र पांडे की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हुई। पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए 35 से अधिक टीमों का गठन किया और 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
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मुंबई शहर में एक घटना ने न केवल बॉलीवुड जगत को, बल्कि आम जनता को भी चौंका दिया। बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर एक हमले की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे शहर में सनसनी फैल गई। लेकिन इस हमले के बाद से पुलिस की तत्परता और विशेष जांच का तरीका काबिल-ए-तारीफ था, जिसने कुछ ही दिनों में आरोपी तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। इस गिरफ्तारी के पीछे एक बेहद अहम भूमिका निभाने वाले शख्स का नाम था जितेंद्र पांडे, जो एक श्रमिक ठेकेदार हैं। तो आइए जानते हैं, कैसे सैफ अली खान पर हमला करने वाले आरोपी तक पुलिस पहुंची, और किस तरह जितेंद्र पांडे की मदद ने पुलिस के लिए रास्ता आसान किया।
मुंबई पुलिस की सख्त जांच
सैफ अली खान पर हमला करने वाला आरोपी दो दिन तक फरार था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए 35 से ज्यादा टीमों का गठन किया, जो शहर के विभिन्न हिस्सों में आरोपी के बारे में जानकारी जुटाने का काम कर रही थी।
आरोपी के बारे में शुरुआती जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसकी पहचान की। पुलिस ने 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें से कई अहम सुराग सामने आए। पुलिस ने पाया कि हमलावर दादर रेलवे स्टेशन के आसपास देखा गया था और फिर वह वर्ली कोलीवाड़ा भी गया था। इसके बाद, उसने अंधेरी की तरफ जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ी। इन फुटेजों से पुलिस को यह अंदाजा हुआ कि आरोपी वर्ली इलाके से अंधेरी तक पहुंचा था और वहां से उसकी गाड़ी का रूट भी ट्रैक किया गया।
जितेंद्र पांडे की भूमिका: पुलिस के लिए अहम सहारा
अब पुलिस को पता था कि आरोपी का रूट वर्ली और अंधेरी का है, लेकिन सवाल था कि वह कौन हो सकता है। यह महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पुलिस ने एक श्रमिक ठेकेदार, जितेंद्र पांडे का नाम सुना। पांडे भी उस वक्त सीसीटीवी कैमरे में नजर आए, जब वह अंधेरी से वर्सोवा की तरफ जा रहे थे। पुलिस ने पांडे की बाइक का नंबर नोट किया और उसे ट्रैक किया।
पांडे से पूछताछ की गई, और उन्होंने पुलिस को एक बहुत बड़ा सुराग दिया। पांडे ने बताया कि आरोपी ने हमले के बाद उसे कॉल किया था और घटना की जानकारी दी थी। पांडे की सूचना पर पुलिस ने आरोपी के बारे में और अधिक जानकारी जुटानी शुरू की।
पांडे की सूचना पर आरोपी की गिरफ्तारी
जितेंद्र पांडे की मदद से पुलिस ने आरोपी के बारे में और भी अहम जानकारी हासिल की, जिसके बाद आरोपी की तलाश तेज कर दी गई। पांडे ने पुलिस को बताया कि आरोपी ठाणे के एक वन क्षेत्र स्थित श्रमिक शिविर में छिपा हो सकता है। पुलिस ने ठाणे के इलाके में विशेष अभियान चलाया और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
इसके बाद पुलिस ने पांडे से आरोपी के मोबाइल नंबर पर कॉल करने को कहा। पांडे ने आरोपी से संपर्क किया और उससे ठिकाने के बारे में पूछा। इस कॉल के बाद पुलिस ने ठाणे इलाके में जाल बिछाया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की सूझबूझ और तत्परता को देखकर यह साफ हो गया कि जब जांच एजेंसियां पूरी मेहनत से काम करती हैं तो कोई भी अपराधी जल्दी ही पकड़ा जा सकता है। जितेंद्र पांडे की मदद से पुलिस को जो अहम सुराग मिले, उन्होंने अपराधी तक पहुंचने में मदद की। अगर पांडे ने पुलिस को हमलावर के बारे में जानकारी नहीं दी होती तो शायद यह मामला और लंबा खींचता।
साथ ही, मुंबई पुलिस के समर्पण और कठिन मेहनत की सराहना करनी चाहिए, जिन्होंने इस केस को सुलझाने के लिए दिन-रात एक कर दिए। पुलिस द्वारा 35 से अधिक टीमों का गठन और 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच करना यह दिखाता है कि मुंबई पुलिस की कार्यशैली में निरंतरता और कठोरता है, जो किसी भी अपराधी को पकड़ने में मदद करती है।
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