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Shailendra ने ग़ुस्से में ऐसा क्या लिख दिया जिसे गाकर Kishore Kumar ने इतिहास रच दिया?
इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हे पाने की कोशिश की है कि हर जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है, ये Dialogue बॉलीवुड के मशहूर गीतकार शैलेंद्र जी पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है…..वो कहते हैं ना, क़िस्मत में जो लिखा है वो होना तय है
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इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हे पाने की कोशिश की है कि हर जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है। ये Dialogue बॉलीवुड के मशहूर गीतकार शैलेंद्र जी पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। वो कहते हैं ना, क़िस्मत में जो लिखा है वो होना तय है। साल 1960,ये वो दौर था जिसे golden era of Bollywood कहा जाता था। ये दौर बॉलीवुड म्यूजिक के लिए भी गोल्डन पीरियड period था। ये वो दौर था जब बॉलीवुड में दिलीप कुमार, राज कपूर और Rajendra kumar का दबदबा हुआ करता था। 1960 के दौर बॉलीवुड के मशहूर गीतकार शैलेंद्र जी से जुड़ा एक दिलचस्प क़िस्सा जानकर आप भी यही सोचेंगे किस्मत में जो लिखा है वो जरूर मिलता है। गुस्से में शैलेंद्र ने ऐसी दो लाइने लिखी थी,जिसे किशोर कुमार ने गाकर तहलका मचा दिया था।
बात 1960 की है। जब राज कपूर ज्यादातर अपने दोस्तों के साथ ही काम करते थे। उस दौर में शंकर - जय किशन नाम की फ़ेमस म्यूजिक डायरेक्टर की जोड़ी हुआ करती थी। वहीं मशहूर गीतकार शैलेंद्र और हसरत जय पुरी भी उस टाइम के फ़ेमस लिरिक्स राइटर थे। राज कपूर की फिल्मों में ये तिकड़ी साथ में ज्यादातर फिल्में किया करती थी।
वहीं 1960 में एक फ़िल्म बन रही थी,जिसक नाम कॉलेज गर्ल था। इस फ़िल्म में Shami Kapoor और वजंयतीमाला ने अहम रोल निभाया था। इस फ़िल्म के गानों के लिए शंकर - जय किशन नाम की फ़ेमस म्यूजिक डायरेक्टर की जोड़ी साइन किया था, उनसे कहा गया था की इस फ़िल्म के लिए उन्हें अच्छा ख़ासा अमाउंट मिलेगा वो भी एडवांस में….लेकिन उनके साथ फिल्म में मशहूर लिरिक्स राइटर शैलेंद्र और हसरत जयपूरी काम नहीं करेंगे, बल्कि लिरिक्स राइटर के लिए किसी और को साइन किया जाएगा…..शंकर - जय किशन ने ये बात मान ली और शलेंद्र और हसरत की जगह दूसरे लिरिक्स राइटर के काम करने का फैसला किया…
जैसे ही ये बात शैलेंद्र को पता चली वो काफ़ी नाराज़ हुए और सीधा हसरत जयपुरी से मिलने पहुंच गए। शैलेंद्र ने हसरत से मिलने के बाद उन्हें बताया की शंकर - जय किशन किसी और लिरिक्स राइटर के साथ काम कर रहे हैं। दोनों बाद में शंकर - जय किशन के म्यूजिक रूम पहुंचे। लेकिन वहां जाकर देखा तो म्यूज़िक डायरेक्टर की जोड़ी मौजूद ही नहीं थी।
तब शैलेंद्र ने वहां मौजूद एक ऑफिस बॉय को बुलाया और उससे एक पैपर और पैन मांगा। शैलेंद्र ने गुस्से में पैपर दो लाइने लगी थी। पैपर पर ये लाइनें लिखकर शैलेंद्र ने ऑफिस बॉय से कहा था की ये लाइनें शंकर - जय किशन को सुना देना। ये बात बोलकर शैंलेंद्र और हसरत जय पुरी वहां से चले गए और दोनों ने ये फैसला कर लिया की अब फ्यूचर में दोनों कभी शंकर - जय किशन के साथ काम नहीं करेंगे।
इनकी लड़ाई के चर्चे पूरे बॉलीवुड में होने लगे थे। जैसे ही इनके झगड़े की बात राज कपूर के पास पहुँची की शैंलेंद्र और हसरत अब कभी शंकर - जय किशन के साथ काम नहीं करेंगे। तो राज कपूर ने इन चारों को चौपाटी बीच पर बुलाया। राज कपूर ने इस दौरान चारों से बात करते हुए कहा की वो अब फ़िल्में बनना बंद कर रहे हैं। तब वहाँ मौजूद शैलेंद्र हसरत और शंकर - जय किशन ने पूछा की आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। इसके जवाब में राज कपूर ने कहा की जब तुम लोग साथ में काम ही नहीं करोगे तो फ़िल्में बनाकर क्या करूँगा। इसे लेकर सबकी काफ़ी देर तक बातचीत चली, और बाद राज कपूर ने इनकी आपस में सुलह करा दी थी। जिसके बाद इन सबने ये फ़ैसला किया अब से हम साथ में ही काम करेंगे। जिसके बाद इन सब ने अपनी बात को पूरा भी किया।
वहीं 1962 में रंगोली नाम की फिल्म पर काम चल रहा था। जिसमें किशोर कुमार और वजयंती माला काम कर रहे थे। किशोर कुमार एक्टिंग करने के साथ साथ इस फ़िल्म के गाने भी गा रहे थे। वहीं शंकर जी इस फ़िल्म के एक गाने पर काम कर रहे थे। तभी शैलेंद्र जी, शंकर जी के music रूम में पहुँच गए। जहां शंकर हारमोनियम बजा रहे थे। तभी शंकर जी ने शैलेंद्र से कहा की एक गाने का अंतरा तो बन गया तुम इसके मुखड़े लिख दो। तब शैलेंद्र जी कहते हैं की मैंने तो कोई गाना लिखा ही नहीं कोई मुखड़ा ही नहीं। तब शंकर जी कहते हैं उस दिन जब तुम ग़ुस्से में मेरे ऑफिस आए थे तब तुमने मेरे office boy को दो लाइने लिखकर दी थी। मैने उसका अंतरा लिख दिया है। शैंलेंद्र द्वारा गुस्से में लिखीं वो दो लाइने थी - - छोटी सी ये दुनिया, पहचाने रास्ते हैं, तुम कहीं तो मिलोगे कभी तो मिलोगे,तो पूछेंगे हाल ।
कहना ग़लत नहीं होगा की शैंलेंद्र द्वारा गुस्से में लिखी दो लाइनों का शंकर दी ने बेहद ही शानदार गाना बना दिया और किशोर कुमार ने अपनी जादुई आवाज़ से इस गाने को काफ़ी बड़ा हिट बना दिया था। शैलेंद्र ने कभी नहीं सोचा था की ग़ुस्से में लिखी दो लाइनों का आगे जाकर शंकर ही शानदार गाना बना देंगे। जिसे इतना पसंद किया जाएगा। कहना ग़लत नहीं होगा की क़िस्मत में जो लिखा होता है वो होकर ही रहता है।
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