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नहीं रहे दिग्गज एक्टर-डायरेक्टर धीरज कुमार, 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, 'ओम नमः शिवाय' से बनाई थी खास पहचान

भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत ने एक महान कलाकार और संवेदनशील व्यक्तित्व को खो दिया है. अभिनेता, निर्माता और निर्देशक धीरज कुमार का 79 वर्ष की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में एक्यूट निमोनिया के चलते निधन हो गया. हाल ही में वह नवी मुंबई के ISKCON मंदिर के उद्घाटन समारोह में स्वस्थ और ऊर्जावान रूप में नजर आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सनातन धर्म प्रचार प्रयासों की सराहना की थी.

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भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. अभिनेता, निर्माता और निर्देशक धीरज कुमार का मंगलवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्हें एक्यूट निमोनिया की गंभीर अवस्था के चलते मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिवार के मुताबिक उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और उन्होंने अंतिम सांस ली. मनोरंजन जगत ने आज न केवल एक बेहतरीन कलाकार को खोया है, बल्कि एक ऐसे इंसान को भी अलविदा कहा है, जिन्होंने दशकों तक अपनी प्रतिभा और संवेदनशीलता से लाखों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई.

धर्म और संस्कृति से जुड़े रहे धीरज कुमार
धीरज कुमार हाल ही में नवी मुंबई के खारघर स्थित ISKCON मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे. वहां उनकी उपस्थिति ने सबको चौंका दिया था क्योंकि वो बिल्कुल स्वस्थ और ऊर्जावान नजर आ रहे थे. उन्होंने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार की खुले दिल से सराहना की थी. इस दौरान उन्हें देखने वालों को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति होगी. जिस व्यक्ति ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक भारतीय संस्कृति, धर्म और कला से नाता नहीं तोड़ा, वह आज हमारे बीच नहीं है. उनके जाने से इंडस्ट्री में जो खालीपन आया है, उसे भरना आसान नहीं होगा.

एक टैलेंट शो से शुरू हुआ था सफर
धीरज कुमार ने 1965 में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा था. उस समय वह एक टैलेंट हंट शो के फाइनलिस्ट बने थे, जिसमें उनके साथ सुभाष घई और राजेश खन्ना भी शामिल थे. इस प्रतियोगिता में राजेश खन्ना विजेता बने और बाद में सुपरस्टार कहलाए, लेकिन धीरज कुमार ने भी अपने अभिनय और परिश्रम से एक अलग राह बनाई. उन्होंने 1970 से 1984 के बीच 21 पंजाबी फिल्मों में काम किया और वहां अपनी अभिनय प्रतिभा का भरपूर परिचय दिया. इसके बाद उन्होंने ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘हीरा पन्ना’, ‘सरगम’, ‘रातों का राजा’, ‘बहरूपिया’ जैसी कई हिंदी फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाईं. उनका अभिनय स्वाभाविक, भावनात्मक और गहराई से भरा हुआ होता था, जो उन्हें भीड़ से अलग करता था। वो उन कलाकारों में से थे, जिन्होंने स्टारडम की चमक को प्राथमिकता न देकर अभिनय की ईमानदारी को अपनाया.

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क्रिएटिव आइ से बदली टेलीविजन की दिशा
धीरज कुमार सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, एक सफल निर्माता और निर्देशक भी थे. उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘क्रिएटिव आइ’ की स्थापना की, जिसने भारतीय टेलीविजन को कई यादगार धारावाहिक दिए। वो इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. उनके बैनर तले निर्मित शोज़ जैसे ओम नमः शिवाय, साईं बाबा, शोभा सोमनाथ की, और कर्मफल दाता शनि ने धार्मिक और पौराणिक धारावाहिकों की एक नई परंपरा शुरू की. धीरज कुमार की दूरदर्शिता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब टेलीविजन पर मनोरंजन का मतलब केवल पारिवारिक झगड़े दिखाना बन गया था, तब उन्होंने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धारावाहिकों के माध्यम से दर्शकों का रुख बदल दिया. उन्होंने भारतीय संस्कृति की गहराइयों को समझते हुए ऐसे विषयों को प्रस्तुत किया, जो लोगों की आस्था और चेतना से जुड़े थे.

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निजी जीवन में भी शांत और विनम्र व्यक्तित्व
धीरज कुमार सिर्फ पेशेवर रूप से ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी बेहद शांत और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे. इंडस्ट्री में उन्हें एक सुलझे हुए, सहयोगी और संस्कारी कलाकार के रूप में जाना जाता था. उन्होंने हमेशा अपने काम को पूजा समझा और कभी भी सस्ती लोकप्रियता या विवादों का हिस्सा नहीं बने. उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर नीयत साफ हो, तो इंसान अभिनय के माध्यम से समाज और संस्कृति दोनों की सेवा कर सकता है. उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है. कई बड़े सितारों, निर्देशकों और लेखकों ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. अभिनेता अक्षय कुमार, निर्देशक सुरेश वाडकर, अभिनेत्री जूही परमार और अन्य कलाकारों ने उन्हें याद करते हुए लिखा कि धीरज कुमार न केवल एक महान कलाकार थे, बल्कि एक मार्गदर्शक, एक सच्चे निर्माता और भारतीय मूल्यों के संवाहक भी थे.

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बता दें धीरज कुमार का जाना न केवल फिल्म और टीवी जगत की क्षति है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक चेतना के एक प्रमुख स्तंभ के ढहने जैसा है. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मनोरंजन के माध्यम से मूल्य, धर्म, संस्कृति और कला को बढ़ावा देने में लगा दी. उनकी बनाई कहानियां, निभाए किरदार और स्थापित सिद्धांत हमेशा नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित करते रहेंगे. उनकी यादें सिर्फ परदे पर नहीं, बल्कि लाखों दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगी.

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