Advertisement

Loading Ad...

‘हर धर्म का अलग देश तो हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं…’, वंदे मातरम का विरोध करने वालों को अन्नू कपूर ने दिया मुंहतोड़ जवाब

अनु कपूर नेराष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद पर अपनी बात रखी है, उन्होंने सरकार के फैसले का विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया है.

Loading Ad...

बॉलीवुड के जाने माने एक्टर अनु कपूर अक्सर ही अपने बयानों की वजह से चर्चाओं में बने रहते हैं. हाल ही में एक्टर ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद पर अपनी बात रखी है, साथ ही हिंदू राष्ट्र को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है.  हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की है. जिसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक आयोंजनों में इसके सभी 6 अंतरे को गाना अनिवार्य होगा. इसे लेकर विवाद गहराता जा रहा है, कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं. 

‘ये सरकार का एक शानदार फैसला है’

अब सरकार के फैसले और इसका विरोध करने वालों को अनु कपुर ने करारा जवाब दिया है. ये सरकार का एक शानदार फैसला है और मैं 32 वर्षों से अधिक समय से इसपर कह रहा हूं. बहुत अच्छा निर्णय लिया. ये कमाल का अद्भुत निर्णय है. और ये आज लिया गया है? अन्नू कपूर तो 32 साल पहले से वंदे मातरम का उद्घोष करता रहा है. तो अच्छी बात है. आज लोग फॉलो करते हैं, वंदे मातरम का अभिवादन करते हैं. आप अमेरिका के किसी व्यक्ति से ईस्ट कोस्ट के न्यूजर्सी के न्यूयॉर्क के, कुछ एलए के, कुछ कैलिफोर्नियां के दो-चार, पांच भाइयों-बहनों से मिलें और उनके मुंह से अगर वंदे मातरम का उद्घोष सुन लें तो समझिएगा कि ये बीमारी उनको अनु कपूर से लगी है”

Loading Ad...

‘इसपर किसी को ऑब्जेक्शन होना ही नहीं चाहिए’

Loading Ad...

अनु कपूर ने आगे कहा, 'स्वर्गीय परमूज्य पंडित बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय की ये अमर रचना ही हमारा राष्ट्रगान है, हमारा राष्ट्र गीत है वंदे मातरम. इसपर किसी को ऑब्जेक्शन होना ही नहीं चाहिए. क्यों पंडित जी ने कहा- सुफलाम, इसका मतलब समझे आप? सफलत शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? सफल मतलब एक ऐसा वृक्ष जिसपर फल आ गया वो सफल हो गया. तो आपने इतने बुरे काम किए हैं, अगर आपके पेड़ के जड़ों के अंदर जहर है तो उसके ऊपर भी फल आएंगे लेकिन जहरीले फल आएंगे. यहां पर पंडित बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ये उद्घोष करते हैं कि वंदे मातरम सुजलाम सुफलाम...मेरे उत्तम आचरण और कर्मों का फल मुझे देना. अगर मेरे कर्म अच्छे हों तभी देव माता मुझे फल देना, मुझे गलत कामों का फल नहीं देना। ये मैं पूरे भारतवासियों को कहना चाहता हूं, समझें इस बात को क्यों पंडित जी ने वंदे मातरम सुजलाम सुफलाम...मेरे अच्छे ईमानों का ही अंजाम देना. जब मैं कहता हूं कि ऐ अल्लाह मेरे हाल देख, ये उर्दू में भी इस बात को कह रहा हूं. जब मैं कहता हूं कि ऐ अल्लाह मेरे हाल देख, हुक्म ये होता है पहले अपने तू ईमान देख. अपने कर्म देख तू, मेरे कर्म अच्छे हों उसी का मुझे फल देना.अगर मेरे कर्म पापी के हों तो जलाकर भस्म कर देना.”

‘ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या है’

Loading Ad...

अनु कपूर यहीं नही रुके, उन्होंने आगे कहा, “संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा है, उससे भी प्राचीन भाषा हो वो तमिल है. लेकिन वो भी हमारे देश की भाषा है. वो अमेरिका की भाषा नहीं है. इस संस्कृत भाषा के अंदर बहुत ही कमाल का साहित्य है, वेद-पुराण, उपनिशद लिखे गए हैं, महाभारत है, रामायण है, न जाने कितने उपनिशद हैं. तो ये सारे संक्कृत भाषा में लिखे गए हैं, संस्कृत में ही ये प्रार्थना है और अगर आपको लगता है कि ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या है, हिंदू क्या प्रार्थना नहीं कर सकता है? और हिंदू प्रार्थना करेगा तो वो केवल अपने कल्याण की बात नहीं करेगा, समस्त विश्व के कल्याण की बात करेगा. अगर पूरे विश्व में सारा जो एटॉमिक हो रहा है, परमाणु बम का विस्फट हो रहा है, पूरे विश्व में जो हिंसा फैली हुई है, अगर कहीं भूले-भटके कोई शांति की लहर आई तो उस हवा के झोंके केवल भारत भूमि से आएंगे. क्योंकि यहीं पर अहिंसा का भी पाठ पढ़ाया जाता है.”

‘हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता है’

अनू कपूर ने इस दौरान हिंदू राष्ट्रकी बहस पर भी अपनी बात रखी, एक्टर ने कहा जब दुनिया में ईसाई,मुस्लिम और बौद्ध राष्ट्र मौजूद हैं तो हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर सवाल क्यों उठाया जाता है. एक्टर ने अपनी बात रखते हुए कहा, “130 क्रिश्चियन  राष्ट्र हो सकते हैं, 56 इस्लामिक राष्ट्र हो सकते हैं. 10-11 कम्युनिस्ट राष्ट्र हो सकते हैं. 9-10 बौद्ध राष्ट्र हो सकते हैं. तो हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता है. होना  चाहिए. प्रॉब्लम क्या है आपको. कोई प्रॉब्लम नहीं है.”

Loading Ad...

सरकार के फैसले से चिढ़े विरोधी 

यह भी पढ़ें

वंदे मातरम पर सरकार के फैसले के बाद से ही राजनीति की दुनिया में बवाल मच गया है. फैसले की आलोचना करने वालों का कहना है की गीत के बाद के छंदों में धार्मिक प्रतिवाद है. जो धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक सिद्धांतों के साथ विरोधाभास रखता है. वहीं AIMIM और अन्य मुस्लिम नेताओं ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही किसी को भई गीत गाने के लिए बाध्य न करने का आदेश दिया था. इसे थोपने से नेशनल इंटीग्रेशन को नुक़सान हो सकता है. हालांकि फ़िलहाल तो अनु कपूर ने इस फैसले का विरोध करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दे दिया है. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...