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'उदयपुर फाइल्स' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई 8 अगस्त तक टली, सेंसर बोर्ड से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' को लेकर सुनवाई हुई. यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अगुवाई वाली बेंच ने की. इस मामले में आरोपी जावेद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पक्ष रखा, जबकि फिल्म निर्माता की ओर से वकील गौरव भाटिया ने दलीलें पेश कीं. इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को होगी. जिसमें सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) के वकील कोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देंगे.

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राजस्थान के बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ काफी दिनों से खबरों में बनी हुई है, हाल ही में खबरें आई थी कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फिल्म पर रोक लगा दी है. इस फिल्म को 11 जुलाई को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन अभी फिल्म की रिलीज़ का रास्ता साफ़ नहीं हुआ है. 

दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई 8 अगस्त तक टली
 दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' को लेकर सुनवाई हुई. यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अगुवाई वाली बेंच ने की. इस मामले में आरोपी जावेद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पक्ष रखा, जबकि फिल्म निर्माता की ओर से वकील गौरव भाटिया ने दलीलें पेश कीं. इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को होगी.  जिसमें सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) के वकील कोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देंगे.

फिल्म का विरोध कर रहे मौलाना अरशद मदनी 
'उदयपुर फाइल्स' उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित है.  इस हत्याकांड में मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस को आरोपी बनाया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में हत्या को अंजाम दिया था.  फिल्म के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर की है.  उनका दावा है कि यह फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है और चल रहे मुकदमे को प्रभावित कर सकती है. 

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वकील मेनका गुरुस्वामी ने दिया तर्क
सुनवाई के दौरान कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद की वकील मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि इस मामले में अभी 160 गवाहों की जांच बाकी है और उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी के समय उम्र केवल 19 साल थी. उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत इसलिए दी क्योंकि उन पर लगे आरोपों के बीच कोई ठोस संबंध स्थापित नहीं हुआ था, लेकिन फिल्म की रिलीज से उनके मुवक्किल के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है. 

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वकील वरुण सिन्हा के मुताबिक, गुरुस्वामी ने बताया कि फिल्म निर्माता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि फिल्म का कथानक आरोपपत्र पर आधारित है और संवाद सीधे आरोपपत्र से लिए गए हैं.  इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए अपनी पुनरीक्षण शक्तियों का दुरुपयोग किया है.

केंद्र सरकार को बदलाव करने का अधिकार नहीं
सुनवाई में गुरुस्वामी ने कहा कि वर्तमान कानून तीन प्रकार की पुनरीक्षण शक्तियों का प्रावधान करता है.  इनका उपयोग केंद्र सरकार कर सकती है. एक शक्ति धारा 2ए में है. सरकार कह सकती है कि फिल्म का प्रसारण नहीं किया जा सकता.  दूसरा, वे प्रमाणन बदल सकते हैं और तीसरा, वे इसे निलंबित कर सकते हैं.  मगर प्रावधान में केंद्र सरकार को फिल्म कट सुझाना, संवाद हटाना, अस्वीकरण जोड़ना, सेंसर बोर्ड जैसे अस्वीकरणों में बदलाव करने का अधिकार नहीं है.

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किस पर बेस्ड है फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’?
‘उदयपुर फाइल्स’ 28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल साहू की हत्या पर आधारित है. कन्हैया लाल पर आरोप था कि उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की थी, जिसके बाद दो हमलावरों ने उनकी दुकान पर घुसकर गला रेतकर हत्या कर दी थी. इस घटना को हमलावरों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया था, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया था.

फिल्म की स्टारकास्ट 
फिल्म में विजय राज, रजनीश दुग्गल और प्रीति झांगियानी जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं. यह फिल्म 11 जुलाई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी. हालांकि, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका दायर कर दावा किया कि फिल्म का कंटेंट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकता है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले कई कट्स लगाए थे.

क्यों विवादों में है फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’?
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ वर्ष 2022 में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित है. ट्रेलर में नूपुर शर्मा के बयान, ज्ञानवापी विवाद और कुछ ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं जिन्हें लेकर आरोप लगे हैं कि वे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाते हैं. इसी आधार पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दिल्ली, मुंबई और गुजरात हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर  रोक लगाने की याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फिल्म सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है, वहीं फिल्म निर्माता दावा कर रहे हैं कि उनका उद्देश्य केवल सत्य को सामने लाना है.

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