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Smriti Irani ने उखाड़ दीं Congress की जड़ें, Amethi छोड़ भागे Rahul Gandhi

स्मृति ईरानी के सामने अमेठी से चुनाव लड़ने का फ़ैसला राहुल गांधी ने टाल दिया है। अमेठी की जगह अब वो रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे।

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आख़िरकार अमेठी और रायबरेली सीट से कांग्रेस ने सस्पेंस ख़त्म कर दिया, लेकिन उस हिसाब से नहीं किया जिस हिसाब से अंदाज़ा लगाया जा रहा था। मसलन अमेठी छोड़कर राहुल गांधी ने रायबरेली का रुख कर लिया है। रही बात प्रियंका गांधी की तो उन्हें तो मौक़ा ही नहीं दिया। यकीं मानिए कांग्रेस का ये फ़ैसला उसके लिए बहुत नुक़सानदायक साबित होगा, और ऐसा हम नहीं बल्कि ऐसा वरिष्ठ पत्रकारों के साथ साथ राजनीतिक विश्लेषकों ने भी कहना शुरु कर दिया है। सोचिए जिस सीट पर कांग्रेस बीजेपी को चुनौती दे सकती थी, उसे बिना लड़े ही अपनी हार स्वीकार कर ली । उस रायबरेली में पहुंच गए जिसे भले ही सोनिया गांधी का गढ़ माना जाता था लेकिन अब वहां के हालात भी कांग्रेस के Favour में नहीं दिखते

ये फ़ैसला एकदम किया हुआ नहीं लगता। फ़ैसला बहुत पहले ही हो चुका था बस माहौल को देखकर ऐलान करने के लिए सही वक़्त का इंतज़ार किया जा रहा था…अब सोशल मीडिया पर लोग कांग्रेस को खूब खरी खोटी सुना रहे हैं ।और सुनाए भी क्यों ना ? बिना लड़े ही चुनावी मैदान से भाग निकलोगे तो लोग आरती तो उतारेंगे नहीं…खैर, रायबरेली से राहुल गांधी तो वहीं अमेठी से सोनिया गांधी के प्रतिनिधि रहे केएल शर्मा को टिकट दिया गया है। और सोचिए केएल शर्मा से जब इस बारे में सवाल हुआ तो वो हक्के बक्के नज़र आए जैसे उन्हें कुछ पता ही ना हो

वैसे, कहा तो ये तक जा रहा है कि राहुल यूपी में किसी भी सीट से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थे लेकिन खड़गे ने उन्हें रायबरेली के लिए मना लिया। बाकि प्रियंका तो चुनाव लड़ने के लिए इस बार भी तैयार नहीं हुईं। रायबरेली के अलावा राहुल केरल की वायनाड सीट से लड़ रहे हैं जिसपर मतदान 26 अप्रैल को हो चुका है।

सोचिए ये हालात तो कांग्रेस के तब हैं जब स्मृति ईरानी ने खुली चुनौती दे रही थीं, राहुल पर अमेठी से भागने का आरोप लगा रही थीं। हैरानी देखिए ये वो सीट है जहां से 2004, 2009 और मोदी लहर के बीच 2014 में भी राहुल गांधी सांसद बने थे। फिर 2019 में स्मृति ने उन्हें हरा दिया था, लेकिन अब 2024 में जब स्मृति ईरानी राहुल को चुनौती दे रही थी, तो राहुल लड़कर जीतने या हारने के बजाए पहले ही मैदान से भाग खड़े हुए। यूपी में सीट भी कौन सी चुनी रायबरेली। अब रायबरेली का इतिहास भी जान लीजिए।

साल 2004 से लेकर 2024 तक सोनिया गांधी यहां से सांसद रही हैं लेकिन स्वास्थ्य का हवाला देकर सोनिया ने इस बार यहां से चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया। तो अब बेटे ने इसी सीट को Safe Seat मानते हुए चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया। राहुल रायबरेली से जीते या हारे, चर्चा उनके अमेठी छोड़ने को लेकर ही होगी। खैर एक तरफ रायबरेली से राहुल गांधी तो वहीं बीजेपी ने यहां दिनेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है। ये वही दिनेश हैं जो 2019 में सोनिया गांधी से चुनाव हार चुके हैं।

कांग्रेस आलाकमान के इस फ़ैसले पर वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने क्या लिखा है ये आपको जानना चाहिए। उन्होंने लिखा- अमेठी को केएल शर्मा के हवाले छोड़ने का ये फैसला कांग्रेस के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होगा..अब सोचिए अगर मोदी विरोधी पत्रकार भी कांग्रेस के इस फ़ैसले पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ सोचकर ही उठा रहे होंगे। बहरहाल अब आप इस ख़बर को लेकर क्या राय रखते हैं, आपके हिसाब से कांग्रेस का ये फ़ैसला कैसा है कमेंट करके हमें जरुर बताएं।

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