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समाजवादी पार्टी को योगी से इतनी नफरत? माफियाओं के नाम पर मांग रही वोट

यूपी में ना तो माफिया मुख्तार का खौफ है। ना ही अतीक का आतंक। यूपी में से दोनों माफिया तो खत्म हो गये। लेकिन लगता है इन माफियाओं के लिए समाजवादी पार्टी का प्यार खत्म नहीं हो रहा है। इसीलिये सपाई मुखिया अखिलेश यादव के मंच से सरेआम माफियाओं के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं..!

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एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में माफियाओं का बोलबाला हुआ करता था। अतीक अहमद। मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं को सरेआम चुनाव लड़ाया जाता था। लेकिन साल 2017 में जब भगवाधारी योगी आदित्यनाथ के हाथ में उत्तर प्रदेश की सत्ता आई तो। माफियाओं का बुरा दौर शुरू हो गया। और फिर चाहे मुख्तार अंसारी हों या अतीक अहमद। कोई कितना ही बड़ा माफिया क्यों ना हो। सभी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया गया। और आज हालात ऐसे हैं कि। यूपी में ना तो माफिया मुख्तार का खौफ है। ना ही अतीक का आतंक। यूपी से दोनों ही बड़े माफिया तो खत्म हो गये। लेकिन लगता है इन माफियाओं के लिए समाजवादी पार्टी का प्यार खत्म नहीं हो रहा है। इसीलिये सपाई मुखिया अखिलेश यादव के मंच से सरेआम माफियाओं के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।
 
कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाल चुके अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को यूपी की जनता एक दो बार नहीं लगातार तीन चुनावों में पूरी तरह से नकार चुकी है। सबसे पहले साल 2017 के यूपी चुनाव में। फिर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में। और तीसरी बार साल 2022 के यूपी चुनाव में। लेकिन इसके बावजूद लगता है समाजवादी पार्टी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। इसीलिये एक तरफ जहां सीएम योगी आदित्यनाथ माफियाराज खत्म करने के नाम पर जनता से वोट मांग रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता माफियाओं के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

एक तरफ माफियाओं की अकड़ तोड़ने वाले योगी आदित्यनाथ की दहाड़। तो वहीं दूसरी तरफ मुरादाबाद सपा के जिलाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान हैं। जो सरेआम अखिलेश यादव के मंच से मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे माफियाओं के नाम पर वोट मांग रहे हैं। जिन पर हत्या। रंगदारी। लूट। अपरहरण के दर्जनों केस दर्ज थे। ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी के पास जनता को देने के लिए कुछ नहीं बचा है। इसीलिये अब माफियाओं के नाम पर ही वोट मांगने में लगी हुई है। क्योंकि ये बात हाजी मोहम्मद उस्मान जैसे सपाई नेता भी अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के निधन पर उनके घर जाकर दुख जताने का भले ही वक्त ना मिले। लेकिन मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं की मौत के बाद उसके घर जाकर जरूर दुख बांटते हैं।

बात यहीं खत्म नहीं होती। मुख्तार अंसारी जैसे माफिया के घर जाकर दुख बांटने वाले अखिलेश यादव उसके भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर से चुनाव भी लड़ा रहे हैं। तो फिर भला हाजी मोहम्मद उस्मान जैसे सपाई नेता मुख्तार-अतीक जैसे माफियाओं के नाम पर वोट मांगने में क्यों पीछे रहेंगे। सपा के इस माफिया प्रेम से ही समझ सकते हैं कि इस लोकसभा चुनाव में एक ऐसी लकीर खींच दी गई है। जिसके एक तरफ माफियाओं का साम्राज्य में मिट्टी में मिलाने वाली योगी सरकार और दूसरी तरफ माफियाओं के नाम पर वोट मांगने वाली समाजवादी पार्टी। अब यूपी की जनता को ये तय करना है कि वो इस लोकसभा चुनाव में किसका साथ देगी।
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