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Congress की जडें हिलाने के लिए आखरी वक्त पर मैदान में उतरा मोदी का शेर !

सुल्तानपुर में अपनी मां मेनका गांधी के चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे वरुण गांधी ने अमेठी और रायबरेली का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हम लोग जब 10 पहले सुल्तानपुर चुनाव लड़ने आए थे तो लोगों ने कहा कि जो अमेठी और रायबरेली में रौनक है वह यहां भी आए

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प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कहा जाता है कि वो जो भी कदम उठाते है, सोच समझ कर उठाते है ।कोई भी फैसला लेने से पहले उसके दूरगामी परिणाम सोच लेते है। तब जाकर कोई कदम उठाया जाता है। इसी कड़ी में एक नाम जुड़ा है वरुण गांधी का । क्योंकि जब पिछले दिनों पीलीभीत से वरुण गांधी का का टिकट काटा गया था ।तो कहा गया था कि मोदी वरुण के पार्टी विरोधी बयानों से खफा है इसलिए उन्हें उस बगावत की सजा मिली है ।खबरें ऐसी भी आई की आखरी वक्त पर रायबरेली से वरुण को चुनाव लड़ाया जा सकता है । लेकिन ऐसा हुआ नहीं ।और जानता ये भी कोई नहीं की। मोदी ने वरुण के लिए क्या सोचा है ।क्योंकि चुनाव प्रचार से नदारद चल रहे वरुण गांधी अपनी मां मेनका गांधी के लिए प्रचार करने के लिए सुल्तानपुर पहुंचे थे ।और इस चुनाव प्रचार में वरुण ने जो कहा उसे सुनकर गांधी परिवार जरूर हिल जाएगा ।गांधी परिवार के दो चिराग है, एक वरुण गांधी, दुसरे राहुल गांधी ।दोनों अलग विचारधारा के लोग ।एक ने अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों के लिए जी जान लगा दी । दुसरे ने जब से कांग्रेस की कमान संभाली है तब से लगातार कांग्रेस जमीन में उतरती जा रही है। एक मात्र शक्ति की बात करता है तो दुसरा शक्ति को खत्म करने की बात करता है ।

एक तरफ अमेठी रायबरेली है । जहां से गांधी परिवार भाग रहा है ।कभी जनता के बीच में जाकर नही देखता। राहुल गांधी को अमेठी रायबरेली में अपना नाम फाइनल करने में महीनों लग जाते है। वहीं वरुण गांधी है जिनकी पहचान गांधी परिवार से नहीं अपने काम से है ।एक तरफ राहुल है तो शक्ति से लड़ने की बात करते है ।दूसरी तरफ वरुण है जो शक्ति को सर्वोपरी बता रहे है ।मेनका गांधी के लिए प्रचार कर रहे वरुण गांधी के बारे में जब मेनका से पुछा गया तो मेनका गांधी ने कहा वो प्रचार करने तब आया, जब मैंने मांगा । मतलब मां होने के बाद भी मेनका को वरुण को मांगना पड़ा । और इसीलिए कहा जा रहा है कि मोदी ने अपने तुरुप के इक्के को लास्ट के लिए बचा कर रखा है ।  इससे पहले भी जब वरुण का नाम रायबरेली के लिए चल रहा था । तब भी राहुल गांधी के सांस फूलती है।  क्योंकि वरुण के काम करने का तरीका है उसने गांधी परिवार डर के साए में रहता है । यहीं कारण है राहुल ने कहा था कि वरुण और मेरी विचारधारा अलग है।दरअसल राहुल से पूछा गया था कि क्या वरुण कांग्रेस में शामिल हो सकते है । तो राहुल के चेहरे की हवाइयां उड़ गई थी ।राहुल को पता है वो वरुण की लोकप्रियता के सामने टिक नहीं पाएंगे ।और पहले से ही दो धड़ों में बंटे परिवार की हालत खराब हो जाएगी। लेकिन वैसे भी वरुण गांधी कांग्रेस की जड़ें हिलाने कि लिए मैदान में उतर चुके है ।वरुण के मैदान में उतरने से कांग्रेस की नींदे उड़ी हुई है ।क्योंकि कांग्रेस को लग रहा था कि वरुण टिकट कटने से नाराज है ।लेकिन आखरी वक्त पर मोदी ने वरुण को मैदान में उतराकर खेल ही पलट दिया ।और साथ ही इंकार इस बात से भी नहीं किया जा सकता है कि वरुण का टिकट कटना भी किसी ना किसी रणनीति का हिस्सा है । क्योंकि हो सकता है वरुण के लिए मोदी ने जरुर कुछ और सोचा होगा ।अब क्या सोचा है ।वो चार जून के बाद साफ हो ही जाएगा। लेकिन जैसे वरुण गांधी ने कांग्रेस की धज्जियां उड़ाई है उसपर आपका क्या कहना है ।कमेंट कर अपनी राय हमें जरूर बताएं।
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