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CM योगी से जुड़ी बड़ी यह बात आप शायद ही जानते हो!
भारत युगों-युगों से साधु-संतों की भूमि रही है। हर क्षण किसी न किसी महापुरुष ने भारत पावन की पावन धरा पर सनातन को बचाने के लिए जन्म लिया है और हिंदू धर्म में भी इन साधु संतों, ऋषि महर्षि, मुनि, आदि का बखान हमें देखने को मिलता है। लेकिन आख़िर कौन होते हैं ये साधु-संत, ऋषि-महर्षि, मुनि-महात्मा? आख़िर कौन हैं? और विश्व पटल पर हमेशा चर्चाओं में रहने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी संत हैं या साधु हैं या फिर कोई मुनि हैं?
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भारत में साधु-संत, ऋषि-महर्षि, मुनि और संन्यासियों की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, और इन्हीं साधु-संतों, ऋषि-महर्षियों ने जब भी सनातन धर्म पर कोई आँच आई है तो उसे बचाने के लिए अपने प्राण तक त्याग दिए हैं। इतना ही नहीं, इन्हीं महात्माओं-महर्षियों ने कई ऐसे धार्मिक ग्रंथ लिखे हैं जिनका प्रभाव आज भी दुनिया को सही राह पर चलने में मदद कर रहा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अक्सर हम जिन साधु-संतों, संन्यासियों, और महर्षियों को देखते हैं वो आख़िर हैं कौन? इसके साथ ही विश्व पटल पर हमेशा चर्चाओं में रहने वाले हमारे राज्य के मुख्यमंत्री सीएम योगी जी आख़िर कौन हैं? क्या वो एक संत हैं, क्या वो संन्यासी हैं या फिर वो ऋषि हैं?
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सनातन था, सनातन है, सनातन रहेगा इसका प्रमाण हम अक्सर ऐन दिन देखते रहते हैं, और इसी सनातन को बचाने के लिए कई साधुओं-संतों और महर्षियों ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया। उन्हीं की वजह से हमारा धर्म आज तक सुरक्षित है। दुख तो इस बात का है कि हमें ये ही नहीं पता कि ये साधु-संत, महात्मा आख़िर हैं कौन। हम अपने बच्चों को अंग्रेज़ी के शब्द तो सीखा देते हैं लेकिन हम उन्हें ये नहीं बताते कि जिन्होंने हमारे वेदों-पुराणों, महाभारत, रामायण जैसे ग्रंथों को लिखा है वो हैं कौन? आज हम आपसे एक अनुरोध करते हैं कि इस वीडियो को आप अपने बच्चों, परिवार, दोस्तों को जरूर भेजें। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं कि आख़िर कौन होते हैं साधु? साधु वो होते हैं जो लंबे समय से अपनी साधना में इस कदर लीन रहते हैं कि संसार के मोह से उन्हें कोई मतलब नहीं रहता। उनके लिए वेदों का ज्ञान भी आवश्यक नहीं होता है, वो अपनी साधना से प्राप्त ज्ञान से ही दुनिया को कई चीजों का सही मतलब समझाते हैं। अगर शास्त्रों की बात की जाएं तो जो व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह और माया से दूर रहते हैं, वो साधु कहलाते हैं। लेकिन अक्सर हम साधु और संतों का नाम साथ लेते हैं, लेकिन संत साधु से बिल्कुल अलग होते हैं।
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आख़िर कौन होते हैं संत? सत्य की राह पर चलने वाले सत्यवादी, आत्मज्ञान से परिपूर्ण, दुनिया के छलावे से दूर रहने वाले संत कहलाते हैं। उदाहरण के लिए हम समझ सकते हैं कि संत कबीरदास, संत तुलसीदास, और संत रविदास। इन्होंने दुनिया और आध्यात्म के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखा था, अपनी रचनाओं से दुनिया को सही-गलत का पाठ पढ़ाया था, इसलिए ये संत कहलाए। चलिए जान लेते हैं।
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आख़िर कौन होते हैं ऋषि? ऋषि ऐसे ज्ञानियों को कहा जाता है जिन्होंने ज्ञान, तपस्या और कठोर साधना के माध्यम से सत्य को प्राप्त किया हो, जिन्होंने वेदों और धार्मिक ग्रंथों की रचना की हो, जिन्होंने दुनिया को सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया हो। ऐसे ज्ञानियों को ऋषि कहा जाता है। उदाहरण के लिए समझें तो महर्षि व्यास, विश्वामित्र, गौतम, वसिष्ठ, अगस्त्य, दीर्घतम और कश्यप जैसे कई महान ऋषियों का उल्लेख वेदों में होता है। अब बात करते हैं महर्षियों के बारे में आख़िर कौन होते हैं महर्षि? महर्षि उन महात्माओं को कहा जाता है जिन्हें दिव्य चक्षु की प्राप्ति होती है। आपको जानकारी देते चलें कि एक व्यक्ति को तीन तरह के चक्षु प्राप्त होते हैं: एक ज्ञान चक्षु, दिव्य चक्षु, और परम चक्षु। जिन लोगों को ज्ञान चक्षु की प्राप्ति होती है, वो ऋषि कहलाते हैं। वहीं जो परम चक्षु को प्राप्त कर लेते हैं, उन्हें ब्रह्मर्षि कहा जाता है। लेकिन आपको बता दें कि महर्षि दयानंद सरस्वती के बाद किसी को भी महर्षि की उपाधि नहीं मिली थी। लेकिन वहीं अगर मुनि की बात की जाए तो मुनि भी अपने में श्रेष्ठ होते हैं। तो चलिए जान लेते हैं इनके बारे में भी आख़िर कौन होते हैं मुनि? मुनि ऐसे ज्ञानियों को कहा जाता है जो बहुत कम बोलते हैं, जो अक्सर मौन धारण किए रहते हैं, ये वेदों, पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के ज्ञानी होते हैं। ये एकांतवास में ही तप करके अपना जीवन व्यतीत करते हैं। इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि ये मुनि दुनिया के मोह से दूर रहते हैं। लेकिन इन साधु-संतों का अगर आशीर्वाद प्राप्त हो जाए तो लोगों का भाग्य बदल जाता है, जीवन में खुशियाँ दस्तक देने लगती हैं।
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कौन हैं सीएम योगी, साधु या संत? उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने छोटी उम्र में संसार का मोह त्याग दिया और सनातन का रंग उन पर ऐसा चढ़ा कि वो सीधा अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बन गए। मुख्यमंत्री योगी एक हिंदू साधु हैं जो हिंदुत्व के लिए हमेशा खड़े रहते हैं और इसी कारण से 12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैधनाथ के निधन के बाद योगी जी को गोरखनाथ मंदिर का महंत बनाया गया। उसके 2 दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक तरीके से मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया। इसके बाद ये अब अपने कर्म के साथ-साथ अपना धर्म भी बाखूबी निभा रहे हैं।