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खरमास में कर सकते हैं ये शुभ कार्य, बस इन आसान नियमों का रखें ध्यान

खरमास में धार्मिक और पूजा-पाठ जैसी चीजें बेहद फलदायी मानी जाती हैं. सूर्य देव की पूजा करना इस समय बहुत शुभ होता है. आप सुबह सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं, इससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक शक्ति बढ़ती है. वहीं, भगवान विष्णु की पूजा, व्रत रखना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है.

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खरमास, नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं. सोचते हैं कि अब तो शादी या गृह प्रवेश जैसी कोई भी शुभ चीज नहीं कर सकते, लेकिन सच्चाई यह है कि खरमास केवल मांगलिक कार्यों पर रोक लगाता है, बाकी शुभ काम और पुण्य के लिए यह महीना बहुत खास माना जाता है. अगर आप सही दिशा और नियम जान लें, तो इस समय आप हर काम बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं.

खरमास कब होता है

सबसे पहले जान लें कि खरमास कब होता है. पंचांग के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तब खरमास शुरू हो जाता है. यह समय 14 जनवरी 2026 तक रहेगा. धार्मिक दृष्टि से यह समय संयम, साधना और आत्मचिंतन के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इसका मतलब यह नहीं कि आप एक महीने तक कुछ भी शुभ नहीं कर सकते. बस ध्यान रहे कि विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य इस समय वर्जित हैं.

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खरमास में ये काम करना बेहद शुभ

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खरमास में धार्मिक और पूजा-पाठ जैसी चीजें बेहद फलदायी मानी जाती हैं. सूर्य देव की पूजा करना इस समय बहुत शुभ होता है. आप सुबह सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं, इससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक शक्ति बढ़ती है. वहीं, भगवान विष्णु की पूजा, व्रत रखना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है.

तीर्थ यात्रा भी इस दौरान लाभकारी

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तीर्थ यात्रा भी इस दौरान लाभकारी होती है.किसी पवित्र नदी में स्नान करना या धार्मिक स्थलों की यात्रा करना मोक्ष की दिशा में कदम बढ़ाने जैसा है. इसके अलावा, दान-पुण्य का महत्व और बढ़ जाता है. जरूरतमंदों को अन्न, गर्म कपड़े या कंबल देना, गाय की सेवा करना, या गौशाला में दान करना सीधे तौर पर पुण्य देता है.

गृह प्रवेश के लिए इंतजार करना होगा

अगर आप घर और वास्तु से जुड़े काम कर रहे हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं. भूमि पूजन और नींव पूजन खरमास में किया जा सकता है. यह मांगलिक कार्य में नहीं आता, इसलिए घर बनाने की तैयारी या नींव पूजन में कोई बाधा नहीं आएगी. बस गृह प्रवेश के लिए इंतजार करना होगा, जब खरमास समाप्त हो जाए.

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रोजाना भगवद् गीता का पाठ करना या सुनना

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भले ही शादी या गृह प्रवेश न कर सकते हों, लेकिन इस समय मानसिक और आत्मिक विकास के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है. रोजाना भगवद् गीता का पाठ करना या सुनना, अपने इष्टदेव के मंत्रों का जाप करना और साधना में समय देना आपके मन को शांत और सकारात्मक बनाएगा.

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